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जिला ऊना के स्कूलों और आयुष केंद्रों में खिले हर्बल गार्डन, आयुष पद्धति को बढ़ावा………….

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन | 8 दिसंबर 2025 at 6:28 pm

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आयुष पद्धति को बढ़ावा देने के लिए रोप गए शतावर, अश्वगंधा, आंवला और विविध औषधीय पौधे

ऊना जिले में लगभग 9.42 लाख रुपये की लागत से विकसित हर्बल गार्डन स्वास्थ्य जागरूकता और प्राकृतिक चिकित्सा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। स्कूलों और आयुष केंद्रों में लगाए गए औषधीय पौधे नई पीढ़ी को आयुष पद्धति से जोड़ने का माध्यम बन रहे हैं।

ऊना/वीरेंद्र बन्याल

ऊना जिले में हर्बल गार्डन की सौंधी खुशबू ,आयुष पद्धति को बढ़ावा देने के लिए रोप गए हैं शतावर, अश्वगंधा, आंवला, स्टीविया सहित विविध औषधीय पौधे

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हिमाचल सरकार, प्रदेश में जहां आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने में जुटी है, वहीं पारंपरिक आयुर्वेद और आयुष चिकित्सा पद्धति को भी नई ऊर्जा प्रदान की जा रही है। इसी उद्देश्य से ऊना जिले में स्कूलों और आयुष संस्थानों के परिसर अब औषधीय पौधों की सौंधी महक से भर गए हैं। लगभग 9.42 लाख रुपये की लागत से तैयार किए गए ये हर्बल गार्डन स्वास्थ्य जागरूकता और प्राकृतिक चिकित्सा की ओर एक महत्वपूर्ण कदम हैं।

स्कूलों में औषधीय पौधों की खुशबू
जिला आयुष अधिकारी ऊना किरण शर्मा ने बताया कि जिले के 5 स्कूलों में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बेहड़ जसवां, रावमापा कुठारकला, रावमापा भदसाली, रावमापा पिरथीपुर और रावमापा थानाकलां में हर्बल गार्डन विकसित किए जा चुके हैं। इस कार्य पर 1.25 लाख रुपये व्यय किए गए हैं। विद्यालयों में शतावर, अश्वगंधा, स्टीविया, एलोवेरा, आंवला, हरड़, बेहड़ सहित अनेक औषधीय पौधे लगाए गए हैं। इन उद्यानों का उद्देश्य बच्चों में प्राकृतिक चिकित्सा के प्रति रुचि जगाना और आयुष पद्धति की वैज्ञानिक उपयोगिता को समझाना है।

आयुष केंद्रों में औषधीय उद्यानों की हरियाली
किरण शर्मा बताती हैं कि जिले के सभी आयुष स्वास्थ्य केंद्रों में 2.25 लाख रुपये की लागत से पॉटेड हर्बल गार्डन विकसित किए गए हैं। वहीं 13 आयुष आरोग्य मंदिरों में 5.92 लाख रुपये खर्च कर 3232 औषधीय पौधे रोपित किए गए हैं, जो स्थानीय स्तर पर औषधीय संसाधनों के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

प्राकृतिक स्वास्थ्य पद्धति को बढ़ावा देने वाली पहल
यह पहल मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के उस विचार को मूर्त रूप देती है जिसमें बच्चों और आम लोगों को प्राकृतिक उपचार पद्धतियों से जोड़ने, आयुष-आयुर्वेद के महत्व को समझाने और स्वास्थ्य को जीवनशैली का हिस्सा बनाने पर बल दिया गया है। प्रदेश में विभिन्न विभागों के सहयोग से औषधीय उद्यान विकसित किए जा रहे हैं, जो न केवल गुणवत्तापूर्ण औषधीय पौधों के उत्पादन में सहायक होंगे, बल्कि भविष्य में पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेंगे। हिमाचल की अनुकूल जलवायु इस क्षेत्र में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की भी क्षमता रखती है। इसके साथ ही राज्य सरकार आयुष वेलनेस सेंटरों की स्थापना पर भी फोकस कर रही है, जहां विभिन्न बीमारियों के उपचार के लिए विशेष प्राकृतिक और पारंपरिक चिकित्सा पैकेज उपलब्ध होंगे।

आयुष एवं आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा
क्या कहते हैं अधिकारी
जिला आयुष अधिकारी किरण शर्मा ने बताया कि विद्यालयों, आयुष स्वास्थ्य केंद्रों और आयुष आरोग्य मंदिरों में हर्बल गार्डन स्थापित करने का उद्देश्य आयुष एवं आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देना और लोगों में औषधीय पौधों के महत्व के प्रति व्यापक जागरूकता पैदा करना है। इससे पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण और नई पीढ़ी तक उसका संवर्धन सुनिश्चित होगा। वहीं, जिलाधीश ऊना जतिन लाल का कहना है कि आयुर्वेद स्वास्थ्य देखभाल का एक मजबूत और किफायती माध्यम है। औषधीय उद्यानों के माध्यम से लोगों को प्राकृतिक चिकित्सा से जोड़ने के प्रयास निश्चित ही बेहतर जीवनशैली और स्वस्थ समाज निर्माण में सहायक होंगे। जिला प्रशासन मुख्यमंत्री श्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की इस सोच को धरातल पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध है।

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