HNN/ नाहन
एक ओर जहां एचपीयू के “एलुमनी ऑफ द ईयर” कार्यक्रम में रीना कश्यप को बेहतर जन सेवक के रूप में राष्ट्रीय भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के द्वारा सम्मानित किया गया तो वही सिरमौर की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी पर भी भाजपा फिर से दांव खेलने की तैयारी में है। बता दें कि जहां प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर अपनी अधिकतर जनसभाओं में महिला शक्ति को ही ज्यादा अधिमान दे रहे हैं। भाजपा की इस सोच के पीछे महिला वोट बैंक की शत प्रतिशत गारंटी की बड़ी वजह है। यही नहीं अधिकतर घरों में महिलाओं की बातों को अधिमान भी दिया जाता है।
तो वही जिला सिरमौर में जब जेपी नड्डा पहुंचे तो उन्होंने भी दोनों जन सभाओं में महिलाओं की ज्यादा उपस्थिति पर वोट बैंक का क्षेत्रफल बेहतर तरीके से नाप लिया है। यही नहीं रीना कश्यप के कम समय में बेहतर जनसेवा किए जाने को लेकर भी उन्हें आशीर्वाद दिया है। ऐसे में यह तो बिल्कुल स्पष्ट हो जाता है कि जिला सिरमौर में केवल पच्छाद सीट ही एक ऐसी है जिस पर महिला को उतारा जा सकता है। हालांकि दयाल प्यारी भाजपा की सशक्त और प्रबल दावेदार हुआ करती थी मगर इस विधानसभा क्षेत्र में भाजपा ने उसी डाल को काटने की कोशिश करी जिस पर वह खुद बैठे थे।
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दयाल प्यारी कांग्रेस में जा चुकी है। संभावना तो यह भी है कि महिला वर्सेस महिला की इस जंग में कांटे की टक्कर भी संभव है। ऐसे में जिस प्रकार पूर्व विधानसभा अध्यक्ष जीआर मुसाफिर एक बार फिर टिकट की दौड़ में अड़े हुए हैं उससे भाजपा की विधायक रीना कश्यप की राहें फिर से और आसान बन रही है। बड़ी बात तो यह भी है कि रीना कश्यप की सादगी, ईमानदारी को देखते हुए यदि भाजपा मिशन रिपीट करती है तो रीना का मंत्रिमंडल में जाना भी पक्का माना जा सकता है। हालांकि, सरवीण चौधरी भाजपा सरकार में अकेली मंत्री हैं मगर उनकी परफॉर्मेंस को लेकर सरकार और संगठन सेटिस्फाई भी नहीं है।
जाहिर है इस बार भाजपा सिरमौर को मिशन रिपीट के बाद सरकार ने अधिमान मिल सकता है। ऐसे में जहां राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी रीना कश्यप को सिरमौर दौरे के दौरान आशीर्वाद दिया है उससे क्षेत्र के कार्यकर्ताओं में भी नया जोश पैदा हुआ है। यहां यह भी बताना जरूरी है कि इस विधानसभा क्षेत्र में रीना कश्यप ने जीत के बाद अपने दम पर ही अपनी विशिष्ट पहचान बनाने में कामयाबी हासिल की है। जबकि भाजपा के कुछ प्रमुख नेताओं की वजह से उन्हें कुछ जगह नुक्सान भी हुआ है। इस विधानसभा क्षेत्र में खासतौर से राजगढ़ की और उन नेताओं को लेकर जनता आज भी अपने पुराने रुख पर कायम है।
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