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आखिर कैसे होगा एरियर के लिए 10 हजार करोड़ का प्रबंध

SAPNA THAKUR | 17 अगस्त 2022 at 10:19 am

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HNN/ नाहन

आजादी के 76वें वर्षगांठ पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सराहां से कर्मचारियों को खुश करने की बड़ी कोशिश की है। मुख्यमंत्री ने सरकारी कर्मचारियों तथा पेंशनर्स के लिए नए वेतनमान के एरियर की घोषणा की है। हालांकि, कर्मचारी वर्ग ओपीएस को लेकर अभी भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले बैठा है। बावजूद इसके पहले से ही भारी कर्ज में दबे प्रदेश सरकार ने एरियर की पहली किस्त देने की घोषणा कर कर्मचारियों को पशोपेश में डाल दिया है। घोषणा तो ठीक है मगर यह पहली किस्त कैसे दी जाएगी यह तय नहीं हो पाया है।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि ओपीएस बहाली उनकी पहली मांग है, जिस पर वह कायम है। कर्मचारी नेताओं का यह भी कहना है कि यदि सरकार को पूरा एरियर देना पड़ता है तो कम से कम उन्हें 10000 करोड रुपए का बंदोबस्त भी करना होगा। अब जिस प्रकार पहली किस्त के लिए 1000 करोड़ की घोषणा मुख्यमंत्री ने सराहां मैदान से की है वह केवल ऊंट के मुंह में जीरा ही साबित होगा। यानी कर्मचारियों और पेंशनर्स को सरकार केवल नए वेतनमान के दसवें हिस्से को ही दे पाएगी। सरकार ने इसे कैसे देना है इसको लेकर मंत्रिमंडल में इस पर चर्चा होनी बाकी है।

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जाहिर है, चर्चा के बाद ही अधिसूचना जारी हो पाएगी। चुनावी वर्ष भी चला हुआ है और बड़ी बात तो यह है कि जाते जाते लिए जाने वाले कुछ बड़े फैसले नुकसानदायक भी साबित हो जाते हैं। चूंकि 1 जनवरी 2016 के हिसाब से संशोधित वेतनमान और पेंशन दी जा रही है। ऐसे में एरियर भी इसी हिसाब से दिया जाना बनता है। जाहिर सी बात है आईआर और डीए को घटा कर यह एरियर दिया जाएगा। प्रदेश का कर्मचारी तथा पेंशनर वर्ग लगातार सरकार पर हमलावर है। सरकार के द्वारा कर्मचारियों को खुश करने के लिए एरियर की पहली किस्त देने की घोषणा की गई है।

बरहाल, एक तरफ प्रदेश में भाजपा का कमजोर नेतृत्व और ऊपर से सरकार पर कर्मचारी तथा पेंशनर्स का दबाव और महंगाई मिशन रिपीट में बड़ी खाई बनाते हुए नजर आते हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री की आम जनता में स्वच्छ और इमानदार नेता की छवि है मगर जहां मुख्यमंत्री के इस चेहरे को कैश किया जाना चाहिए वही जयराम मंत्रिमंडल के मंत्री अपनी-अपनी डफली अपना-अपना राग वह भी केंद्र सरकार के दम पर अलाप रहे हैं।

बरहाल, नेतृत्व की सुपर हाईकमान 20 तारीख को पांवटा साहिब और सिरमौर के दौरे पर आ रहे हैं। देखना यह होगा कि वह प्रत्याशियों के दमखम को आजमाने आ रहे हैं या फिर कोई बड़ी नीति को निर्धारित करने का अवसर तलाश रहे हैं।

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