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हैदराबाद में बेबस हुआ हिमाचल का किसान पिता, एक आंख खो चुका मासूम, दूसरी बचाने की जंग

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नौ वर्षीय हिमानीश रेटिनोब्लास्टोमा जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है और अब तक एक आंख की रोशनी खो चुका है। महंगे इलाज के बीच किसान पिता ने समाज और सरकार से आर्थिक मदद की गुहार लगाई है।

सिरमौर/नाहन

कैंसर ने बचपन को अस्पताल तक सीमित किया

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जिला सिरमौर के नाहन विधानसभा क्षेत्र की चाकली पंचायत के सरोगा टिक्कर गांव का 9 वर्षीय हिमानीश इन दिनों जिंदगी की कठिन लड़ाई लड़ रहा है। महज साढ़े छह साल की उम्र में रेटिनोब्लास्टोमा (आंखों का कैंसर) का पता चलने के बाद से उसका बचपन अस्पतालों, दवाइयों और इलाज के लंबे दौर में गुजर रहा है।

इलाज के दौरान एक आंख निकालनी पड़ी

परिजनों के अनुसार, कुछ वर्ष पहले अचानक एक आंख की रोशनी चली जाने के बाद पीजीआई चंडीगढ़ में जांच करवाई गई, जहां कैंसर की पुष्टि हुई। बाद में बेहतर इलाज की उम्मीद में परिवार बच्चे को हैदराबाद के सेंटर फॉर साइट अस्पताल ले गया, जहां संक्रमण रोकने के लिए डॉक्टरों को उसकी एक आंख निकालनी पड़ी। तब से लगातार वहीं उपचार जारी है।

अब तक 13 लाख रुपये खर्च, कर्ज में डूबा परिवार

हिमानीश के पिता मनीष शर्मा, जो पेशे से किसान हैं, ने बताया कि अब तक इलाज, दवाइयों और यात्रा पर 12 से 13 लाख रुपये तक खर्च हो चुके हैं। यह रकम उन्होंने रिश्तेदारों से मदद और कर्ज लेकर जुटाई है। मुख्यमंत्री राहत कोष से 2 लाख रुपये और सहारा योजना के तहत मासिक सहायता मिली, लेकिन महंगे इलाज के सामने यह भी पर्याप्त नहीं पड़ रही।

सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ न मिल पाने की परेशानी

परिवार का कहना है कि हैदराबाद में आयुष्मान और हिमकेयर कार्ड मान्य न होने से आर्थिक बोझ और बढ़ गया है। यदि इन योजनाओं का लाभ मिल पाता, तो इलाज का बड़ा हिस्सा कवर हो सकता था और उन्हें बार-बार आर्थिक संकट का सामना न करना पड़ता।

दूसरी आंख बचाने के लिए लंबा इलाज जरूरी

डॉक्टरों के अनुसार हिमानीश की दूसरी आंख फिलहाल सुरक्षित है, लेकिन ट्यूमर का खतरा कई वर्षों तक बना रह सकता है। अब तक कई बार कीमोथैरेपी और रेडियोथैरेपी हो चुकी है, और आगे भी नियमित जांच व इलाज जरूरी बताया गया है। परिवार हर रिपोर्ट के साथ उम्मीद और चिंता के बीच समय बिता रहा है।

समाज से मदद की मार्मिक अपील

मनीष शर्मा ने भावुक अपील करते हुए कहा कि एक पिता के रूप में उनकी सबसे बड़ी इच्छा अपने बच्चे की बची हुई आंख की रोशनी को सुरक्षित रखना है। इलाज, सफर, ठहरने और खाने-पीने का खर्च लगातार बढ़ रहा है, और एक किसान परिवार के लिए इसे लंबे समय तक उठाना बेहद कठिन है। उन्होंने समाज, संस्थाओं और सरकार से मदद की गुहार लगाई है, ताकि हिमानीश का इलाज बिना रुके जारी रह सके।

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