HNN/ नाहन
प्रदेश की जयराम सरकार ठेकेदारों पर मेहरबान होती नजर आ रही है। मेहरबानी की इंतिहा भी ऐसी है कि शिलाई के हेलीपैड को आईपीएच की पाइपों का स्टोर बना दिया गया है। यही नहीं, हैरान कर देने वाला विषय यह है कि मुख्य हेलीपैड की जगह शिलाई डिग्री कॉलेज के कैंपस में हेलीकॉप्टर की लैंडिंग करवाई जाती है। यहां यह भी जानना जरूरी है कि कॉलेज कैंपस में केवल छोटा चौपर ही लैंड हो सकता है बड़ा नहीं।
ऐसे में सवाल यह उठता है कि किसी बड़ी आपदा अथवा मुख्यमंत्री के बड़े चौपर को यदि आपातकालीन लैंडिंग करवानी पड़ जाए तो क्या होगा। मजेदार बात तो यह है कि कॉलेज प्रबंधन के द्वारा कॉलेज कैंपस में हेलीकॉप्टर की लैंडिंग पर आपत्ति भी दर्ज की गई थी। बावजूद इसके प्रभावशाली नेता के द्वारा बाकायदा एविएशन की टीम बुलाकर कॉलेज कैंपस की लैंडिंग को एविएशन की ओर से क्लीन चिट दिलवाई गई।
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सवाल तो यह उठता है कि जब पहले से लाखों रुपए खर्च कर हेलीपैड बनवाया गया था तो ऐसे में किसके इशारे पर पानी की पाइप भारी मात्रा में हेलीपैड पर उतारी गई। गौरतलब हो कि बड़ा व मुख्य हेलीपैड नाया रोड पर बनाया गया है। जिस पर पाइप स्टोर की गई है। हालांकि, इस विधानसभा क्षेत्र में अन्य जगह पर भी हेलीपैड बनाए गए हैं मगर सवाल तो यह उठता है कि जो जगह हेलीपैड के लिए बनाई गई थी उसका दुरुपयोग क्यों किया गया।
सूत्रों के मुताबिक, जानकारी तो यह भी है कि कॉलेज के समीप ही एक बड़े हेलीपैड हेतु जमीन चयन की गई है। फिलहाल छोटा चौपर कॉलेज कैंपस में ही उतारा जाता है। ऐसे में साफ जाहिर हो जाता है कि मुख्य हेलीपैड को आईपीएच का स्टोर बनाकर अब दूसरा हेलीपैड बनाया जाएगा।
उधर, एसडीएम शिलाई सुरेश सिंघा का कहना है कि जिस जगह पाइप रखी गई हैं वह मेरे कार्यकाल से पहले से रखी गई है। फिलहाल हेलीकॉप्टर की लैंडिंग कॉलेज कैंपस में करवाई जाती है। वही उपायुक्त जिला सिरमौर आरके गौतम का कहना है कि उन्होंने इस संदर्भ में एसडीएम को जानकारी लेने के लिए कहा है।
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