अफीम की खेती का एक साथ ऐसे हो रहा भंडाफोड़, वजह कुछ खास….
HNN/ नाहन
जनपद सिरमौर में ही नहीं बल्कि इन दिनों सूबे में पुलिस अफीम की खेती का पर्दाफाश कर रही है। आए दिन विभिन्न जिलों की पुलिस खेती में संलिप्त लोगों को सलाखों के पीछे पहुंचा रही है। सवाल ये उठता है कि दो से तीन हफ्ते के भीतर अचानक ही अफीम की खेती के मामलों का पर्दाफाश कैसे हुआ।
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इसके पीछे भी वजह छिपी है। वजह तक पहुंचने से पहले ये जानना बेहद जरूरी है कि इसकी खेती कैसे और कब होती है। दरअसल, अफीम की खेती रबी की सीजन में यानी सर्दियों में की जाती है। इसकी फसल की बुवाई अक्टूबर-नवंबर महीने में होती है।
बुवाई से पहले जमीन को अच्छी तरह जोतना पड़ता है। इसके साथ ही खेत में पर्याप्त मात्रा में गोबर की खाद या वर्मी कंपोस्ट भी डालनी होती है, ताकि पौधों का अच्छे से विकास हो सके।
हर किसान खेतों में किसी भी फसल को अच्छे से उगाने और पैदावार में बढ़ोतरी के लिए गोबर की खाद का इस्तेमाल करता है। चाहे खरीफ की फसल की बुआई का समय हो अथवा रबी का। अच्छी पैदावार के लिए कई रासायनिक खादों का इस्तेमाल भी होता है। जहां तक रबी की फसल की बात है तो इस सीजन में गेहूं की पैदावार होती है।
पुलिस की जांच में ये बात भी सामने आई है कि जिन स्थानों पर अफीम की खेती का भंडाफोड़ हुआ है, वे खेत गेहूं के थे। इन खेतों में गेहूं के साथ ही कुछ लोगों ने अफीम की भी खेती की। जबकि, इसकी खेती करना अपराध है। हिमाचल में अभी किसी भी किसान को अफीम की खेती का लाइसेंस प्राप्त नहीं है।
खेत में गेहूं और अफीम एक साथ उगे। लिहाजा, शुरूआती दिनों में ये समझना मुश्किल है कि गेहूं के साथ खेत में दूसरी कौन से फसल लगी है। इन दिनों गेहूं की फसल पकने के तैयार है। ऐसे में गेहूं की फसल ने अपना रंग भी बदल दिया है। जबकि, अफीम की खेती अब अपने असल स्वरप में दिखने लगी है। ये फसल मई जून में तैयार होती है।
बस यही वजह है कि अफीम की खेती के मामले अब पकड़े जाने लगे हैं। गुप्त सूत्रों के माध्यम से पुलिस को जगह-जगह अफीम की खेती के मामले पकड़ने में आसानी हो रही है। अफीम के डोडे पर मई में कट लगना शुरू होता है। इससे पहले गेहूं की फसल पककर तैयार हो रही है। लिहाजा, एक के बाद एक मामले इस खेती के सामने आ रहे हैं।
अकेले जिला सिरमौर में पुलिस कई जगह इस खेती का पर्दाफाश कर चुकी है। नाहन के कंडयीवाला समेत माजरा के सैनवाला, जिला मुख्यालय नाहन के जाबल का बाग और श्री रेणुकाजी इलाके के लठियाना में भी पुलिस दबिश देकर इस खेती का पर्दाफाश कर चुकी है।
एसपी सिरमौर रमन कुमार मीणा ने बताया कि अफीम की खेती गेहूं की फसल के साथ की जा रही है। कई जगह पुलिस को इस अवैध खेती को नष्ट करने में सफलता मिली है। साथ ही आरोपियों के खिलाफ भी कार्यवाही जारी है।
उन्होंने बताया कि इस खेती के पकड़े जाने के पीछे यही वजह है कि गेहूं की फसल पकने के बाद अफीम के पौधे खेतों में साफ नजर आते हैं। इसको लेकर पुलिस कार्यवाही अमल में ला रही है।
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