सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी है जिसमें अतिक्रमित वन भूमि पर सेब के पेड़ों की कटाई का निर्देश दिया गया था। किसानों ने इसे अपनी आजीविका और पर्यावरण के लिए खतरा बताते हुए चुनौती दी थी।
शिमला
किसानों का विरोध , शिमला में 29 जुलाई को प्रदर्शन
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हिमाचल किसान सभा और सेब उत्पादकों ने सरकार से बेदखली, घरों की तालाबंदी और तोड़फोड़ पर रोक लगाने की मांग की है। इस मुद्दे पर 29 जुलाई को शिमला में सचिवालय घेराव और विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। किसानों का कहना है कि सेब के बागान केवल अतिक्रमण का मामला नहीं हैं, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था और हजारों किसानों की आजीविका का आधार हैं।
याचिका में पर्यावरणीय और सामाजिक नुकसान का हवाला
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि हाईकोर्ट का आदेश मनमाना और पर्यावरणीय सिद्धांतों के विपरीत है। मानसून के दौरान बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई से हिमाचल में भूस्खलन और मिट्टी के कटाव का खतरा बढ़ जाएगा। याचिका में तर्क दिया गया है कि सेब के बाग मृदा स्थिरता में योगदान करते हैं, स्थानीय वन्यजीवों के लिए आवास प्रदान करते हैं और प्रदेश की पारिस्थितिकी व सामाजिक-आर्थिक संतुलन को बनाए रखते हैं।
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