डेढ़ करोड़ की पेनल्टी लग चुकी है दो नामी ज्वेलर्स पर, यह खेला जाता है खेल…….
HNN/ नाहन
त्योहारों के दौरान सोने और डायमंड आदि खरीदने से पहले बड़े-बड़े विज्ञापन और इनामी योजनाओं को चलाने वालों के पीछे एक बहुत बड़ा सच भी छुपा हुआ है। यहां यह भी बता दें कि यह मोटा खेल खेलने वाले नाहन के बड़े व्यवसायी पर करीब डेढ़ करोड रुपए का जुर्माना भी लगाया जा चुका है।
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सच तो यह भी है कि चाहे सोलन हो या सिरमौर यहां के कुछ बड़े नाम वाले ज्वेलर्स की दुकान पर एक भी समान नंबर दो का या बिना बिल का होता ही नहीं है। इन सुधारो के लिए शील्ड का काम करने वाले कंसलटेंट मोटी फीस की एवरेज में सरकार को कैसे चुना लगाया जाए और ग्राहकों को कैसे अपने जाल में फसाया जाए यह सारे फार्मूले भी सिखाए जाते हैं।
हमारे हाथ लगी कुछ महत्वपूर्ण जानकारी के तहत बड़े नाम वाले ज्वेलर्स से कुछ व्यक्तियों ने 90 टंच के हिसाब से सोने के आभूषण खरीदे। आभूषण विक्रेता ने ना तो उनसे लेबर ली और ना ही वेस्टेज ली। मगर एक ग्राहक ऐसा भी था जिसने 90 टंच की अंगूठी को जब मेल्ट करवाया तो वह 65 टंच की निकली।
यहां यह भी बता दें कि ऐसे खेल शक्ल देखकर और हैसियत देखकर खेले जाते हैं। यहां भी ऐसा ही हुआ 10 ग्राम सोने की मात्रा में 6 ग्राम ही शुद्धता थी जबकि गोल्ड स्मिथ के द्वारा 10 ग्राम के ही पैसे लिए गए। अब होता यह भी है कि यह बड़े सुनार अमूमन अमृतसर और भी कई जगह हैं जहां से सोना लेकर आते हैं।
यह रेडीमेड सोना लेकर आते हैं मगर बिल नहीं लेकर आते। 2 से 3 करोड़ तक का सोना आराम से कोट या पेट की जेब में रखकर लाया जा सकता है। अब यदि टैक्स की बात की जाए तो सरकार ने मात्र तीन पर्सेंट टैक्स सोने के ऊपर रखा हुआ है। यही नहीं यह आगे भी तीन पर्सेंट बचा लेते हैं और बिना बिल के सोना भी खरीद ले आते हैं।
कहा जा सकता है सीधे-सीधे 6 प्रतिशत बचाते हैं। तो वहीं ग्राहक को यह बिल भी देंगे और तीन प्लस तीन पर्सेंट टैक्स भी लेंगे। लुभावने प्रलोभन और बड़े-बड़े विज्ञापन तथा बड़े-बड़े कार्यक्रमों की स्पॉन्सरशिप देने वाला आभूषण विक्रेता यह कार्य स्टॉक में सोना रखकर करते हैं। हम पहले भी कह चुके हैं कि दुकान में एक भी आभूषण ना बिना बिल के होगा और नहीं आपके यहां बिना बिल के कोई चीज दी जाएगी।
चलिए उदाहरण के तौर पर समझते हैं कि सुंदर के पास मां का 15 किलो सोना है तो वह शो करेंगे कि यह 15 किलो सोना टैक्स पे करके रखा हुआ है। और अब यह जैसे ही अमृतसर या कहीं और गए तो वहां से गुड फेथ में 2 किलो सोना लेकर आते हैं और यह हो गया एक करोड़ का, यही नहीं इसमें 3 प्रतिशत का हिसाब भी लगा लो तो इसकी कीमत कितनी बनती है और यदि यह सोना सुंदर को देंगे तो उसे बिल नहीं देंगे और उसे सुंदर को दूसरा सुंदर यह कहता है कि जब हमें बिल नहीं मिला तो हम तुम्हें बिल कैसे देंगे।
मगर जब यह रिटेल में देंगे तो उसे यह अपने खाते से निकलकर बिल के साथ देंगे तो 3 प्रतिशत लेंगे भी। अब यदि मैं 100 ग्राम सोना लेकर जाता हूं तो गोल्ड समिति के द्वारा सरकार द्वारा बनाने का चार्ज 5 प्रतिशत रखा हुआ है। तो यहां भी यह खेल खेलते हुए सरकार को बताते हैं कि हमने 25 ग्राम ही बनाया जबकि 75 प्रतिशत को यह डकार जाते हैं। हमारी अगली कड़ी में बताएंगे कि डायमंड और सोने के साथ-साथ हॉलमार्क का क्या है खेल….
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