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सुक्खू सरकार का बड़ा दांव: 3577 पंचायतों के चुनावों से ठीक पहले पुनर्गठन का फैसला, टलेंगे दिसंबर के इलेक्शन!

Shailesh Saini | 2 नवंबर 2025 at 8:39 am

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पंचायत चुनाव से पहले पुनर्सीमांकन की तैयारी, सभी DC से 15 दिन में मांगे गए प्रस्ताव

हिमाचल नाऊ न्यूज़ शिमला

हिमाचल प्रदेश में पंचायत और नगर निकाय चुनावों को लेकर बड़ी राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल शुरू हो गई है। दिसंबर-जनवरी में प्रस्तावित चुनाव से ठीक पहले सुक्खू सरकार ने पंचायतों के पुनर्गठन (Re-organization) की कवायद शुरू कर दी है, जिससे राज्य चुनाव आयोग की तय समय पर चुनाव कराने की तैयारियों पर संशय गहरा गया है। माना जा रहा है कि सरकार के इस कदम से पंचायत चुनाव तय समय पर नहीं हो पाएंगे।

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प्रदेश के DC से 15 दिन में मांगे प्रस्ताव

पंचायती राज विभाग ने इस संबंध में सभी जिलाधीशों (DC) को पत्र लिखकर निर्देश दिए हैं। DC को कहा गया है कि उनके पास नई पंचायतों के गठन या पुरानी पंचायतों के पुनर्गठन से संबंधित जितने भी प्रस्ताव आए हैं, उन्हें 15 दिनों के भीतर विभाग को भेजा जाए।

विभाग इन प्रस्तावों की जाँच करेगा और फिर अंतिम मसौदा सरकार की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। सरकार के फैसले के अनुसार ही यहाँ दोबारा पुनर्सीमांकन (Delimitation) का कार्य किया जाएगा।

चुनाव आयोग की तैयारियों पर पड़ेगा असर

एक तरफ राज्य सरकार पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू कर रही है, वहीं दूसरी तरफ राज्य चुनाव आयोग दिसंबर-जनवरी में प्रस्तावित चुनावों के लिए लगभग पूरी तैयारी कर चुका है। कमीशन ने सभी ज़िलों के DC को चुनाव संबंधी तैयारियां, जैसे- असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर व पोलिंग ऑफिसर की तैनाती, वाहनों की व्यवस्था, मीडिया सेल, कंट्रोल रूम की सेटिंग और मतगणना के लिए उपयुक्त भवनों की पहचान करने के निर्देश दिए हैं।

दरअसल, चुनाव आयोग तय समय पर यानी 15 नवंबर के बाद कभी भी चुनाव की घोषणा कर सकता है। ऐसे में अंतिम वक्त में पंचायतों का पुनर्गठन शुरू होने से आयोग की तैयारियों पर पानी फिरता नजर आ रहा है, और तय समय पर चुनाव होना अब संभव नहीं है।

3577 पंचायतों का पुनर्सीमांकन

मौजूदा समय में प्रदेश में 3577 पंचायतें हैं। इससे पहले हुए पुनर्सीमांकन में कई पंचायतें शहरी क्षेत्रों में शामिल हो गई थीं, जिससे पंचायतों की संख्या कम हुई थी। अब मंत्रिमंडल ने एक बार फिर से पंचायतों का पुनर्गठन करने का फैसला लिया है।

पंचायती राज विभाग ने अपने पत्र में कहा है कि जुलाई से सितंबर के बीच आई भीषण आपदा के कारण स्थानीय प्रशासन राहत एवं बचाव कार्य में जुटा रहा। इस वजह से पंचायतों के पुनर्गठन संबंधी कुछ प्रस्तावों को कंसीडर नहीं किया जा सका था, जो अब विचाराधीन हैं।गौरतलब है कि पहले भी इस प्रक्रिया के तहत कई ऐसी पंचायतों को एक विधानसभा क्षेत्र में लाया गया था, जिनका कुछ क्षेत्र दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में पड़ता था।

आरक्षण रोस्टर पर भी संशय

राज्य सरकार पहले चुनाव की तैयारी कर चुकी थी। पंचायती राज विभाग के सचिव ने सभी DC को 25 सितंबर तक हर हाल में आरक्षण रोस्टर लगाने के निर्देश दिए थे। अब दिसंबर में प्रस्तावित पंचायत चुनावों के लिए पुनर्गठन होने से आरक्षण रोस्टर और वोटर लिस्ट बनाने का काम प्रभावित होगा, जिससे चुनाव का कार्यक्रम आगे बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है।

इन चुनावों में 3577 पंचायतों में प्रधान, उपप्रधान, वार्ड मेंबर, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद के लिए मतदान होना है, साथ ही 73 नगर निकायों (नगर पंचायत, नगर परिषद और नगर निगम) में भी मतदान प्रस्तावित है।

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