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10 दिनों में ड्रग डिपार्टमेंट ने पकड़ी एक और नकली दवा बनाने वाली फैक्ट्री

PRIYANKA THAKUR | 24 सितंबर 2022 at 1:14 pm

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असली खेल का हिमाचल नाउ न्यूज ने किया बड़ा खुलासा

HNN / बद्दी

देश और दुनिया में फार्मा हब की लाज बचाने को लेकर प्रदेश ड्रग डिपार्टमेंट ने एक और बड़ा गोरख धंधा पकड़ा है। राज्य दवा नियंत्रक नवनीत मरवाह की टीम ने गुप्त सूत्रों से मिली जानकारी के बाद बद्दी के थाना गांव में मैसर्स एक्लिम फॉर्म्युलेशन  नामक फैक्ट्री से भारी मात्रा में नकली दवाएं तथा प्रिंट सामग्री पकड़ी है। हैरान कर देने वाली बात तो यह है कि कंपनी के द्वारा एफएसएसएआई के लाइसेंस पर एलोपैथिक दवाएं बनाई जा रही थी। इसमें चौंकाने वाली बात यह है कि ग्लेनमार्क जैसी ख्याति प्राप्त कंपनी के मुख्य प्रोडक्ट टेल्मा एच ब्लड प्रेशर की दवा बनाई जा रही थी।

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जानकारी तो यह भी है कि फर्म के द्वारा दवाइयों के रॉ मटेरियल भी सप्लाई किए जाते थे। ऐसे में सवाल यह भी खड़ा हो गया है कि फर्म के द्वारा किस-किस फार्मास्यूटिकल्स कंपनी को रॉ मटेरियल दिया जाता था। जाहिर है जिस फर्म अथवा कंपनी की पहले से ही मंशा खराब हो उसके द्वारा दिया गया रॉ मटेरियल गुणवत्ता की किस कसौटी पर होगा कहा नहीं जा सकता। जानकारी तो यह भी है कि अपने आप को समाजसेवी कहने वाले तथा काला अम्ब में फार्मा उद्योग चला चुके जैन नामक के व्यक्ति के कुछ ऐसी कंपनियों के साथ संबंध है जो नकली कारोबार से जुड़े हुए हैं।

गौरतलब हो कि पिछले महीने ड्रग डिपार्टमेंट की टीम के द्वारा बद्दी साईं रोड स्थित धर्मपुर गांव में मैसर्स आर्य फार्मा पर संयुक्त रूप से कार्यवाही करते हुए अलग-अलग कंपनियों की हजारों टेबलेट बरामद की थी। अब बात की जाए बड़े खुलासे की तो विश्वसनीय गुप्त सूत्रों से हैरान कर देने वाली जानकारी सामने आई है। जानकारी यह है कि फार्मा हब में एक ऐसा रैकेट सक्रिय है जो बैच मार्क प्रिंट करने के लिए रबर स्टीरियो, नामी कंपनियों के स्टीकर, प्रिंट फाइल, टेबलेट कलर और दवा निर्माण की जाने वाली मशीनें सप्लाई करते हैं।

पुख्ता जानकारी के अनुसार कई दवा निर्माण कंपनियों में एक्सपायरी दवा को लेकर एक बड़ा खेल खेला जाता है। एक्सपायरी दवा को आर्य फार्मा अथवा एक्लिम जैसी कथित दवा कंपनियां रीसायकल करती है। यहां यह भी जानकारी मिली है कि कुछ ऐसे रॉ मटेरियल सप्लाई करने वाले भी हैं जो इस रैकेट में शामिल बताए जा रहे हैं। यहां यह लोग उसी दवा को बनाते हैं जो भले बे-असर साबित हो, मगर उससे कोई जानी नुक्सान ना हो पाए। इन बनाई गई दवाओं की मात्रा न बहुत ज्यादा होती है ना बहुत कम। मगर बड़ी सफाई के साथ गवर्नमेंट सप्लाई की जाने वाली दवाओं में इन्हें शामिल कर दिया जाता है।

अच्छी बात तो यह है कि प्रदेश का ड्रग डिपार्टमेंट हर वक्त अलर्ट मोड़ पर रहता है। यही वजह है कि नकली के कारोबारियों के गिरेबान तक इनका हाथ समय रहते पहुंच जाता है। वही अब प्रदेश ड्रग डिपार्टमेंट को और अधिक चुनौती के साथ मैदान में उतरना होगा।

उधर, राज्य दवा नियंत्रक नवनीत मरवाह ने खबर की पुष्टि करते हुए बताया कि बद्दी के थाना गांव में एक्लिम नामक फर्म के द्वारा फूड लाइसेंस की आड़ में एलोपैथिक दवाई बनाई जा रही थी। उन्होंने बताया कि बरामद किया गया सारा माल सीज कर दिया गया है तथा जो दवा बरामद की है, उसे फ्रीज कर दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि ड्रग विभाग की पूरी पहले से ही अलर्ट मोड़ पर रहती है मगर अब और सघनता से जांच की जाएगी।

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