लेटेस्ट हिमाचल प्रदेश न्यूज़ हेडलाइंस

Ajit Pawar Plane Crash

Ajit Pawar Plane Crash / महाराष्ट्र के डिप्टी CM अजित पवार का प्लेन क्रैश में निधन, PM मोदी ने जताया दुख

चंबा में प्राकृतिक हल्दी की खेती से किसानों की आमदनी में इज़ाफा, सरकार ने 90 रुपए किलो समर्थन मूल्य पर की खरीद

Share On WhatsApp Share On Facebook Share On Twitter

चुवाड़ी

भटियात के किसानों ने बेची 12 क्विंटल हल्दी, प्राकृतिक खेती से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

प्राकृतिक खेती बनी किसानों की मजबूत आर्थिकी की आधारशिला
हिमाचल प्रदेश सरकार की प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की नीति अब ज़मीन पर असर दिखा रही है। जिला चंबा के भटियात उपमंडल में किसानों ने प्राकृतिक विधि से तैयार की गई 12 क्विंटल हल्दी सरकार को बेची है। इसके लिए उन्हें 90 रुपए प्रति किलो की दर से समर्थन मूल्य दिया गया, जिससे किसानों के चेहरे पर संतोष और उत्साह देखने को मिला।

हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें: Join WhatsApp Group

सरकार की नीति से बदल रही है खेती की दिशा
प्राकृतिक खेती को लेकर राज्य सरकार की योजना का उद्देश्य न केवल जैविक उत्पादों को बढ़ावा देना है, बल्कि किसानों की आय को भी सुनिश्चित करना है। मक्की, गेहूं, जौं और अब हल्दी जैसी फसलों के लिए समर्थन मूल्य निर्धारित कर सरकार ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि उनकी मेहनत का उचित मूल्य उन्हें घर द्वार के पास मिलेगा।

भटियात के किसानों की सराहनीय पहल
गांव सलोह के राजेश बलौरिया, ओधरा के निखिल ठाकुर, तारागढ़ के करण सिंह, कुठेड़ के शेर सिंह और जनूही की मनीषा शर्मा जैसे किसानों ने बताया कि प्राकृतिक खेती से न केवल लागत घटी है बल्कि उत्पाद का मूल्य भी बेहतर मिला है। अब उनके गांव के अन्य किसान भी इस पद्धति की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

प्राकृतिक हल्दी की बिक्री की तय प्रक्रिया
परियोजना निदेशक डॉ. ज्योति रंजन कालिया ने बताया कि केवल उन्हीं किसानों से हल्दी की खरीद की गई है जो पिछले एक वर्ष से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं और सितारा प्रमाणित हैं। खरीदी गई हल्दी का एक हिस्सा एफपीसी कंपनी भवारना को प्रोसेसिंग के लिए भेजा जाएगा और शेष भाग को जिले में डेमो प्लांट्स के माध्यम से प्रचार-प्रसार हेतु प्रयोग किया जाएगा।

स्वरोजगार और जागरूकता की दिशा में सशक्त पहल
डॉ. कालिया ने कहा कि प्राकृतिक खेती को अपनाकर युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए रास्ते खुले हैं। साथ ही, किसानों को खेती के आधुनिक और जैविक विकल्पों से जोड़ने का काम भी इस नीति से हो रहा है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि जानकारी और सहायता के लिए वे आत्मा परियोजना निदेशक कार्यालय या बीटीएम, एटीएम से संपर्क करें।

हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें

ताज़ा खबरों और अपडेट्स के लिए अभी हमारे WhatsApp ग्रुप का हिस्सा बनें!

Join WhatsApp Group

आपकी राय, हमारी शक्ति!
इस खबर पर आपकी प्रतिक्रिया साझा करें


[web_stories title="false" view="grid", circle_size="20", number_of_stories= "7"]