मंच पर बैठे पूर्व विधायक रूप सिंह और बलबीर के चेहरे पर झलकी मायूसी
HNN / श्री रेणुका जी
श्री रेणुका जी में हुए प्रदेश गठन के 75 वर्ष के कार्यक्रम में भाजपा की गुटबाजी प्रखर नजर आई। बीते साढ़े 4 वर्षों में पहली बार मंच पर नारायण सिंह के नाम का संबोधन अधिकतर भाजपाइयों को नागवार गुजरा है। तो वही नारायण सिंह को मंच की प्रथम पंक्ति में बिठाया जाना कई सवाल खड़े करता नजर आया। बड़ी बात तो यह भी नजर आई कि चंद मुठ्ठी भर नारायण सिंह के समर्थकों को मंच के दाहिनी और जगह देकर रूप सिंह और बलबीर सिंह के चेहरे पर चिंता की लकीरें भी खींच दी। हालांकि मंच के सामने भीड़ ने नारायण सिंह के नाम को समर्थकों के द्वारा लिए जाने पर हूटिंग भी हुई।
हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें: Join WhatsApp Group
मगर बलबीर और रूप सिंह के समर्थकों को आगे जगह नहीं दी गई। मंच पर नारायण सिंह के नाम का संबोधन लिए जाने पर जहां उनके खुद के चेहरे पर कुटिल हंसी देखी जा सकती थी। वही भाजपाइयों का एक बड़ा वर्ग नाराज भी नजर आया। हालांकि यह कार्यक्रम सरकार की उपलब्धियों को लेकर था, जिसमें रूप सिंह और बलबीर चौहान का जनसंपर्क महत्वपूर्ण माना जाता है। मगर ऐन वक्त पर नारायण सिंह की एंट्री हो जाना भाजपा के लिए श्री रेणुका जी से शुभ संकेत देता नजर नहीं आता है। वही बड़ी बात तो यह भी नजर आई कि मंच पर बलबीर सिंह, रूप सिंह के साथ-साथ नारायण सिंह को भी बोलने का मौका दिया गया।
जबकि सरकार में और जिला से संबंध रखने वाले ऊर्जा मंत्री और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष को बोलने का मौका तक नहीं दिया गया। भाजपा के कई ऐसे चेहरे भी थे जिनका संबोधन में प्रोटोकॉल भी बनता था उनका जिक्र तक नहीं हुआ। बता दें कि श्री रेणुका जी में भाजपा का मंडल और भाजपा के कार्यकर्ताओं में जो अधिकतर समय संगठन के कार्यों को लेकर सक्रिय रहे हैं उनमें तालमेल की भी भारी कमी है। इसकी बड़ी वजह मंडल को विधानसभा से बाहर के नेताओं का समर्थन माना जाता है। श्री रेणुका जी के कुब्जा पवेलियन में आयोजित प्रदेश गठन के 75 वर्ष कार्यक्रम में भारी संख्या में लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज की थी। कार्यक्रम में अधिकतर सरकारी योजनाओं के बेनेफिशियर नजर आए।
इनमें महिलाओं की संख्या पुरुषों की अपेक्षा ज्यादा थी। जानकारी तो यह भी मिली है कि पंडाल में अधिकतर भीड़ जुटाने में बलबीर सिंह और रूप सिंह सहित जिला भाजपा के उपाध्यक्ष बीडीसी के चेयरमैन आदि का मुख्य योगदान रहा। ऐसे में बेवक्त नारायण सिंह के नाम को चंद समर्थकों के द्वारा मंच के सामने से बोला जाना और मंच पर नारायण को जगह दिया जाना विनय कुमार की राहों को आसान करता है।
यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह भी सामने आई कि जहां नारायण सिंह के नाम पर भीड़ के चेहरों पर मायूसी थी, तो वही सुरेश कश्यप को लेकर भीड़ में काफी उत्साह भी था। बताना इसलिए जरूरी है क्योंकि इस विधानसभा क्षेत्र के लिए सुरेश कश्यप का नाम भी काफी चर्चाओं में रहा है। अब यदि इन सभी चेहरों को हटाकर इस विधानसभा क्षेत्र के लिए सुरेश कश्यप का नाम प्रपोज होता है तो निश्चित रूप से ना केवल गुटबाजी को विराम लगेगा बल्कि इस विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस का किला भी धरा शाही होगा।
ऐसा इसलिए भी कहा जा सकता है क्योंकि जनजातीय क्षेत्र दर्जे की मांग को लेकर ना केवल पूर्व सांसद वीरेंद्र कश्यप बल्कि मौजूदा सांसद व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुरेश कश्यप ने केंद्र में जबरदस्त पैरवी की है। यहां एक और बड़ी महत्वपूर्ण बात यह भी है कि यदि सुरेश कश्यप इस विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी घोषित होते हैं तो जनजातीय क्षेत्र का विरोध कर रहे अनुसूचित जाति वर्ग के लोग भी सरकार के निर्णय का स्वागत करेंगे। ऐसे में जो समीकरण उभर कर सामने आते हैं उसमें सुरेश कश्यप का नाम यदि भावी प्रत्याशी के रूप में आ जाता है तो निश्चित ही इस नाम पर रेणुका जी में भाजपा एकजुट नजर आएगी।
बरहाल, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुरेश कश्यप राजनीति के सुलझे हुए खिलाड़ी हैं। दोनों ने जनता की नब्ज को बखूबी टटोल भी लिया है। उपस्थित भीड़ में अधिकतर महिलाओं और बुजुर्गों ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को दिल खोलकर समर्थन दिया, मगर नारायण सिंह के नाम को लेकर भीड़ ने कहीं भी कोई उत्साह नहीं दिखाया। भाजपा में एक बात की बड़ी खासियत यह रहती है जो चेहरा ज्यादा चर्चित होता है, परिणाम इसके बिल्कुल विपरीत रहता है। देखना अब यह होगा कि प्रदेश अध्यक्ष सहित ऊर्जा मंत्री और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष का जिले से ताल्लुक होने के बावजूद क्या रेणुका विधानसभा की चुनौती में भाजपा सफल होती है या नहीं यह देखना बाकी होगा।
📢 लेटेस्ट न्यूज़
हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें
ताज़ा खबरों और अपडेट्स के लिए अभी हमारे WhatsApp ग्रुप का हिस्सा बनें!
Join WhatsApp Group





