फॉरेस्ट क्लीयरेंस के लिए पेड़ों की गणना का स्टेज-2 कार्य भी शुरू
HNN / श्री रेणुका जी
बहुआयामी रेणुका जी बांध परियोजना निर्माण कार्य को जल्द पंख लगने शुरू हो जाएंगे। चुनावी आचार संहिता के चलते सीडब्ल्यूसी विजिट आजकल में कभी भी हो सकती है। सीडब्ल्यूसी श्री रेणुका जी बांध निर्माण में प्रधान सलाहकार है। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार केंद्रीय जल आयोग की टीम साइट विजिट के लिए कभी भी रेणुका जी पहुंच सकती है। बताना जरूरी है कि केंद्रीय जल आयोग टीम के आने का मुख्य उद्देश्य डैम निर्माण का डिजाइन ऑफ ड्राइंग बनाना है। सीडब्ल्यूसी टीम के इस कार्य के लिए हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन एलटीडी की ओर से सुंदरनगर की टीम भी श्री रेणुका जी बांध परियोजना साइड पर पहुंचेगी।
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गौरतलब हो कि यह टीम केंद्र से आने वाली सीडब्ल्यूसी की टीम को असिस्ट करेंगी। इस बहुआयामी रेणुका बांध परियोजना के निर्माण कार्य में अब कोई देरी ना हो इसको लेकर फॉरेस्ट क्लीयरेंस का कार्य भी पैरलल में चलाया जाने की कवायद भी शुरू हो चुकी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार सबसे पहले फॉरेस्ट क्लीयरेंस लेना जरूरी माना गया है। हालांकि 2008 और 2009 में फॉरेस्ट क्लीयरेंस के लिए पेड़ों की गणना की गई थी। मगर अब यह पौधे बड़े हो चुके हैं लिहाजा इनकी फिर से गिनती की जानी है।
फॉरेस्ट क्लीयरेंस के लिए पेड़ों की, की जाने वाली गणना में फॉरेस्ट की टीम रेवेन्यू तथा हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के अधिकारी भी शामिल रहेंगे। यह फॉरेस्ट क्लीयरेंस stage-2 मानी जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार डिजाइन और ड्राइंग के फाइनल हो जाने के बाद डैम निर्माण के लिए बिडिंग का कार्य शुरू हो जाएगा। फॉरेस्ट क्लीयरेंस के मिलते ही सबसे पहले गिरी नदी के पानी को डायवर्ट किया जाएगा। जिसके लिए सबसे पहला निर्माण तीन डायवर्जन टनल्स का होगा। यह डायवर्जन टनल करीब 1600 मीटर लंबी और इसका डाया करीब 10.5 मीटर का होगा।
जैसे ही गिरी नदी का पानी बांध निर्माण स्थल से डायवर्ट होगा उसके साथ ही पानी रोकने के लिए डैम निर्माण का कार्य शुरू हो जाएगा। अच्छी बात तो यह है कि हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन डिजाइनिंग के साथ-साथ समानांतर में ही पेड़ों की गिनती का कार्य कर रहा है। वही, जानकारी मिली है कि एचपीपीसीएल को मुआवजे के लिए माननीय न्यायालय से हुए आदेशों के बाद इस प्रक्रिया के लिए भी तमाम औपचारिकताएं पूरी कर ली गई है। असल में डैम प्रभावितों का मुआवजा प्रबंधन के द्वारा समय पर दे दिया जाना था।
मगर एचपीपीसीएल के पास फंड की कमी हो गई थी। यहां यह भी बताना जरूरी है कि इस डैम के निर्माण में 90 फ़ीसदी राशि केंद्र सरकार के द्वारा जबकि 10 फीसदी राज्य सरकार वहन करेगी। जान लेना जरूरी है कि इस बहुआयामी श्री रेणुका जी बांध परियोजना से प्रदेश को 40 मेगावाट बिजली, तो देश की राजधानी को 23 क्यूमेक्स पानी पीने के लिए मिलेगा। निर्माण स्थल पर बनाए जाने वाले बांध की ऊंचाई 148 मीटर के आसपास बताई जा रही है। रिवाइज हुए आंकलन के बाद इस बार निर्माण की लागत 7000 करोड़ से अधिक आंकी गई है।
यही नहीं जो 24 किलोमीटर लंबी झील डैम बनने के बाद तैयार होगी, भगवान परशुराम सागर के नाम पर रखा जा चुका है। इस डैम के निर्माण में हिमाचल प्रदेश सहित हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली व राजस्थान की भी 10-10 फीसदी की हिस्सेदारी रहेगी। खबर की पुष्टि एमडी एचपीपीसीएल डॉक्टर अजय के द्वारा की गई है।
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