Himachalnow / नाहन
भारत ने हाल के वर्षों में शतरंज की दुनिया में अद्वितीय सफलता प्राप्त की है, और 2024 ने इस सफलता को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया। गुकेश की विश्व शतरंज चैंपियनशिप में ऐतिहासिक जीत से लेकर शतरंज ओलंपियाड में भारत के उत्कृष्ट प्रदर्शन तक, यह वर्ष भारत के लिए शतरंज के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित हुआ। इस सफलता का खाका खुद विश्वनाथन आनंद ने तैयार किया था, जिनकी शतरंज की दुनिया में भूमिका भारत के लिए अभूतपूर्व रही है।
गुकेश की ऐतिहासिक जीत: भारत के लिए नया शतरंज आइकन
2024 में 18 वर्षीय गुकेश डी ने शतरंज के इतिहास में सबसे युवा विश्व चैंपियन बनने का रिकॉर्ड स्थापित किया। उनका यह सफर फिडे कैंडिडेट्स टूर्नामेंट से शुरू हुआ, जहां उन्होंने सबसे युवा खिलाड़ी के रूप में यह टूर्नामेंट जीता और विश्व चैंपियनशिप के लिए जगह बनाई। इसके बाद, चीन के डिंग लिरेन को हराकर गुकेश ने 14 राउंड के खिताबी मुकाबले में ऐतिहासिक जीत हासिल की।
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गुकेश की जीत भारतीय शतरंज के लिए एक नई दिशा का प्रतीक है। इस जीत ने पूरे देश के दिलों में एक नई उम्मीद और गर्व का अहसास जगाया। इस सफलता में गुकेश के सहयोगी स्टाफ की भी अहम भूमिका रही, जिनमें विश्वनाथन आनंद और मशहूर मानसिक अनुकूलन कोच पैडी अपटन शामिल थे। गुकेश ने अपने देश की उम्मीदों का भरपूर सामना करते हुए यह खिताब जीता, और यह उनके अद्वितीय खेल कौशल और मानसिक दृढ़ता को दर्शाता है।
शतरंज ओलंपियाड 2024: भारत का ऐतिहासिक प्रदर्शन
गुकेश की जीत से पहले, सितंबर 2024 में बुडापेस्ट में हुए शतरंज ओलंपियाड में भारत ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया। भारतीय टीम ने टीम और व्यक्तिगत वर्ग में छह स्वर्ण पदक जीते। पुरुष टीम ने फाइनल में स्लोवेनिया को हराया, जबकि महिला टीम ने अज़रबैजान को मात दी। भारत एक ही ओलंपियाड में महिला और पुरुष दोनों वर्गों का खिताब जीतने वाला तीसरा देश बन गया, इससे पहले यह कारनामा केवल चीन और पूर्व सोवियत संघ ने किया था।
व्यक्तिगत वर्ग में भी भारत के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। गुकेश, अर्जुन एरिगैसी, दिव्या देशमुख और वंतिका अग्रवाल ने स्वर्ण पदक जीते, जो भारतीय शतरंज की नई पीढ़ी की ताकत को दर्शाता है।
भारतीय शतरंज के उभरते सितारे
2024 में भारतीय शतरंज ने कई और महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की। आर प्रज्ञानंद और आर वैशाली ने कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में खेलने वाले पहले भाई-बहन होने का गौरव प्राप्त किया। इसके अलावा, प्रज्ञानंद ने नॉर्वे शतरंज में दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को उनकी ही धरती पर क्लासिकल प्रारूप में हराकर एक और बड़ा कीर्तिमान स्थापित किया।
अर्जुन एरिगैसी ने 2800 ईएलओ रेटिंग अंक पार कर आनंद के बाद यह उपलब्धि हासिल की। वह इस समय कार्लसन (2831), फेबियानो कारूआना (2805) और हिकारू नकामूरा (2802) के बाद चौथे स्थान पर हैं। भारत इस समय फिडे टीम रैंकिंग में चौथे स्थान पर है, जो भारतीय शतरंज की ताकत को और अधिक मजबूती से स्थापित करता है।
भारत में शतरंज का भविष्य: नई उम्मीदें और चुनौतियाँ
भारत में कुल 64 ग्रैंडमास्टर हैं, जिनमें से अधिकांश 25 वर्ष से कम उम्र के हैं। यह दर्शाता है कि आने वाले वर्षों में भारत शतरंज की दुनिया में और भी ऊंचाइयों को छुएगा। आगामी वर्ष 2025 में भारतीय खिलाड़ी फ्रीस्टाइल शतरंज ग्रैंडस्लैम टूर, फिडे महिला जीपी, फिडे महिला विश्व कप और एशियाई चैंपियनशिप में चुनौती पेश करेंगे।
निष्कर्ष
2024 भारतीय शतरंज के इतिहास में एक निर्णायक वर्ष साबित हुआ। गुकेश की जीत, शतरंज ओलंपियाड में भारत की शानदार प्रदर्शन, और भारतीय शतरंज के उभरते सितारे यह सभी घटनाएँ दर्शाती हैं कि भारत अब शतरंज की दुनिया में एक महाशक्ति के रूप में उभरा है। यह केवल शुरुआत है, और भारतीय शतरंज के खेल में भविष्य में और भी कई सफलता की कहानियाँ लिखी जाएंगी।
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