नासिर मोहम्मद रावत बने हिमाचल वक्फ बोर्ड के अंतरिम अध्यक्ष, कांग्रेस में भी उठने लगे विरोध के स्वर
हिमाचल नाऊ न्यूज़ नाहन
हिमाचल प्रदेश में तीन साल के लंबे इंतजार के बाद प्रदेश वक्फ बोर्ड में अध्यक्ष की नियुक्ति तो हुई है, लेकिन इसने नए सियासी विवाद को जन्म दे दिया है। सिरमौर जिला (मिश्रावाला) से संबंध रखने वाले कांग्रेस नेता नासिर मोहम्मद रावत को बोर्ड का अंतरिम अध्यक्ष बनाया गया है।
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राजस्व विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं।पहली बार बिना सदस्यों के अंतरिम अध्यक्षयह नियुक्ति कई मायनों में चौंकाने वाली है, क्योंकि यह पहली बार है जब वक्फ बोर्ड में कार्यकारी अध्यक्ष (अंतरिम अध्यक्ष) की नियुक्ति की गई है।
इससे पहले पूरी बोर्ड का गठन किया जाता था और फिर उसमें से किसी एक को अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी जाती थी। इस बार सीधे कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति पर विपक्षी दल भाजपा ने कड़ा ऐतराज जताया है।भाजपा ने बताया वक्फ एक्ट का उल्लंघनभाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य बिलाल अहमद शाह ने सरकार के इस कदम को वक्फ एक्ट के नियमों का सीधा उल्लंघन बताया है।
शाह ने कहा कि सरकार ने एक तो तीन साल बाद मुसलमानों की सुध ली और वक्फ बोर्ड में नियुक्ति की, लेकिन उसमें भी नियमों की पूरी तरह अनदेखी की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वक्फ एक्ट में इस तरह के कार्यकारी अध्यक्ष के प्रावधान का कोई उल्लेख नहीं है और इसमें पहले बोर्ड का विधिवत गठन किया जाता है।
कांग्रेस के भीतर भी असंतोषनासिर मोहम्मद रावत की कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति से कांग्रेस के भीतर मुस्लिम नेताओं में भी रोष उभरा है। कई नेता लंबे समय से वक्फ बोर्ड के गठन और अध्यक्ष की ताजपोशी को लेकर कतार में लगे थे।
संगठन से जुड़े कई नेताओं को इससे दूर कर दिया गया है, जिससे असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं। हालांकि, उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार जल्दी ही अन्य सदस्यों की भी ताजपोशी कर देगी, जिससे वक्फ बोर्ड सुचारू रूप से कई साल के बाद काम कर पाएगा।
करोड़ों की संपत्ति और वित्तीय बदहालीप्रदेश में वक्फ बोर्ड के तहत करोड़ों रुपये की संपत्ति आती है, जिस पर बड़े पैमाने पर कब्जाधारियों ने अवैध कब्जे कर रखे हैं। केंद्र सरकार के एक्ट के तहत इसका संचालन किया जा रहा है, और नियमों में भी काफी बदलाव किए गए हैं, लेकिन हिमाचल में इन नियमों का पूरी तरह से पालन नहीं किया जा रहा।
यही वजह है कि वक्फ की संपत्ति को लेकर अदालतों में सैकड़ों मामले लंबित हैं।इससे भी हैरानी की बात यह है कि करोड़ों की जमीनों का मालिक होने के बावजूद वक्फ बोर्ड शिमला में अपने खुद के कार्यालय का निर्माण नहीं करवा पाया है।
बोर्ड फिलहाल किराये पर चल रहे भवन में संचालित हो रहा है, जिसका लाखों रुपये किराया दिया जा रहा है। ऐसे में बोर्ड की वित्तीय हालत में सुधार के लिए सरकार की ओर से कोई ठोस कदम अब तक नहीं उठाए गए हैं, जिससे राजनीतिक तौर पर यह मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है।
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