HNN/ नाहन
जिला सिरमौर के हाटी क्षेत्र में माघी के त्योहार के चलते आज गुरुवार को साजे का त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया गया। इस त्योहार के शुरू होते गिरीपार के क्षेत्रों में दावतों का दौर शुरू हो गया है। मकर सक्रांति के अवसर पर गिरीपार के लोगों ने पहाड़ी व्यंजन बनाकर सांस्कृतिक क्रियाओ का आयोजन किया। गिरीपार के गांव दुगना, शिल्ला, कमरउ, बड़वास, टटियाना और टिम्बी माशु आदि गांव में छोटे-छोटे बच्चों की टोलियां अलग-अलग क्षेत्रों में सुबह ही दान मांगने के लिए निकली।
इस दौरान गुरुवार सुबह ही प्रत्येक गांव में नन्हे बच्चों ने गांव के पारंपरिक छोटे-छोटे वाद्य यंत्र जिसे स्थानीय बोली में हुड़क कहा जाता है। इस बीच नन्हे-नन्हे बच्चों ने प्रत्येक परिवार में जो सबसे छोटा बच्चा होता है उसके नाम से परंपरिक गीत गानों के साथ दान मांगा। उसके बाद प्रत्येक परिवार के लोग अपने घर के सबसे छोटे बच्चे के नाम से नकद, गुड़, चावल, आटा, मीट के रूप में बच्चों को दान देते हैं। सिरमौर जिला के गिरीपार क्षेत्र में यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। माघी के त्योहार के दूसरे दिन साजे का त्योहार मनाया जाता है।
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इसी दिन प्रत्येक गांव के छोटे-छोटे बच्चे अलग-अलग समूह बनाकर अपने अपने गांव में दान मांगने निकलते हैं। उसके बाद दान के माध्यम से जो नकद राशि, चावल, आटा, गुड़, मीट एकत्रित होता है उसे बच्चे समान रूप से आपस में बांट देते हैं । इस प्रक्रिया से प्रत्येक परिवार भी खुश होता है कि नन्हे बच्चों की टोली उनके घर में सबसे कम उम्र के बच्चे के नाम से दान मांगने आते हैं। इसे माघी त्योहार के दौरान बेहद ही शुभ भी माना जाता है। दान मांगने की इस प्रक्रिया से यह भी जोड़ा जाता है कि इससे बच्चे की लंबी आयु की कामना भी छोटे-छोटे बच्चों द्वारा की जाती है।
उधर, गिरीपार में माघी के पर्व के मकर संक्रांति से पहले तो साजे इस बार आ रहे हैं। साथ ही गांव में दावतों का दौर भी शुरू हो चुका है जो करीब 1 माह तक चलेगा।
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