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सोलन में भाजपा का बुरा हाल, कांग्रेस में फिर से छाई बहार

PRIYANKA THAKUR | 2 नवंबर 2022 at 9:52 am

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प्रचार-प्रसार के साथ-साथ नहीं है सोलन भाजपा में कुशल रणनीतिकार

HNN / सोलन

प्रदेश में लगातार बैकफुट पर जा रही भाजपा के सोलन में भी पांव उखड़ते नजर आ रहे हैं। सोलन में भाजपा का प्रचार और प्रसार मतदाताओं को रिझाने में सफल होता नजर नहीं आ रहा है। इसकी बड़ी वजह कुशल रणनीतिकारों की कमी मानी जा रही है। वही सोलन जिला में भाजपा की आपसी फूट और गुटबाजी भी किसी से छुप नहीं रही है। सोलन से डॉ राजीव बिंदल के नाहन चले जाने के बाद पकी पकाई खीर खाने के लिए भाजपा का एक चेहरा सामने आया।

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मगर उस दौरान भी आपसी गुटबाजी और रणनीति की कमी के चलते वह चेहरा चुनाव हार गया। कमोबेश नाहन के विधायक डॉ राजीव बिंदल के द्वारा तैयार किए गए भाजपा के किले को संभालने वाला कोई दमदार चेहरा सोलन में नजर नहीं आया।वही एक बेहतर सामंजस्य पार्टी में बिठा पाने के लिए स्वर्गीय पवन गुप्ता काफी हद तक कामयाब हो गए थे। भाजपा धीरे-धीरे फिर से अपने पुराने प्रारूप में पनपने लग पड़ी थी।

मगर एन वक्त पर भाजपा के कर्मठ और मजबूत नेता पवन गुप्ता दुनिया को अलविदा कह गए। मौजूदा भाजपा प्रत्याशी के द्वारा कांग्रेसियों से काफी नजदीकियां बनाई गई। मुख्यमंत्री के मंच तक उन्हीं प्रमुख चेहरों को फ्रंटलाइन दी गई, जिसके बाद भाजपा एक बार फिर बैकफुट पर जानी शुरू हो गई। भाजपा के कर्मठ सिपाहियों को केवल दरियां ही नसीब होती थी जबकि कांग्रेसी चेहरों को मंच पर तवज्जो मिलती थी। इसका सबसे बड़ा खामियाजा जिसे हम पूर्व संकेत भी कह सकते थे वह नगर निगम के चुनाव में स्पष्ट नजर आया था।

भाजपा सोलन नगर निगम के चुनाव भी बुरी तरह हार गई। यही नहीं पंचायतों में भी भाजपा का बुरा हाल रहा। लगभग उससे भी ज्यादा बदतर स्थिति इस विधानसभा चुनाव में बनती नजर आ रही है। ना केवल मीडिया लाइजनिंग बल्कि उन पुराने भाजपाई चेहरों को भी तवज्जो दिए जाने को लेकर कोई मान मनोबल नहीं हुए हैं। सोलन से इस बार महिला प्रत्याशी को उतारे जाने को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं और प्रमुख चेहरों में खुशी की लहर थी।

मगर प्रदेश के कमजोर भाजपा नेतृत्व के चलते सोलन की तस्वीर हाईकमान तक सही नहीं पहुंच पाई। बरहाल इस डैमेज को पीएम की रैली भी कंट्रोल कर पाएगी कहा नहीं जा सकता। मगर एक बात बिल्कुल स्पष्ट है कि ना केवल सोलन में बल्कि जिला की अन्य सीटों पर भी भाजपा बैकफुट पर है। इसकी सबसे बड़ी वजह मंडल और जिला पर बाहरी नियंत्रण भी माना जा सकता है। बरहाल देखना यह होगा कि समय रहते हाईकमान इस हो रहे डैमेज को क्या कंट्रोल कर पाएंगे या नहीं यह देखना अभी बाकी है।

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