लांस नायक मनीष ठाकुर : शहीद की वीरांगना ने तिरंगे पर वार दिया अपना सिंदूर, छोटे भाई ने दी मुखाग्नि
नाहन
सिक्किम में हुए लैंडस्लाइड में शहीद हुए नाहन के बड़ा बन गांव निवासी लांस नायक मनीष ठाकुर का पार्थिव शरीर सैन्य प्रोटोकॉल के साथ बुधवार दोपहर करीब 1:00 के आसपास उनके पैतृक गांव पहुंचा।
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इस दौरान काला अंब से बड़ा बन तक शहीद की वीर यात्रा में हजारों की तादाद में लोग शामिल हुए। इस दौरान मनीष ठाकुर अमर रहे भारत बलिदानी जिंदाबाद के नारे लगते रहे।

गमगीन माहौल के बीच ना केवल मनीष ठाकुर का परिवार बल्कि उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हर आंख नम थी। शहीद के पिता जोगिंदर ठाकुर, माता किरण वाला और भाई धीरज ठाकुर का रो कर बुरा हाल था तो वही शहीद की वीरांगना पत्नी तन्नू बेहोशी की हालत में बेहाल थी।
शहीद की वीरांगना का यह मार्मिक दृश्य वीर सपूत की अंतिम यात्रा को गम के सैलाब में बहाता हुआ नजर आया। असल में मनीष ठाकुर और तनु 3 माह पहले ही परिणय सूत्र में बंधे थे। अभी ना तो शहीद की वीरांगना के हाथों की मेहंदी सूखी थी और ना ही उसके हाथों में सजे चूड़े का रंग फीका पड़ा था।

शहीद की वीरांगना ने तिरंगे पर अपने सिंदूर को न्योछावर करते हुए भावुक पलों से अंतिम विदाई दी। शहीद के भाई धीरज ठाकुर के द्वारा अपने बड़े भाई को मुखाग्नी दी गई जबकि इससे पहले सेना की 11 कुमाऊं रेजीमेंट की टुकड़ी व सिरमौर पुलिस की टुकड़ी के द्वारा सैन्य सम्मान दिया गया।
प्रशासन की ओर से एडीएम एलआर वर्मा एसडीएम राजीव संख्यान, एसपी निश्चित सिंह नेगी, सैनिक वेलफेयर बोर्ड उपनिदेशक मेजर दीपक धवन मुख्य रूप से उपस्थित रहे। प्रशासन की ओर से 7 लाख की फ़ौरी राहत राशि चेक के रूप में वीरांगना तनु को सौंपी गई जबकि अंतिम संस्कार के लिए संस्कार राशि₹15000 सैनिक वेलफेयर बोर्ड के द्वारा दिए गए।
बता दें कि बीते रविवार की शाम करीब 6:30 बजे के आसपास सिक्किम में हुए लैंडस्लाइड की चपेट में तीन डोगरा रेजीमेंट का कैंप आ गया था। जिसमें सिरमौर के बडा बन गांव निवासी मनीष ठाकुर चपेट में आ गए थे। इस लैंडस्लाइड में शहीद हुए मनीष ठाकुर की पार्थिव देह मंगलवार को बागडोगरा से वाया बरेली होते हुए चंडीगढ़ पहुंचनी थी।
मौसम के खराब होने के चलते वायु सेवा का यह विमान मंगलवार को चंडीगढ़ में लैंड नहीं हो पाया था। इसके बाद यह प्लेन गाजियाबाद चला गया था। बुधवार की सुबह को सैनिक की पार्थिव देह विमान से चंडीगढ़ पहुंची थी जहां से सड़क मार्ग से होते हुए पार्थिव देह पैतृक गांव पहुंची।
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