HNN/ नाहन
जिला सिरमौर में सरकारी गेहूं की पिसाई करने वाली मिलों की बिजली खपत को लेकर विभाग के द्वारा जांच शुरू कर दी गई है। डीएफएससी सिरमौर विजय सिंह हामलाल और उनकी टीम के द्वारा आज शनिवार को आटा मिलों की जांच की गई। गौरतलब हो कि नाहन की एक आटा मिल में गेहूं की पिसाई पर बिजली का बिल दर्शाया गया था। जबकि यह मिल 5-6 वर्षों से बंद पड़ी थी। आरटीआई एक्टिविस्ट रितेश गोयल के द्वारा जुटाई गई आरटीआई की जानकारी में ट्रक संख्या (एचपी 71 6505) जिसका चालान नंबर 61 230, गेट पास नंबर 10 420, दिनांक 22 जुलाई 2021 को 110.62 क्विंटल एफसीआई गोदाम काला अंब से थोक भंडार राजगढ़ के लिए ढुलाई किया गया था।
यहां गौर करने वाली बात यह है कि इसी ट्रक संख्या के द्वारा बिल संख्या 5334 दिनांक 22 जुलाई 2021 को 112 क्विंटल आटा नाहन से थोक भंडार कुपवी के लिए ढुलान दिखाया गया था। इस आटे की रिसीविंग 24 जुलाई 2021 को कुपवी में दिखाई गई है। यहां सवाल खड़ा यह हुआ है कि एक ही गाड़ी काला अंब से राजगढ़ और फिर नाहन से कुपवी किसी भी सूरत में ढुलान नहीं कर सकती। जाहिर है 112 क्विंटल आटे की पिसाई ना तो मिल में की गई और ना ही कुपवी गई। इसका प्रमाण बिजली के मीटर के बिल से भी क्रॉस चेक हो जाता है। जिस मिल का मामला यह दर्शाया गया था उसका पिसाई का कोटा 400 एमटी है जबकि शहर की अन्य आटा मिल का पिसाई कोटा 100 एमटी है।
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अब बिजली के बिल की बात की जाए तो जो 4000 एमटी कोटे वाला है उसका बिल 20,000 से भी नीचे है और जिसकी एमटी 1000 है उसका बिजली का बिल 40 से 50000 के बीच में आ रहा है। जाहिर सी बात है एक बहुत बड़ा फर्जीवाड़ा चला हुआ है। यह केवल एक बिल ही बताया गया है जबकि ऐसे दर्जनों फर्जी बिल लगाकर भुगतान हुए हैं। जिसमें विभागीय मिलीभगत भी स्पष्ट रूप से नजर आ जाती है। चूंकि, अब खाद्य आपूर्ति विभाग जिला सिरमौर में अधिकारी ने पदभार ग्रहण किया है। नए अधिकारी के जब यह मामला संज्ञान में आया तो उन्होंने इस पूरे प्रकरण को लेकर जांच शुरू कर दी है। हालांकि, इस पूरे प्रकरण की जांच विभाग के द्वारा निदेशक स्तर पर की जा रही है।
मगर जिला की तमाम आटा मिल अथवा आटा चक्की जिनमें सरकारी राशन पिसाई की जाती है उनके बिजली के मीटरों को लेकर स्थानीय स्तर पर जांच शुरू हुई है। बता दें कि आटा मिल में सरकारी गेहूं को पीसने की एवज में पिसाई का भुगतान भी किया जाता है। गेहूं को पीसने के बाद इसकी ढुलाई जिला के अन्य सरकारी गोदामों तक की जाती है। जहां से यह पीडीएस का राशन लोगों तक उपलब्ध करवाया जाता है। गौरतलब यह भी हो कि अधिकतर लोग चावल और आटा सरकारी राशन की दुकान से नहीं लेते हैं। कंज्यूमर जब कोटे की दुकान में राशन लेने जाता है तो उसका अंगूठा बायोमेट्रिक मशीन पर लिया जाता है।
मगर अंगूठा केवल राशन लेने को लेकर लगाया जाता है लिए जाने वाले राशन का बिल नहीं दिया जाता है। ऐसे में कंज्यूमर स्तर पर होने वाली इस बड़ी खामी का फायदा राशन ढुलाई करने वाले ट्रांसपोर्टर उठाते हैं। जो राशन का बैकलॉग द डिपो पर बचता है वह आटा अथवा चावल एडजस्ट कर लिया जाता है। यह एडजेस्टमेंट छोटी मोटी नहीं बल्कि कई कई गाड़ियों के हिसाब से हो जाती है। बरहाल, विभाग की कई खामियों का फायदा उठाते हुए एक बड़े स्तर पर खेले जाने वाले खेल को लेकर भले ही जांच शुरू की गई हो मगर फिलहाल जिस आटा मिल पर सवालिया निशान लगे हैं उसे डिफाल्टर घोषित करने की कोशिश तक नहीं की गई है।
उधर, डीएफएससी जिला सिरमौर विजय सिंह ने खबर की पुष्टि करते हुए बताया कि वह जिला की तमाम आटा मिल व आटा चक्की जिनमें सरकारी गेहूं पिसता है उनके बिजली के मीटर और बिल जांचें जा रहे हैं।
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