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संसद शीतकालीन सत्र 2024 (Parliament Winter Session): हंगामे की आशंका, विपक्षी मुद्दे और सरकार की तैयारियाँ

हिमाचलनाउ डेस्क | 25 नवंबर 2024 at 9:05 am

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संसद शीतकालीन सत्र 2024 (Parliament Winter Session): हंगामे की आशंका और प्रमुख मुद्दे

संसद का शीतकालीन सत्र 2024 सोमवार से शुरू होने जा रहा है। इस सत्र के दौरान हंगामे की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि विपक्षी दलों ने कई विवादास्पद मुद्दों पर चर्चा की मांग की है। इनमें अदाणी समूह पर लगे रिश्वतखोरी के आरोप, मणिपुर हिंसा, प्रदूषण, और रेल दुर्घटनाओं जैसे गंभीर मुद्दे शामिल हैं। हालांकि, सरकार ने सभी राजनीतिक दलों से सदन को सुचारू रूप से चलाने की अपील की है। इस सत्र में कुल 16 विधेयकों को पेश किया जाएगा, जिनमें वक्फ संशोधन विधेयक भी शामिल है, जिसे लेकर विपक्षी दलों द्वारा विरोध किया जा रहा है।

संसद शीतकालीन सत्र

सर्वदलीय बैठक: मुद्दों पर एकजुटता और सरकार की अपील

रविवार को हुई सर्वदलीय बैठक में 30 पार्टियों के 42 नेताओं ने भाग लिया। इस बैठक में कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने अदाणी समूह पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों पर संसद में चर्चा की मांग की। कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि उनकी पार्टी चाहती है कि इस मुद्दे को सबसे पहले उठाया जाए, क्योंकि यह देश की आर्थिक और सुरक्षा स्थिति से जुड़ा एक गंभीर मामला है। इसके अलावा, विपक्षी दलों ने मणिपुर हिंसा, उत्तर भारत में बढ़ते प्रदूषण और हाल की रेल दुर्घटनाओं पर भी चर्चा की मांग की है।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सर्वदलीय बैठक के बाद कहा कि सरकार सभी दलों से संसद शीतकालीन सत्र को सुचारू रूप से चलाने के लिए सहयोग की उम्मीद करती है। उन्होंने यह भी कहा कि चर्चा के लिए सभी सुझावों को नोट किया गया है और सरकार चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सदन में कोई हंगामा न हो।

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वक्फ संशोधन विधेयक: विपक्षी दलों का विरोध और सरकार का रुख

इस संसद शीतकालीन सत्र में वक्फ संशोधन विधेयक पर भी विवाद होने की संभावना है। यह विधेयक मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में पेश किया गया था, और अब इसे शीतकालीन सत्र में पारित करने के लिए सूचीबद्ध किया गया है। विपक्षी दलों और मुस्लिम संगठनों ने इस विधेयक में प्रस्तावित कई संशोधनों का विरोध किया है। वे चाहते हैं कि संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का कार्यकाल बढ़ाया जाए, ताकि इस विधेयक का विस्तृत अध्ययन किया जा सके।

वहीं, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि समिति का कार्यकाल बढ़ाने का प्रावधान है, लेकिन इस पर अभी तक कोई चर्चा नहीं हुई है। इस बीच, विपक्षी दलों का आरोप है कि इस विधेयक को जल्दबाजी में पारित किया जा सकता है, जिससे समाज के कुछ वर्गों के हित प्रभावित हो सकते हैं।

अन्य प्रमुख विधेयक: 16 बिलों की सूची

संसद शीतकालीन सत्र में 16 विधेयकों को पेश करने की योजना है। इनमें से कुछ प्रमुख विधेयक इस प्रकार हैं:

  • वक्फ (संशोधन) विधेयक: यह विधेयक वक्फ बोर्डों के कामकाज को सुधारने और संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाने के लिए प्रस्तावित किया गया है।
  • पंजाब कोर्ट (संशोधन) विधेयक: यह विधेयक पंजाब राज्य की अदालतों में सुधार की दिशा में पेश किया गया है।
  • इंडियन पोर्ट्स बिल: इस विधेयक का उद्देश्य भारत के बंदरगाहों के प्रबंधन को बेहतर बनाना है।
  • मर्चेंट्स शिपिंग बिल: यह विधेयक भारतीय शिपिंग उद्योग को बढ़ावा देने और सुरक्षा मानकों को सुधारने के लिए है।
  • रेलवे (संशोधन) विधेयक: इसमें रेलवे के संचालन और सुरक्षा मानकों को सुधारने की कोशिश की जाएगी।
  • बैंकिंग लॉ (संशोधन) विधेयक: यह विधेयक भारतीय बैंकिंग प्रणाली को अधिक मजबूत बनाने के लिए प्रस्तावित किया गया है।

इसके अलावा, आगामी सत्र में देश में एक साथ चुनाव कराने के लिए एक प्रस्तावित विधेयक भी पेश किया जा सकता है, हालांकि यह वर्तमान सूची में शामिल नहीं है।

विपक्षी दलों का रुख और सरकार की रणनीति

विपक्षी दलों का कहना है कि इस सत्र के दौरान कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। इनमें सबसे प्रमुख मुद्दा अदाणी समूह के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप हैं। कांग्रेस ने सरकार से संसद में इस मुद्दे पर चर्चा की अनुमति देने की मांग की है, ताकि देश के नागरिकों को यह पता चल सके कि सरकार इस मामले में क्या कदम उठा रही है।

वहीं, सरकार का रुख यह है कि सभी विधेयकों पर चर्चा के लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सदन में कोई अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि शीतकालीन सत्र को सुचारू रूप से चलाने के लिए सभी दलों का सहयोग जरूरी है।

निष्कर्ष

संसद का शीतकालीन सत्र 2024 एक विवादित सत्र साबित हो सकता है, क्योंकि विपक्षी दलों ने कई गंभीर मुद्दों पर चर्चा की मांग की है। सरकार और विपक्ष दोनों के बीच तनाव के बावजूद, यह सत्र देश की राजनीति के लिए अहम साबित होने जा रहा है। अगर दोनों पक्षों के बीच संवाद और सहमति बनी रहती है, तो यह सत्र संसद के सुचारू रूप से चलने और विधायी कार्यों को आगे बढ़ाने में सहायक हो सकता है।

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