HNN/ नाहन
आखिर लंबी माथापच्ची के बाद केंद्रीय चुनाव समिति ने सिरमौर में केवल रेणुका जी में नए चेहरे को उतारते हुए बाकी चार को बरकरार रखा है। सबसे संकीर्ण व अपनों के ही द्वारा बनाए गए कठिन रास्तों को पार करते हुए टिकट हासिल कर पाने में कामयाब हो गए हैं। अब यदि बात की जाए श्री रेणुका जी विधानसभा क्षेत्र की तो हाईकमान के द्वारा वोटिंग सिस्टम और किए गए सर्वे के बाद नारायण सिंह पर दांव खेल दिया है।
यहां सबसे प्रबल और मजबूत माने जा रहे दावेदार बलवीर सिंह का टिकट इस बार कट गया है। जबकि इस विधानसभा क्षेत्र में संघ से जुड़े अरुण कुमार, रूप सिंह भी प्रबल दावेदारी में थे। पच्छाद विधानसभा क्षेत्र की बात की जाए तो उपचुनाव में विधायक बनी भाजपा की रीना कश्यप पर भाजपा ने फिर से दांव खेल दिया है। इस विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की ओर से अंतिम समय तक बलदेव कश्यप पर चर्चा चली हुई थी।
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यहां तक की बीते कल तक केंद्र से मिले सूत्रों के अनुसार बलदेव कश्यप का नाम तय माना जा रहा था। मगर भाजपा से ही छिटक कर आई दयाल प्यारी के कांग्रेस की ओर से उम्मीदवार बनने के बाद महिला के सामने महिला उम्मीदवार को उतार दिया है। ऐसे ही शिलाई विधानसभा क्षेत्र में वीर सिंह राणा और कुलदीप सिंह राणा ने भाजपा की ओर से प्रबल दावेदारी की थी। मगर यहां जयराम ठाकुर से बलदेव की दोस्ती सच्ची साबित हुई।
मैदान में अब भाजपा की ओर से पूर्व में विधायक रहे और खाद्य अपूर्ति मामले विभाग के उपाध्यक्ष बलदेव तोमर को एक मौका और दिया गया है। जिला सिरमौर में एकमात्र नाहन सीट ऐसी थी जहां भाजपा की ओर से किसी और ने दावेदारी नहीं की थी। ना केवल अपनी विधानसभा बल्कि प्रदेश स्तर पर गेमचेंजर माने जाने वाले नाहन के विधायक डॉ राजीव बिंदल को तमाम लगाई जा रही अटकलों के बाद एक बार फिर मैदान में उतार दिया है।
अब यदि सिरमौर बैटलफील्ड की बात की जाए तो भाजपा को श्री रेणुका जी और पच्छाद पर बड़ा फोकस करना होगा। सूत्रों की माने तो श्री रेणुका जी विधानसभा क्षेत्र में पूरी तरह से मन बना चुके बलबीर चौहान आजाद मैदान में उतर सकते हैं। तो वही नारायण सिंह को इस विधानसभा क्षेत्र में अपनी 20 पंचायतों के अलावा बाकी पंचायतों में कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा। इस विधानसभा क्षेत्र में नारायण सिंह के मैदान में उतरने के बाद विनय कुमार पहले से ज्यादा मजबूत हो गए हैं।
विनय कुमार जानते हैं कि नारायण सिंह को हरिपुरधार और उसके आसपास लगती पंचायतों की ओर से ज्यादा सपोर्ट मिलने वाली नहीं है। पच्छाद में अंबा और जगदंबा यानी रीना कश्यप और दयाल प्यारी में कांटे की टक्कर मानी जा रही है। अब यदि बलदेव कश्यप टिकट ना मिलने के कारण आजाद मैदान में उतरते हैं तो नाराज कांग्रेसियों का उन्हें बड़ा समर्थन मिलेगा।
यही नहीं भाजपा में भी पुराने कार्यकर्ताओं और कई पदाधिकारियों सहित बलदेव कश्यप को सपोर्ट मिल सकता है। ऐसे में देखना यह भी होगा कि जीआर मुसाफिर आजाद मैदान में उतरेंगे या फिर चतुर चाणक्य बनकर बलदेव को जिताएंगे। इस राजनीतिक मैदान में अब डिसाइडिंग फैक्टर बलदेव कश्यप इसलिए माना जा सकता है क्योंकि यहां भाजपा का नाराज वोट बैंक दयाल प्यारी को जाना था। इस पूरे विधानसभा क्षेत्र में जो सबसे मुख्य चर्चा का विषय है वह है दो प्रमुख भाजपा के चेहरों का गरुर तोड़ना।
इस पूरे विधानसभा क्षेत्र की अधिकतर जनता यानी वोटर रीना कश्यप से पूरी तरह सहमत है मगर किन्ही दो प्रमुख नेताओं को सबक सिखाने के लिए दयाल प्यारी की ओर जीत का इशारा करते हैं। यहां बड़ी प्रमुख वजह यह भी है कि किए गए विकास कार्यों का श्रेय जहां रीना कश्यप को मिलना चाहिए था वह क्रेडिट कोई और लेता रहा। ऐसे में रीना कश्यप की राहें बड़ी कठिन हो सकती हैं।
नाहन विधानसभा क्षेत्र में जनता भाजपा से ज्यादा विधायक के कार्य को तवज्जो देती है। किया गया विकास कार्य सार्वजनिक तौर पर नजर आता है। मगर इस विधानसभा क्षेत्र में टिकट की दौड़ से कांग्रेस की ओर से बाहर हुए इकबाल चौधरी सारे समीकरणों को बिगाड़ते हुए नजर आते हैं। अब यदि इकबाल चौधरी आजाद तौर पर मैदान में उतरते हैं तो ना केवल वह कांग्रेस को बल्कि भाजपा को भी बड़ा नुक्सान पहुंचाएंगे।
एक बात तो बिल्कुल तय है की हाल ही में हुए धींगा मुशती में इकबाल चौधरी और पूर्व कांग्रेसी विधायक रहे कंवर अजय बहादुर सिंह किसी भी सूरत में सोलंकी को समर्थन नहीं देंगे। दोनों अच्छा बैट वोट बैंक भी रखते हैं। वही एंटी बिंदल भाजपा गैंग भी पूरी तरह से सक्रिय है। ऐसे में यदि यह दोनों विरोधी शक्तियां इकट्ठे होकर इकबाल चौधरी के समर्थन में उतर जाती हैं तो इस विधानसभा के समीकरण बड़े चुनौतीपूर्ण बन सकते हैं।
अजय सोलंकी की सादगी और जातीय समीकरण के साथ-साथ नाहन शहर उनका काफी मजबूत माना जा रहा है। ऐसे में यह विधानसभा क्षेत्र मतदान से पहले कई राजनीतिक बातों से होकर गुजरेगा। पांवटा साहिब में अगर कांग्रेस हरप्रीत पर दांव खेल जाती है तो जहां पहले भाजपा और आम आदमी पार्टी का आमना सामना माना जा रहा था उसके बाद यहां कांग्रेस और भाजपा में टक्कर मानी जाएगी।
शिलाई विधानसभा क्षेत्र में बलदेव और हर्षवर्धन चौहान में कांटे की टक्कर मानी जा रही है। यहां पर यह तो तय है कि दलित वर्ग भाजपा के पक्ष में जाता हुआ नजर नहीं आता है। बरहाल, समय बड़ा कम है ऐसे समय में चुनौतियों से भरे 2022 के चुनावी मैदान में बड़े ब्रांड चेहरों से ज्यादा प्रत्याशियों को अपने और अपने कार्यकर्ताओं के दम पर ही मैदान फतेह करने के लिए उतरना होगा।
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