HNN/ नाहन
यूक्रेन की धरती पर बरस रहे बम के गोलों से उन मां-बाप के कलेजे दहल रहे हैं जिनके बच्चे यूक्रेन में फंसे पड़े हैं। इन बच्चों में नाहन निवासी बलवंत कुमार की बेटी खुशबू भी है। भारी भरकम कर्जा लेकर बेटी को डॉक्टर बनाने के लिए यूक्रेन भेजा था मां सीमा ने। खुशबू एमबीबीएस फोर्थ ईयर की स्टूडेंट है। नाहन के होली हार्ट स्कूल से प्लस टू की है। खुशबू मौजूदा समय यूक्रेन के कीव में कीव मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है। खुशबू ने हमसे बात करते हुए बताया कि यहां हिमाचल के और भारत के बहुत सारे बच्चे वतन वापसी की इंतजार कर रहे हैं।

खुशबू लवाना दयाचीनाका स्ट्रीट नंबर 10 चौथी बिल्डिंग बोरतीचनी कीव में रह रही है। खुशबू ने बताया कि इस समय पर अकेली ही अपनी बिल्डिंग में है। उसने यह भी बताया कि उन्हें बिल्डिंग से बाहर निकलने और झांकने के लिए भी मना किया गया है। खुशबू ने बताया कि नजदीक ही कीव के पोजनियाकी एरिया में एक मिसाइल भी गिरी थी। जिससे वहां की बिल्डिंग को काफी नुक्सान पहुंचा है। खुशबू के साथ नाहन के अभिनव सैनी तथा रितिका सैनी भी है। मगर वह किसी दूसरे ठिकाने पर रह रहे हैं। खुशबू ने जयराम सरकार से और भारत की मोदी सरकार से अपील करते हुए कहा कि उन्हें अपनी और अपने मां-बाप की भी बहुत चिंता हो रही है।
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खुशबू ने अपील करते हुए कहा कि भारत सरकार जल्द से जल्द उन्हें अपने वतन वापस बुलाए। उसने यहां यह भी बताया कि यूक्रेन के तमाम हवाई सेवाएं बंद है। उन्हें अभी तक किसी भी तरह का आश्वासन नहीं मिला है कि वह यहां से सुरक्षित निकल पाएंगे भी या नहीं। वहीं सूत्रों के हवाले से जानकारी यह भी मिली है कि यूक्रेन में हिमाचल के 500 से भी अधिक छात्र हैं। मगर हम इसकी अधिकारिक पुष्टि नहीं कर सकते हैं। यूक्रेन में फंसे भारतीय बच्चों के अनुसार यह एक अनुमानित संख्या बताई गई है। बरहाल, शूमेकर बलवंत कुमार और सीमा देवी ने एक बड़ा सपना देखा था कि उनकी बेटी डॉक्टर बनकर उनके सपनों को साकार करेगी।
मगर उन्हें नहीं मालूम था कि 2 देशों की आपसी लड़ाई में उनके सपने इस तरीके से धराशाई हो जाएंगे। बावजूद इसके सीमा देवी का जज्बा और हौसला देखकर हम भी हैरान है कि उन्होंने न केवल अपनी बेटी के लिए जयराम सरकार मोदी सरकार से अपील करी है बल्कि यह कहा कि जितने भी बच्चे वहां पर फंसे हुए हैं वह सब उनकी ही संतान है सब वापस आने चाहिए और सुरक्षित वतन वापसी होनी चाहिए। यहां यह भी बता दें कि खुशबू के माता पिता और भाई बड़ी चिंता में डूबे हुए हैं। पिछले 2 दिन से उन्होंने खाना भी ठीक से नहीं खाया है। और इससे भी ज्यादा हैरान कर देने वाली बात तो यह है कि अभी तक सरकार और प्रशासन की तरफ से इन अभिभावकों को हौसला देने वाला कोई नहीं पहुंचा है।
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