पांवटा और नाहन ही सुरक्षित, शिलाई में बलदेव तोमर का अचानक गिरा ग्राफ और..
HNN / नाहन
चुनावी वर्ष में मिशन रिपीट भाजपा के लिए ही नहीं बल्कि जेपी नड्डा के लिए भी बड़ी चुनौती है। चुनाव रण की व्यू रचना करने आ रहे भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष के स्वागत को लेकर जिला सिरमौर भाजपा ने तैयारियां लगभग मुकम्मल कर ली है। तो वही स्वागत बनाम शक्ति प्रदर्शन में नाहन और पांवटा साहिब पूरी तरह से भगवा में रंग गया है। हालांकि भाजपा ने हिमाचल विकास यात्रा में हुए गठन से लेकर अब तक के सर्वश्रेष्ठ कार्य को जनता के बीच आंकलन करने की शुरुआत कर रहा है। कार्यक्रम का मुख्य मकसद बीते साढ़े 4 वर्षों को सरकार का स्वर्णिम काल घोषित करवाना है।
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अब यदि राजनीतिक नजरिए से देखा जाए तो जिला सिरमौर जहां सुरेश कश्यप के लिए अग्नि परीक्षा बना है, तो वही प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के लिए मिशन रिपीट बड़ी चुनौती भी होगा। जाहिर सी बात है कि प्रदेश की 68 विधानसभा क्षेत्रों में दमखम वाले प्रत्याशी ही मैदान में उतारे जा सकते हैं। ऐसे में सिरमौर से की गई शुरुआत यदि जनता के नजरिए से देखा जाए तो विकास पर मत की मुहर लगती है। मगर यदि विकास के साथ-साथ संभावित भावी प्रत्याशियों की बात की जाए तो केवल नाहन और पांवटा साहिब भाजपा के लिए पूरी तरह सुरक्षित कहे जा सकते हैं। हालांकि नाहन में विधायक डॉ राजीव बिंदल सशक्त दावेदार हैं।
मगर सेवानिवृत्त मेजर जनरल अतुल कौशिक के नाम की चर्चाएं भी काफी ज्यादा चल रही है। यहां मुख्य बात यह भी आती है कि अतुल कौशिक का चेहरा आम जनता के बीच इतना चर्चित नहीं है जितना कि डॉ राजीव बिंदल का। डॉ बिंदल को लेकर भाजपा के बी गुट के द्वारा कई तरह के भ्रामक प्रचार भी किए जा रहे है, जिसे छद्म युद्ध भी कह सकते हैं। जिसमें विधायक के टिकट को लेकर संशय प्रकट किया जा रहा है। ऐसे में हाईकमान को इस वास्तु स्थिति से भी अवगत होना चाहिए कि प्रदेश भर में भाजपा की स्थिति इतनी अच्छी भी नहीं है। ऐसे में नाहन तथा पांवटा साहिब में सुखराम चौधरी और डॉ राजीव बिंदल के अलावा किसी और चेहरे पर दांव खेलना भाजपा के मिशन रिपीट में दिक्कत भी खड़ी कर सकता है।
पांवटा साहिब के विधायक एवं मंत्री सुखराम चौधरी साधारण और स्वच्छ छवि के साथ-साथ एकमात्र ऐसे विधायक हैं जो भाजपा के ए और बी दोनों गुटों में संतुलित माने जाते हैं। हालांकि सुखराम चौधरी जहां नड्डा समर्थक हैं तो वही वह धूमल भगत भी कहलाते हैं। संतुलन की अगर बात की जाए तो पांवटा साहिब में हुए विकास कार्यों को लेकर सुखराम चौधरी ने जयराम सरकार का जमकर प्रचार-प्रसार भी किया है। अब यदि पांवटा साहिब विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की ओर से दावेदारों की बात की जाए तो मनीष तोमर, मदन शर्मा और रोशन लाल शास्त्री दावेदारी कर रहे हैं।
अब यदि अंदर की बात की जाए तो इनमें से एक ऐसा चेहरा भी है जिसको जानबूझकर सुखराम चौधरी के अंगेज प्लॉट किया जा रहा है और यह सब कांग्रेस की ओर से नहीं बल्कि भाजपा के ऐसे नेता की तरफ से किया जा रहा है जो मुख्यमंत्री का खुद को काफी करीबी भी बताते हैं। वही रोशन लाल शास्त्री कैंपेनिंग भी शुरू कर चुके हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि पार्टी से टिकट मिला तो भी ठीक है नहीं तो निर्दलीय रूप से ही मैदान में उतरेंगे।
मदन शर्मा की बात की जाए तो भले ही वह फाइनेंसियल तरीके से मजबूत हो मगर मुट्ठी भर समर्थकों के साथ जीत का दावा कर रहे हैं। जिला सिरमौर में सुखराम चौधरी भाजपा के वरिष्ठ नेता सहित लोकप्रियता में भी काफी आगे हैं। ऐसे में जहां पांवटा साहिब में कांग्रेस पूरी तरह से बिखरी हुई है तो वही सुखराम चौधरी छुट भैया नेताओं की दावेदारी के बावजूद भले ही मार्जीन में नुक्सान उठा ले मगर जीत निश्चित है।
उधर शिलाई विधानसभा क्षेत्र की बात की जाए तो यहां जय राम सरकार द्वारा की गई हर घोषणा को पूरा किया है। मगर जनजातीय क्षेत्र के दर्जे को लेकर जब से यह मामला माननीय उच्च न्यायालय गया है तब से रही सही उम्मीद पर पानी फिर गया है। अब यदि क्षेत्र को जनजातीय क्षेत्र का दर्जा मिले या ना मिले भाजपा को कोई फायदा यहां से होने वाला भी है। इसकी बड़ी वजह एससी/एसटी वर्ग के प्रति बलदेव तोमर की अनदेखी जाति समीकरण के आधार पर उन्हें बैक फुट पर ले जाती है।
बलदेव तोमर का अधिकतर वक्त पांवटा साहिब और शिमला में ही बीतता है। यही नहीं अब स्थाई रुप से पांवटा में ही रहने लग पड़े हैं। बलदेव तोमर की अपने विधानसभा क्षेत्र में जो छवि गिरी है उसकी चर्चाएं भी अब जग जाहिर हो रही हैं। इस विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेसी विधायक मजबूत स्थिति में है साथ ही वह दो और अन्य चेहरे ऐसे हैं जो भाजपा को ही नुक्सान पहुंचाते हुए नजर आते हैं।
श्री रेणुका जी विधानसभा क्षेत्र आज भी कांग्रेस का मजबूत गढ़ है। हालांकि रूप सिंह भाजपा की ओर से स्ट्रांग माने जाते हैं तो वही क्षेत्र में किए गए विकास कार्यों को लेकर बलबीर चौहान जो पूर्व में प्रत्याशी रहे हैं उनकी लोकप्रियता का ग्राफ भी बढ़ा है। मगर संगठन की ओर से यह एक ऐसे चेहरे को प्लॉट किया जा रहा है जो कांग्रेसी विधायक के परिवार से ताल्लुक रखता है। जिसका जीत का समीकरण सिर्फ विनय कुमार की उन पंचायतों तक ही बनाया गया है जिनसे कांग्रेस जीत हासिल करती है। ऐसे में सवाल ये उठता है क्या बलबीर और रूप सिंह के समर्थक नारायण सिंह को समर्थन देंगे या नहीं यह बड़ा सवाल है।
अब यदि अंदर की बात की जाए तो इस विधानसभा क्षेत्र में एक ऐसा चेहरा भी है जिस पर रूप सिंह और बलबीर चौहान दोनों मिलकर सहमति के साथ उसे जीत के नजदीक लेकर जा सकते हैं। क्योंकि यह दोनों प्रमुख चेहरे नारायण सिंह को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेंगे। अरुण कुमार को कट्टर संघ का समर्थक माना जाता है। यूथ में अच्छी पकड़ है ईमानदार छवि के साथ-साथ यदि रूप सिंह और बलबीर चौहान अपना वरदहस्त इसके सर पर रख देते हैं तो विनय कुमार किसी भी सूरत में यह चुनाव नहीं जीत पाएंगे।
वही, पच्छाद विधानसभा क्षेत्र की बात की जाए तो यहां कांग्रेस बनाम कांग्रेस जंग काफी स्ट्रॉन्ग है। भाजपा से कांग्रेस में शामिल हुई दयाल प्यारी को भाजपा के एक बड़े नाराज वर्ग का समर्थन भी मिला हुआ है। इसकी बड़ी वजह ना केवल नाराज वर्ग बल्कि भाजपा के दो ऐसे बड़े चेहरे भी हैं जिनको इस पूरे विधानसभा क्षेत्र की जनता किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं कर रही है। जबकि भाजपा की विधायक रीना कश्यप अपने आप में स्वच्छ एवं लोकप्रिय छवि रखती है। क्षेत्र की जनता की रीना कश्यप के प्रति कहीं कोई नाराजगी भी नजर नहीं आती है। ऐसे में यदि जीआर मुसाफिर को कांग्रेस टिकट देती है तो निश्चित रूप से रीना कश्यप रिपीट कर सकती है।
मगर यह दो प्रमुख चेहरे प्रचार और प्रसार में खास तौर से राजगढ़ क्षेत्र में रहते हैं तो रीना कश्यप की राहें मुश्किल में पड़ सकती है। इसका उदाहरण फ्लैशबैक जाने पर अच्छी तरह से समझा जा सकता है। कुल मिलाकर सिरमौर की नब्ज टटोलने आ रहे जेपी नड्डा एक सुलझे हुए खिलाड़ी है। जेपी नड्डा यह भी अच्छी तरह से जानते हैं कि गुटबाजी को किस तरीके से खत्म किया जा सकता है। भाजपा का पुराना गुट आज भी नड्डा का पूरी तरह विश्वास पात्र है ऐसे में देखना यह होगा कि भाजपा की ओर से मैदान में कौन से योद्धा उतारे जाते हैं।
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