1970 में स्थापित की गई बुद्ध की प्रतिमा, नहीं रखरखाव की सुध
HNN / नाहन
नाहन शहर में दो-दो भगवान बुद्ध की प्रतिमाएं स्थापित हो चुकी है। शहर के एक विशेष वर्ग को राजनीतिलाभ के चलते ऐतिहासिक महिमा लाइब्रेरी के प्रांगण में भगवान बुद्ध की प्रतिमा स्थापित की गई है। एक ही शहर में दो-दो बुद्ध की प्रतिमा स्थापित किए जाने को लेकर बुद्धिजीवी वर्ग के द्वारा बड़ा सवाल खड़ा किया गया है। सवाल यह उठ रहा है कि जब नाहन के ऐतिहासिक स्थल शांति संगम में पहले से बुद्ध की प्रतिमा स्थापित है तो दूसरी प्रतिमा स्थापित किए जाने का क्या औचित्य है।
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राजेश, अनूप कुमार, दिग्विजय सिंह, जोगेंद्र सिंह आदि का कहना है कि शांति संगम में वर्ष 1970 में बुद्ध की प्रतिमा स्थापित की गई थी। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध शांतिदूत है। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध समाज के हर वर्ग के पूजनीय हैं, बावजूद इसके दूसरे स्थान पर पहली मूर्ति की अनदेखी करते हुए स्थापित किया जाना केवल राजनीतिक उद्देश्य को झलकाता है। लोगों का कहना है कि भगवान बुद्ध की मूर्ति स्थापित किए जाने पर कोई एतराज नहीं है।
मगर जहां वर्षों से भगवान बुद्ध की प्रतिमा पहले से स्थापित है उस स्थान का जीर्णोद्धार क्यों नहीं किया गया है। गौरतलब हो कि आज बुद्धपूर्णिमा है। बुद्धपूर्णिमा के अवसर पर जिला महिमा पुस्तकालय के प्रांगण में भगवान बुद्ध की दिव्य प्रतिमा स्थापित की गई है। हालांकि इस प्रतिमा स्थापन के अवसर पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुरेश कश्यप, नाहन के विधायक डॉ राजीव बिंदल, शहीद नगर परिषद की अध्यक्ष आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे। हैरानी तो इस बात की है कि जिस वर्ग को लेकर यह कार्यक्रम रखा गया था उसमें शहर के अधिकतर लोग नदारद रहे।
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