HNN / नाहन
गिरीपार क्षेत्र का दलित वर्ग तथा गुर्जर समुदाय जनजातीय दर्जा की घोषणा के बाद अब सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है। मगर सुप्रीम कोर्ट जाने से पहले दलित शोषण मुक्ति मंच घोषित किए गए जनजातीय दर्जे को लेकर पहले ड्राफ्ट की स्थिति का जायजा लेगा। दलित शोषण मुक्ति मंच के आशीष कुमार का कहना है कि वह एसटी दर्जा दिए जाने का विरोध नहीं कर रहे हैं, मगर दलित वर्ग के अधिकारों की सुरक्षा को लेकर भी चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि यह तो तय है कि दर्जा दिए जाने के बाद एट्रोसिटी का मामला खत्म हो जाएगा।
यही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि जो उन्हें अन्य फायदे कानून के माध्यम से मिल रहे थे वह बरकरार रहेंगे या नहीं इसको लेकर केंद्र सरकार ने कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है। दलित शोषण मुक्ति मंच के आशीष ने बताया कि वे जल्द एक बैठक करने जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक लिखित रूप से उनके अधिकारों के संरक्षण की गारंटी नहीं मिल जाती है तब तक संघर्ष भी जारी रहेगा। आशीष ने यह भी स्पष्ट किया है कि शिलाई, पच्छाद तथा श्री रेणुका जी विधानसभा क्षेत्र का एससी वर्ग आने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा सरकार का विरोध करेगा।
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उन्होंने कहा कि अभी उनका मामला माननीय उच्च न्यायालय में भी विचाराधीन है, मगर अब वह सुप्रीम कोर्ट का भी स्थिति स्पष्ट ना होने के एवज में रुख इख्तियार कर सकते हैं। उधर, गुर्जर कम्युनिटी का विरोध भी तेज होने की स्थिति में है। गुर्जर कम्युनिटी का मानना है कि उन्हें संख्या के आधार पर रिजर्वेशन में केवल साढ़े सात पर्सेंट का ही बेनिफिट मिलता है। ऐसे में 1 लाख 60 हजार से अधिक लोगों का एसटी वर्ग में शामिल होने के बाद उनका रिजर्वेशन बुरी तरह से प्रभावित होगा। इनका कहना है कि सरकार को पहले गुर्जर और एससी वर्ग के अधिकारों के संरक्षण को लेकर अधिकारिक घोषणा करनी चाहिए थी।
इनका मानना यह भी है कि जनजातीय दर्जा घोषित होने के बाद किन्नौर और लाहौल स्पीति को भी काफी फर्क पड़ेगा। असल में इनका मानना है कि संसाधन सीमित है और रिजर्वेशन में हिस्सेदारों की संख्या जनसंख्या के आधार पर बढ़ जाएगी। बरहाल यह तो तय है कि एससी वर्ग के द्वारा हाल ही में संख्या के आधार पर जो विरोध दर्ज किया गया था उसका खामियाजा आने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा सरकार को भुगतना भी पड़ सकता है। ऐसे में शिलाई विधानसभा क्षेत्र तथा श्री रेणुका जी विधानसभा क्षेत्र जो पहले से ही भाजपा के लिए कमजोर चला हुआ है वह मजबूत होने की स्थिति में नजर नहीं आता है।
क्योंकि इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा के संभावित प्रत्याशी मजबूत नहीं है। हालांकि हाटी वर्ग एक तरफ होकर भाजपा को फायदा दे सकता है। मगर सोचना तो यह भी होगा कि दोनों विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस कैंडिडेट काफी मजबूत है दोनों का अच्छा कैडर वोट बैंक है। सबसे बड़ी बात दोनों क्षेत्रों में एससी वर्ग संख्या में ज्यादा है। अब यदि यह वर्ग विरोध पर उतरता है तो इसका सीधा सीधा फायदा खासतौर से श्री रेणुका जी और शिलाई में कांग्रेस को ही जाता है। ऐसा भी कहा जा सकता है कि अब दोनों विधानसभा क्षेत्रों में मुकाबला कांटे की टक्कर का होगा।
मगर श्री रेणुका जी विधानसभा क्षेत्र अभी भी भाजपा की पकड़ से दूर है। क्योंकि भाजपा जिस व्यक्ति पर दांव खेलने की तैयारी कर रही है उनकी पूरी बिरादरी अब भाजपा के विरोध में उतरेगी। ऐसे में इस विधानसभा क्षेत्र से यदि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप या फिर एक ऐसा क्षेत्र जो हमेशा दोनों राजनीतिक दलों के द्वारा हाशिए पर रहा है उस क्षेत्र के व्यक्ति को भाजपा प्रतिनिधित्व देती है तो निश्चित रूप से भाजपा को फायदा हो सकता है।
बरहाल, आज सिरमौर का गुर्जर वर्ग पालियों में एक बड़ी बैठक करने जा रहा है। जिसमें काफी संख्या में लोग मौजूद रहेंगे। जाहिर सी बात है कि साढ़े सात परसेंट के आरक्षण में अब 16,0000 लोग और शामिल हो जाएंगे जिसका खामियाजा इन्हें भुगतना पड़ सकता है। देखना यह होगा कि सरकार भले ही मौखिक आश्वासन देती रहे, मगर एससी और गुर्जर वर्ग संख्या के आधार पर आरक्षण में हुई सेंधमारी को लेकर विरोध का मोर्चा मजबूत कर रहा है।
उधर, दलित शोषण मुक्ति मंच के आशीष का कहना है कि वह अभी ड्राफ्ट की इंतजार भी करेंगे। उन्होंने कहा कि वह इसका विरोध नहीं कर रहे हैं, मगर अधिकारों का संरक्षण भी जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि गुर्जर समुदाय और दलित शोषण मुक्ति मंच सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया जायेगा। आशीष का यह भी कहना है कि जिस उद्देश्य से ये किया था, इसमे ट्राइबल डेवलपमेंट प्लान का अतिरिक्त लाभ होगा परन्तु जिस तरीके से इसको करने की संभावना है उससे किसी भी प्रकार का ट्राइबल डेवलपमेंट प्लान नही मिलेगा। क्योंकि ये एरिया ट्राइब नही किया जा रहा है कम्युनिटी ट्राइब किया है।
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