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हाईकोर्ट ने पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता पर 10,000 रुपये की कॉस्ट लगाई: फैमिली पेंशन मामले में निंदा

हिमाचलनाउ डेस्क | 1 दिसंबर 2024 at 11:09 am

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Himachalnow / शिमला

फैमिली पेंशन मामले में देर से कार्रवाई पर कोर्ट की सख्ती

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने फैमिली पेंशन से जुड़े एक मामले का समय पर निपटारा नहीं करने पर पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता को 10,000 रुपये की कॉस्ट लगाई है। यह मामला बीएंडआर डिवीजन, एचपी पीडब्ल्यूडी चौपाल के अधिशासी अभियंता से जुड़ा था। कोर्ट ने आदेश दिया कि तीन सप्ताह के भीतर इस फैसले की अनुपालना रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।


हाईकोर्ट ने दिए सख्त निर्देश: समय सीमा का उल्लंघन

कार्यवाही में विफलता के कारण अदालत का हस्तक्षेप

हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति ज्योत्सना रिवाल दुआ ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि कौरी देवी के फैमिली पेंशन मामले का 10 अक्टूबर 2023 को निपटारा करने के बाद भी आवश्यक कार्रवाई में कोई प्रगति नहीं हुई थी। कार्यकारी अभियंता को मामले का समाधान सुनिश्चित करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया था, लेकिन वे समय सीमा के भीतर कार्रवाई नहीं कर पाए।

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अनुपालना याचिका दाखिल

नतीजतन, कौरी देवी ने 12 जुलाई 2024 को अनुपालना याचिका दाखिल की, क्योंकि निर्णय का अनुपालन नहीं किया गया था। इसके बाद 24 सितंबर 2024 को याचिका का नोटिस जारी किया गया, और प्रतिवादियों को दो हफ्ते के भीतर निर्णय के अनुपालन पर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया।


अतिरिक्त समय की मांग पर हाईकोर्ट की प्रतिक्रिया

समय सीमा के उल्लंघन पर कोर्ट ने जताई नाराजगी

20 नवंबर 2024 को मामले की सुनवाई के दौरान, अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कार्यकारी अभियंता के 04 अक्टूबर 2024 के निर्देश पेश किए, जिसमें निर्णय के कार्यान्वयन के लिए चार सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा गया था। हालांकि, यह समय सीमा पहले ही समाप्त हो चुकी थी, और एक वर्ष से अधिक समय बीत चुका था। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता से नए निर्देश प्राप्त करने का आदेश दिया और मामले को एक सप्ताह बाद फिर से सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए।


एक वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी फैमिली पेंशन मामले का हल न होना

13 महीने बाद भी फैसले का पालन नहीं

कोर्ट ने रेखांकित किया कि याचिकाकर्ता का फैमिली पेंशन मामला, जिसे 10 अक्टूबर 2023 को निपटाने का निर्देश दिया गया था, 13 महीने से अधिक समय बीत चुका है और अभी तक फैसले का पालन नहीं किया गया है। इस देरी को देखते हुए, हाईकोर्ट ने प्रतिवादियों पर 10,000 रुपये की कॉस्ट लगाई और निर्देश दिया कि तीन सप्ताह के भीतर फैसले का अनुपालन किया जाए।

फैसले का अनुपालन न करने पर सख्त कार्रवाई

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में ऐसे मामलों में फैसले का अनुपालन नहीं होता है, तो कोर्ट और कड़ी कार्रवाई कर सकती है।

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