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शौर्य चक्र से सम्मानित डाककर्मी बहादुर सिंह की पत्नी संदला देवी का निधन

Shailesh Saini | 3 नवंबर 2025 at 5:36 pm

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पूरे सिरमौर सहित सागंना गांव में शोक की लहर

​हिमाचल नाऊ न्यूज़ नाहन (सिरमौर)।

सिरमौर जिला के नाहन में सोमवार की सुबह एक दुखद घटना घटी, जब शौर्य चक्र से सम्मानित डाककर्मी स्वर्गीय बहादुर सिंह की धर्मपत्नी और भाजपा जिला प्रवक्ता प्रताप सिंह रावत की चाची संदला देवी का हृदय गति रुकने से निधन हो गया। संदला देवी ने प्रातः करीब 8:00 बजे अपने पैतृक गांव सागंना में अंतिम सांस ली, जिससे पूरे महल क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ पड़ी है।

​संदला देवी अपने पीछे चार बेटों— दलीप सिंह, जगदीश कुमार, जगपाल सिंह, और अमृत सिंह—का भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं। उनके पुत्रों में जगपाल सिंह भारतीय डाक विभाग में पोस्टल असिस्टेंट के पद पर कार्यरत हैं

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, जबकि अमृत सिंह भारतीय सेना में देश की सेवा कर रहे हैं। संदला देवी का जुड़ाव एक ऐसी गौरव गाथा से है, जिसने पूरे देश को उनके पति बहादुर सिंह की बहादुरी और ईमानदारी पर गर्व करने का अवसर दिया था।

उनके पति स्वर्गीय बहादुर सिंह भारतीय डाक विभाग में पोस्टमैन के पद पर नालागढ़ में कार्यरत थे। अपनी ड्यूटी के दौरान, उनके पास सरकारी खजाने के 9 लाख रुपये का कैश था, जिसे जमा करवाने वह बैंक जा रहे थे।

रास्ते में कुछ अज्ञात लुटेरों ने उनसे पैसा लूटने के लिए उन पर गोली चला दी। बहादुर सिंह ने उस नाजुक क्षण में अपनी जान की परवाह किए बिना भी, कर्तव्यनिष्ठा का ऐसा परिचय दिया कि उन्होंने पैसे से भरा हुआ सूटकेस नहीं छोड़ा।

उनकी बहादुरी की पराकाष्ठा यह थी कि लुटेरे सूटकेस छीनने के लिए उन्हें करीब 70 मीटर तक घसीटकर ले गए, और लुटेरे तब ही पैसे लेने में कामयाब हुए, जब बहादुर सिंह ने अपने प्राण त्याग दिए।

उनकी अद्वितीय ईमानदारी और अदम्य बहादुरी को ध्यान में रखते हुए, देश के तत्कालीन महामहिम राष्ट्रपति स्वर्गीय डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने उन्हें मरणोपरांत सम्मानित किया था। पहले उनकी पत्नी संदला देवी को मेघदूत पुरस्कार प्रदान किया गया।

इसके बाद, देश के महामहिम राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने स्वर्गीय बहादुर सिंह को शौर्य चक्र से भी सम्मानित किया।

यह एक ऐतिहासिक तथ्य है कि शौर्य चक्र आज तक पूरे भारत में किसी भी सिविलियन को नहीं मिला है, जो बहादुर सिंह की बहादुरी को बेमिसाल बनाता है। ऐसी वीरांगना के निधन से पूरे सिरमौर और सागंना क्षेत्र में गहरा दुख व्याप्त है।

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