लेटेस्ट हिमाचल प्रदेश न्यूज़ हेडलाइंस

ऊना के हरोली में जल संरक्षण की नई मिसाल, 20 करोड़ से प्राचीन टोबों का कायाकल्प

Share On WhatsApp Share On Facebook Share On Twitter

हरोली विधानसभा क्षेत्र में प्राचीन तालाबों के पुनरुद्धार से जल संरक्षण और भूजल रिचार्ज को नई दिशा मिल रही है। यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए स्थायी जल सुरक्षा का मजबूत आधार तैयार कर रही है।

ऊना/वीरेंद्र बन्याल

जल संरक्षण की अनुकरणीय पहल
हरोली विधानसभा क्षेत्र में जल संरक्षण, भूजल रिचार्ज और पर्यावरण संतुलन को सुदृढ़ करने की दिशा में एक अनुकरणीय पहल की जा रही है। क्षेत्र के प्राचीन तालाबों (टोबों) को पुनर्जीवित कर उन्हें आधुनिक, सुंदर एवं बहुउद्देशीय सरोवरों के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिस पर लगभग 20 करोड़ रुपये की राशि व्यय की जा रही है। यह पहल पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण के साथ-साथ भविष्य की जल सुरक्षा का मजबूत आधार भी तैयार कर रही है।

हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें: Join WhatsApp Group

दूरदर्शी सोच से मिल रहा नया जीवन
हरोली के विधायक एवं उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की दूरदर्शी सोच और जनहितकारी दृष्टिकोण के चलते वर्षों पुराने टोबों को नया जीवन मिल रहा है। जहां देश के अनेक हिस्से गिरते भूजल स्तर और सूखते जल स्रोतों की चुनौती से जूझ रहे हैं, वहीं हरोली में जल संरक्षण को लेकर एक सकारात्मक, दूरगामी और सतत मॉडल विकसित हो रहा है।

प्राचीन टोबों से आधुनिक सरोवरों तक का सफर
हरोली क्षेत्र में गांव-गांव फैले पारंपरिक तालाब, जिन्हें स्थानीय भाषा में टोबे कहा जाता है, कभी वर्षा जल संग्रहण, पशुओं के पेयजल और सिंचाई का प्रमुख साधन हुआ करते थे। समय के साथ देखरेख के अभाव में ये जल स्रोत उपेक्षित हो गए थे। ऐसे में उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने इनके महत्व को समझते हुए पुनरुद्धार की एक सुनियोजित रूपरेखा तैयार की।

बहुउद्देशीय विकास और आधुनिक तकनीक
इन तालाबों को अब आधुनिक तकनीक के माध्यम से पुनः जल से लबालब किया जा रहा है। साथ ही इन्हें आकर्षक सरोवरों के रूप में विकसित किया जा रहा है, ताकि ये जल संरक्षण के साथ जैव विविधता संरक्षण, जलीय जीवन, ग्रामीण पर्यटन और पंचायतों की संभावित आय का माध्यम भी बन सकें।

पूरे प्रदेश के लिए प्रेरक मॉडल
हरोली में तालाबों के संरक्षण और संवर्धन का यह कार्य मुकेश अग्निहोत्री के पहले विधायक कार्यकाल से ही निरंतर जारी है। वर्तमान समय में इन प्रयासों को और अधिक व्यापक एवं प्रभावी रूप दिया गया है, जिससे यह मॉडल पूरे प्रदेश के लिए जल संरक्षण की प्रेरक मिसाल बनता जा रहा है।

हरियाली, सौंदर्यीकरण और स्वच्छता पर जोर
तालाबों के चारों ओर पैदल पथ, हरियाली, सौंदर्यीकरण और स्वच्छता से जुड़े कार्य भी किए जा रहे हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक सौंदर्य और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा मिलेगा, वहीं आसपास के क्षेत्रों में गिरते भूजल स्तर को स्थिर करने में भी सहायता मिलेगी।

जल संरक्षण हमारी सांस्कृतिक विरासत का संकल्प
उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि हरोली में तालाबों और टोबों का पुनरुद्धार केवल एक विकासात्मक परियोजना नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित रखने का संकल्प है। पारंपरिक जल स्रोत आने वाले समय में जल सुरक्षा की सबसे मजबूत नींव सिद्ध होंगे और ग्रामीण जीवन को नई दिशा देंगे।

अधिकारियों की जानकारी
जल शक्ति विभाग हरोली के अधिशाषी अभियंता पुनीत शर्मा ने बताया कि तालाबों के सौंदर्यीकरण, जल संचयन और ग्रामीण क्षेत्रों की पानी निकासी को एकत्रित करने के लिए जल शक्ति विभाग, वन विभाग और लोक निर्माण विभाग के संयुक्त कन्वर्जेंस के माध्यम से कार्य किया जा रहा है। जल शक्ति विभाग से लगभग 11 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जबकि शेष राशि अन्य विभागों के माध्यम से चरणबद्ध तरीके से व्यय की जा रही है।

हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें

ताज़ा खबरों और अपडेट्स के लिए अभी हमारे WhatsApp ग्रुप का हिस्सा बनें!

Join WhatsApp Group

आपकी राय, हमारी शक्ति!
इस खबर पर आपकी प्रतिक्रिया साझा करें


[web_stories title="false" view="grid", circle_size="20", number_of_stories= "7"]