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केंद्र से मिली मंजूरी से तेज होंगे सिरमौर के विकास कार्य, नाहन वन वृत्त के 6 एफसीए मामलों को हरी झंडी

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जिला सिरमौर में लंबे समय से लंबित विकास परियोजनाओं को लेकर बड़ी प्रशासनिक राहत सामने आई है। नाहन वन वृत्त के अंतर्गत फॉरेस्ट क्लीयरेंस के लिए केंद्र सरकार को भेजे गए 22 मामलों में से 6 मामलों को अंतिम मंजूरी मिल गई है।

सिरमौर/नाहन

केंद्र से मिली प्रशासनिक राहत
जिला सिरमौर में लंबे समय से लंबित विकास परियोजनाओं को लेकर बड़ी प्रशासनिक राहत सामने आई है। नाहन वन वृत्त के अंतर्गत फॉरेस्ट क्लीयरेंस के लिए केंद्र सरकार को भेजे गए 22 मामलों में से 6 मामलों को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से अंतिम मंजूरी मिल गई है। इससे सड़क, बिजली और जल संसाधन से जुड़े कई अहम कार्यों के शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है।

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वन मंडलों के अनुसार स्वीकृत मामले
जानकारी के अनुसार जिन मामलों को फाइनल अप्रूवल मिला है, उनमें नाहन वन मंडल के तीन, पांवटा साहिब वन मंडल के एक तथा रेणुकाजी वन मंडल के दो प्रस्ताव शामिल हैं। हालांकि राजगढ़ वन मंडल का कोई भी मामला अभी तक अंतिम स्वीकृति स्तर तक नहीं पहुंच पाया है, जिससे क्षेत्र में विकास को लेकर असंतुलन की स्थिति भी सामने आ रही है।

एफसीए मामलों की वर्तमान स्थिति
आंकड़ों के मुताबिक नाहन वन मंडल में कुल 10 एफसीए मामलों में से 3 को फाइनल, 3 को इन-प्रिंसिपल अप्रूवल मिला है, जबकि 4 मामले अभी विभिन्न स्तरों पर लंबित हैं। पांवटा साहिब वन मंडल में 3 मामलों में से एक को अंतिम मंजूरी मिली है, जबकि दो प्रस्ताव सैद्धांतिक स्वीकृति की श्रेणी में हैं।

रेणुकाजी और राजगढ़ वन मंडल की स्थिति
रेणुकाजी वन मंडल में 7 मामलों में से 2 को केंद्रीय मंजूरी मिल चुकी है, जबकि 5 अभी अंडर प्रोसेस बताए जा रहे हैं। वहीं राजगढ़ वन मंडल के 2 मामलों पर अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हो पाया है।

फाइनल मंजूरी पाने वाली प्रमुख परियोजनाएं
फाइनल मंजूरी पाने वाली परियोजनाओं में अपर जामली से बढ़ोन कठाना लिंक रोड, भेड़ों से आदि बदरी लिंक रोड, 132 केवी एमसीटी लाइन निर्माण परियोजना, पांवटा साहिब–बल्लूपुर एनएच-72 के उन्नयन से जुड़ा वन भूमि डायवर्जन, चिल्लोन से चोकी मिरगवाल लिंक रोड और रेणुका बांध परियोजना शामिल हैं। इन परियोजनाओं को जिले के विकास के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

लंबे समय से अटके थे विकास कार्य
प्रशासनिक जानकारों के अनुसार फॉरेस्ट क्लीयरेंस में देरी के चलते कई विकास कार्य वर्षों से अटके हुए थे। ऐसे में केंद्र से मिली यह मंजूरी राज्य सरकार और जिला प्रशासन के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, जबकि शेष लंबित मामलों को लेकर भी लगातार फॉलोअप किए जाने की बात कही जा रही है।

फॉरेस्ट कंजर्वेटर ने की पुष्टि
खबर की पुष्टि करते हुए फॉरेस्ट कंजर्वेटर बसंत किरण बाबू ने बताया कि जिला सिरमौर से कुल 22 मामले फॉरेस्ट क्लीयरेंस के लिए भेजे गए थे। इनमें से 6 मामलों को फाइनल अप्रूवल मिल चुकी है, पांच मामले इन-प्रिंसिपल अप्रूवल की श्रेणी में हैं, जबकि 11 मामले अभी अंडर प्रोसेस चल रहे हैं।

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