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जयराम जी आप की कुर्सी का एक पाया और एक टांग उखड़ गई है- शेर सिंह गुज्जर

SAPNA THAKUR | 21 सितंबर 2022 at 5:16 pm

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HNN/ नाहन

सिरमौर में गिरी पार क्षेत्र के हाटी समुदाय को एसटी का दर्जा दिया जाना सरकार के गले की फांस बन गया है। आज बुधवार को सरकार के इस फैसले के खिलाफ हिमाचल प्रदेश गुज्जर समाज ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए महासभा और आक्रोश रैली का आयोजन किया। प्रदेश गुज्जर समाज अध्यक्ष हेमराज राव की अध्यक्षता में आयोजित इस आक्रोश महासभा में हजारों गुर्जरों ने अपनी उपस्थिति दर्ज की। बड़ी बात तो यह है कि इस महा आक्रोश में पुरुष वर्ग से ज्यादा महिलाओं ने अपना विरोध दर्ज किया।

हेमराज राव का कहना है कि हम हाटी समाज की मांग का विरोध नहीं कर रहे हैं बल्कि सरकार ने दोहरा चरित्र दिखाते हुए हमारी थाली की रोटी को छीन कर दूसरों को परोस दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश के अन्य जनजाति क्षेत्र व गुज्जर समाज सहित पहले से ही 4.30 लाख के आसपास लोग 7.30 फीसदी आरक्षण कोटे में शामिल हैं। वही पहले से ही संपन्न और उच्च जाति सहित 80 फ़ीसदी साक्षरता दर वाले गिरी पार के 2 लाख से अधिक लोगों को एसटी का दर्जा देकर गुज्जर समाज को हाशिए पर कर दिया है। जबकि गुज्जर समाज में साक्षरता दर 59 फ़ीसदी ही है।

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उन्होंने कहा कि छोटे से प्रदेश में रोजगार के संसाधन पहले से ही कम है ऐसे में गुज्जर समाज की युवा पीढ़ी का भविष्य अंधकार मय हो जाएगा। वही गुज्जर समाज कल्याण परिषद जिला सिरमौर के अध्यक्ष हंसराज गुज्जर का कहना है कि हाटी क्षेत्र में विद्यालय, महाविद्यालय बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं तथा कैश क्रॉप आदि में यह क्षेत्र काफी संपन्न है। जबकि गुज्जर समाज भेड़- बकरी गाय आदि पालकर तथा घुमंतू जीवन व्यतीत करते हुए गुजर बसर करता है।

उन्होंने कहा कि कुछ अरसे से इस समाज के युवाओं ने शिक्षा के क्षेत्र में अपने सुनहरे भविष्य को लेकर कदम रखे हैं। ऐसे में पहले से ही संपन्न वर्ग को आरक्षण की जरूरत ही नहीं थी। उन्होंने सरकार को चेताते हुए कहा कि या तो उनका कोटा अलग किया जाए या फिर सरकार हाटी वर्ग से एसटी का दर्जा वापस ले उन्हें विशेष पिछड़ा वर्ग में शामिल करें। उन्होंने यह भी मांग करी कि अगर सरकार इसमें भी बेबस है तो राजस्थान और तेलंगाना की तर्ज पर एसटी का कोटा 7.30 फ़ीसदी से बढ़ाकर 15 फ़ीसदी करे।

उधर, महासभा में बर्मा पापड़ी के प्रधान शेर सिंह ने मंच से सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि जयराम जी आप की कुर्सी का एक पाया और टांग अब उखड़ गई है। उन्होंने सीधे और स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार ने केवल राजनीतिक लाभ लेने के लिए हमारा हक छीन कर हमारे साथ बड़ा छल किया है। उधर, अखिल भारतीय गुज्जर सभा के उपाध्यक्ष बिलासपुर के पृथ्वीराज ने कहा कि विरोध की चिंगारी सिरमौर से शुरू हो गई है।

उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने समय रहते उचित निर्णय नहीं लिया तो इस आक्रोश को आंदोलन का रूप देते हुए प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर तक ले जाया जाएगा। बता दें कि जिला सिरमौर में करीब 15,000 के लगभग गुज्जर वोट बैंक है जबकि प्रदेश में इस वर्ग की संख्या लाखों में है। ऐसे में यदि यह गुज्जर समाज की गर्जना एक बड़े आंदोलन का रूप ले लेती है तो सरकार का मिशन रिपीट किसी भी सूरत में कामयाब होता नजर नहीं आता है।

वही गुज्जर युवा मंच जिला सिरमौर के अध्यक्ष किंनशुक तथा सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता रमजान खान का कहना है कि वह जल्द एक रणनीति तैयार करेंगे। रणनीति के तहत प्रदेश सरकार तथा केंद्र सरकार सहित सुप्रीम कोर्ट में जाने तक के तमाम विकल्पों पर काम करेंगे। बरहाल, चुनावी वर्ष में गुज्जर समाज की गर्जना राजनीतिक गलियारों में गूंजनी शुरू हो चुकी है। यदि नाहन विधानसभा क्षेत्र की बात की जाए तो गुज्जर समाज का अधिकतर वोट बैंक जो पहले कांग्रेस का हुआ करता था स्थानीय विधायक राजीव बिंदल के चलते यह भाजपा का हो चुका था।

ऐसे में जानकारी यह भी है कि गुज्जर समाज के पदाधिकारियों ने भाजपा के तमाम कार्यक्रमों का बहिष्कार करने का भी निर्णय लिया है। अब यदि सरकार गुज्जर समाज की इस मांग पर गंभीरता नहीं दिखाती है तो नाहन विधानसभा में डॉ. राजीव बिंदल की जीत सुनिश्चित करने वाला कालाअंब क्षेत्र भाजपा की झोली से छटक सकता है। यही नहीं जिस तरीके से आज राष्ट्रीय व प्रदेश स्तर के नेताओं ने सरकार को चुनौती दी है उससे तो यह साफ है कि सरकार के इस निर्णय का असर पूरे प्रदेश की राजनीति पर डल सकता है।

यहां यह भी बताना जरूरी है कि जिला सिरमौर गुज्जर समाज कल्याण परिषद के द्वारा उपायुक्त के माध्यम से एक ज्ञापन राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय जनजातीय मामले मंत्री, प्रदेश के गवर्नर तथा हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री को प्रेषित किया है।आयोजित महासभा व आक्रोश रैली में नालागढ़ से भगवान दास, ऊना से रामदास , बाबा अनंतराम तोमर, समन्वयक अखिल भारतीय गुज्जर सभाएं दिल्ली, दिनकर भदूडी, बरखा राम, काला अंब की ग्राम प्रधान रेखा देवी, उप प्रधान पालियों बलबीर, जिला सिरमौर गुज्जर महिला मोर्चा की अध्यक्ष ऋतु चौधरी, युवा नेता यशपाल उर्फ पालू, सुभाष चौधरी, सहित गुज्जर समाज के हजारों लोग उपस्थित रहे।

उधर, राष्ट्रीय गुर्जर स्वाभिमान समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविंद्र भाटी ने कहा कि समाज को जब भी जहां भी हमारी जरूरत पड़ेगी फिर चाहे वह न्यायालय हो या फिर सड़कों पर आंदोलन, हम दोनों प्रकार से तैयार रहेंगे।

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