HNN/ नाहन
18 जनवरी को नीलाम होने जा रही 6000 करोड़ के घोटाले वाली सिरमौर स्थित इंडियन टेक्नॉमैक की नीलामी पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। कंपनी पर 2008 से 2014 तक करीब 2175 करोड रुपए की वैट चोरी के आरोप लगे थे। जबकि सोलह सौ करोड से भी अधिक के लोन झूठे दस्तावेजों के साथ कई बैंकों से भी लिए गए थे। इसके साथ-साथ बिजली बोर्ड के बिल व अन्य विभागों की लायबिलिटीज के साथ करीब 6000 करोड़ का फर्जीवाड़ा तथा देनदारियां सामने आई थी।
राज्य कर एवं आबकारी विभाग की इकोनामिक इंटेलिजेंस यूनिट के द्वारा मामला उठाया गया था। जिसके बाद राज्य सीआईडी के द्वारा इसकी जांच भी की गई। मामला अभी भी माननीय अदालत में विचाराधीन चला हुआ है। बावजूद इसके 2175 करोड़ रुपए सरकार की टैक्स चोरी की रिकवरी के लिए इस वाइट एलीफैंट को 150 करोड रुपए में नीलाम किए जाने की तैयारी हो रही है। नीलामी की यह तारीख माननीय उच्च न्यायालय के द्वारा सुनिश्चित की गई है।
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मगर यहां बड़ा सवाल यह भी खड़ा हो रहा है कि जब यह घोटाला पकड़ा गया था तो उस समय कंपनी के मालिक राकेश शर्मा पर 2175 करोड़ रुपए का जुर्माना देय सुनिश्चित किया गया। जिसके बाद राकेश शर्मा अपील में गया। मगर अपील में भी उस पर 1000 करोड़ के आसपास का कंडीशनर अमाउंट लगाया गया।
सवाल यह उठता है कि यदि यह कंडीशनल अमाउंट 400-500 करोड़ के आसपास लगाया जाता तो कुछ अमाउंट के साथ टैक्स भी जमा होता रहता और करीब 3000 लोगों का रोजगार भी ना जाता। खुद को चारों तरफ से घिरता देख कंपनी का मालिक और उनकी टीम फरार हो गई। बता दे इस दौरान फैक्ट्री में इनकम टैक्स की भी रेड हुई थी। उसमें क्या हुआ था इसकी जानकारी हमें नहीं मिल पाई है मगर इनकम टैक्स की रेड हुई थी यह कंफर्म था।
अब सवाल यह भी उठता है कि 150 करोड रुपए में कुल लगे देनदारी के आरोप में सबसे ज्यादा लायबिलिटी बैंक की बनती है। सूत्रों का कहना है कि बैंक और इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड भी अपना हिस्सा मांग सकता है। अब यदि इन दोनों की लायबिलिटी के बाद राज्य कर एवं आबकारी विभाग यानी सरकार को 20 -25 करोड़ ही मिल पाए तो उसका क्या फायदा होगा। जबकि इतना तो वह सालाना टैक्स भी सरकार को दे रहा था।
उधर, इंडियन टेक्नॉमैक की नीलामी प्रक्रिया देखने वाले अधिकारी जीडी ठाकुर से उनके मोबाइल नंबर 86796 68 000 तथा 8 894230005 पर बात करनी चाही तो पहला नंबर 3 दिन से अंगेज टोन दे रहा है और दूसरा नंबर बंद दिखा रहा है। राज्य कर एवं आबकारी विभाग के आयुक्त युसूफ खान से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।
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