चुनाव आयोग में नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सीबीआई चीफ की तर्ज पर ही मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की जानी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक कमेटी बने, जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया शामिल हों। ये कमेटी एक नाम की सिफारिश राष्ट्रपति से करे। राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति हो।
इस मुद्दे पर सुनवाई करते हुए जस्टिस के एम जोसेफ ने कहा कि लोकतंत्र को बनाए रखने के लिए चुनाव प्रक्रिया की शुद्धता बनाए रखी जानी चाहिए अन्यथा इसके विनाशकारी परिणाम होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कार्यपालिका हस्तक्षेप से चुनाव आयोग के कामकाज को अलग करने की आवश्यकता है।
यह भी कि चुनाव आयुक्तों को सीईसी के समान सुरक्षा दी जानी चाहिए। उन्हें सरकार द्वारा हटाया भी नहीं जा सकता है। संविधान निर्माताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयोग की नियुक्ति के लिए कानून बनाने का काम संसद पर छोड़ दिया था, लेकिन राजनीतिक व्यवस्थाओं ने उनके विश्वास को धोखा दिया और पिछले सात दशकों में कानून नहीं बनाया है।
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