पूर्व ड्रग कंट्रोलर को एक्सटेंशन देने के लिए लड़ाए जा रहे हैं छक्के-पंजे
HNN/ नाहन
प्रदेश का ड्रग डिपार्टमेंट दो सप्ताह से भी अधिक समय से लावारिस पड़ा है। प्रदेश की ड्रग इंडस्ट्री के दर्जनों कार्य लंबित पड़ जाने से उद्योगों पर संकट के बादल मंडराने लगा पड़े हैं। बावजूद इसके प्रदेश सरकार काबिल अधिकारियों के होते हुए भी ड्रग कंट्रोलर की नियुक्ति नहीं कर पा रही है।
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सूत्रों की माने तो पूर्व ड्रग कंट्रोलर को सेवानिवृत्ति के बाद एक्सटेंशन देने को लेकर विभाग की एक बड़ी अधिकारी पूरा जोर लगा रही हैं। ऐसे में सरकार की व्यवस्था परिवर्तन पर बड़ा सवाल या निशान भी लग रहा है। जानकारी तो यह भी है कि एक्सटेंशन की कालिस में विभाग के मंत्री अपने हाथ काले नहीं करना चाहते हैं।
लिहाजा ड्रग कंट्रोलर की नियुक्ति की फाइल मुख्यमंत्री की टेबल पर धक्के खा रही है। हालांकि सूत्रों की माने तो मुख्यमंत्री खुद एक्सटेंशन की फेवर में नहीं है बावजूद इसके के विभाग के शीर्ष अधिकारी एक्सटेंशन को लेकर जुगतें भिड़ा रहे हैं। विभाग के पास मनीष कपूर जैसा तजुर्बेकार डिप्टी ड्रग कंट्रोलर है जबकि डिप्टी ड्रग कंट्रोलर पद के लिए पूर्व सरकार के द्वारा खुड्डे लाइन लगाए गया एक अधिकारी मुख्यालय में भी है।
सवाल यह उठता है कि दर्जनों अप्रूवल बहुत से लाइसेंस और अन्य बड़े कार्य लंबित पड़ गए हैं। बावजूद इसके 15 दिनों से भी अधिक समय से प्रदेश सरकार का ड्रग कंट्रोलर विभाग बगैर अधिकारी के चल रहा है। हालांकि मीडिया में पूर्व अधिकारी के खिलाफ बहुत से आरोप भी लगाए गए हैं। मगर यह आरोप कितने सही हैं यह तो अब जांच के बाद ही पता चल पाएगा।
माना यह भी जा रहा है कि माननीय उच्च न्यायालय के स्वत संज्ञान लिए जाने के बाद मामला काफी गंभीर भी हो गया है। जानकारी तो यह भी मिली है कि काला अंब के एक इंजेक्शन उद्योग के 14 के लगभग सैंपल फेल हो जाने के बावजूद फैक्ट्री पर दयानत दारी को लेकर सबूत भी जुटाए गए हैं। यही नहीं कुछ उद्योगपतियों ने कई गंभीर आपत्तिजनक आरोप भी लगाए हैं।
जानकारी तो यह भी है कि कुछ उद्योगपतियों के द्वारा ड्रग्स मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन के माध्यम से मुख्यमंत्री से मिलने को लेकर मेल के माध्यम से समय मांगा गया है। कुछ उद्योगपतियों का कहना है कि वह मुख्यमंत्री के समक्ष कुछ गंभीर सबूत भी रख सकते हैं।
ऐसे में अब यदि एक्सटेंशन दी जाती है तो सरकार की व्यवस्थाओं पर भी विपक्ष निशान साधने में कोई और कसर नहीं छोड़ेगा। सूत्रों की माने तो विपक्ष भी इस पूरे प्रकरण पर पैनी नजर बनाए बैठा है। उधर, स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल से बात करने की कोशिश की गई तो उनके पीए संजय के द्वारा फोन उठाया गया जिस पर यह जानकारी मिली कि मामला मुख्यमंत्री के संज्ञान में डाला गया है।
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