HNN/ नाहन
हिमाचल प्रदेश में खनन माफिया लगातार माइनिंग अधिकारियों पर हमलावर होता जा रहा है। जान को जोखिम में डालकर माइनिंग अधिकारी जमीनी खजाने को बचाने में लगे हुए हैं। तो वही खनन माफिया खाली हाथ माइनिंग रोकने पहुंचे अधिकारी अथवा कर्मचारी पर भारी पड़ रहे हैं। हैरानी तो इस बात की है कि बीते कुछ वर्षों में अवैध माइनिंग रोकने वाले अधिकारियों पर दर्जनों हमले हो चुके हैं। पांवटा साहिब क्षेत्र में माफिया ने तमाम हदों को लांघते हुए माइनिंग इंस्पेक्टर का किडनैप ही कर लिया।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार बीते 1 वर्ष के अंदर 2 दर्जन से भी अधिक अटैक खनन माफियाओं के द्वारा किए जा चुके हैं। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार माइनिंग अधिकारियों के लिए सबसे खतरनाक स्थिति बॉर्डर एरिया में पड़ती है। जिसमें नालागढ़-बद्दी, सिरमौर तथा ऊना का जिला शामिल है। हालांकि जब माइनिंग विभाग को मिली सूचना के आधार पर अवैध खनन रोकने जाना होता है तो पुलिस सुरक्षा साथ लेते हैं।
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बावजूद इसके खनन माफिया ना केवल माइनिंग कर्मियों पर बल्कि पुलिस पर भी भारी पड़ जाते हैं। ऐसे में माइनिंग अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। खाली हाथ खनन माफियाओं से दो हाथ होना खनन अधिकारियों के लिए मौत को दावत देना साबित हो रहा है। चौंकाने वाली बात तो यह है कि माइनिंग अधिकारियों की सुरक्षा को लेकर सरकार की ओर से अभी तक कोई भी प्रयास नहीं किया गया है।
यही नहीं बॉर्डर एरिया में ड्यूटी देने वाले माइनिंग अधिकारी व माइनिंग इंस्पेक्टर किसी को भी वेपन लाइसेंस नहीं दिया गया है। अवैध माइनिंग माफिया के बढ़ते हौसलों के बाद अब माइनिंग अधिकारियों को आत्मरक्षा के लिए हथियार दिया जाना जरूरी हो गया है।
उधर, स्टेट जियोलॉजिस्ट संजीव शर्मा का कहना है कि अवैध माइनिंग रोकने के दौरान अधिकारियों पर गाड़ी चढ़ाने जैसी घटनाएं भी हुई हैं। अधिकारी को किडनैप किए जाने का मामला पांवटा साहिब में पहली बार हुआ है। उन्होंने बताया कि फिलहाल किसी भी माइनिंग अधिकारी के पास सेल्फ डिफेंस का कोई भी इंतजाम नहीं है।
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