सुप्रीम कोर्ट की मॉनिटरिंग कमेटी को गई रिपोर्ट पर हुई संतुष्टि तो हर वर्ष होगी 30 करोड़ की इनकम
HNN / नाहन
हिमाचल प्रदेश सरकार के लिए वन वृत्त सिरमौर की ओर से कमाई के बड़े संकेत मिले हैं। वर्ष 2019 और 20 में माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई मॉनिटरिंग कमेटी द्वारा चिन्हित साल के जंगल में की गई ग्रीन फैलिंग से 37.68 करोड़ रुपए की आमदन हुई है। बता दें कि हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब से वेस्ट बंगाल होते हुए असम तक साल के जंगलों की बेल्ट है।
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हिमाचल को छोड़कर वेस्ट बंगाल और असम अपने जंगलों को तंदुरुस्त और हरा भरा रखने के लिए बगैर किसी प्रतिबंध के साल के पेड़ों की ग्रीन फैलिंग करता है। जिससे वहां की सरकार को करोड़ों रुपए की आमदनी होती है। बावजूद इसके हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब वन मंडल में इस कीमती संपदा का दोहन नहीं हो पाया है।
यही नहीं, ग्रीन फैलिंग ना होने के कारण जंगलों में साल के नए पेड़ पनप नहीं पा रहे थे। जिसको लेकर हिमाचल प्रदेश सरकार के द्वारा ग्रीन फैलिंग किए जाने को लेकर माननीय सुप्रीम कोर्ट में आवेदन किया गया था। वर्ष 2019 में माननीय सुप्रीम कोर्ट ने आवेदन को स्वीकार करते हुए अपनी ओर से एक मॉनिटरिंग कमेटी बनाकर हिमाचल प्रदेश को भेजी गई।
मॉनिटरिंग कमेटी को प्रदेश के वन विभाग के द्वारा जंगलों की स्थिति और नए पेड़ों के ना पनप पाने को लेकर वैज्ञानिक रूप से समझाया गया। जिस पर मॉनिटरिंग कमेटी के द्वारा तमाम दिए गए तथ्यों को आधार मानते हुए कुछ ऐसे पैच निर्धारित किए गए जहां ट्रायल के परिणाम माननीय सुप्रीम कोर्ट की प्रोसिडिंग में शामिल किया जा सके।
अच्छी बात तो यह रही कि पांवटा साहिब वन मंडल के तहत जिस जंगल को चिन्हित कर यह ट्रायल किया गया था वहां पर साल के नए पेड़ बेहतर व तंदुरुस्त रूप से पनपने शुरू हो गए हैं जिसे वन विभाग की ओर से बड़ा ही अच्छा संकेत माना जा रहा है। मजे की बात तो यह है कि जिस चिन्हित जंगल में ट्रायल किया गया था वहां की गई ग्रीन फैलिंग से वर्ष 2019-20 के दौरान सरकार को 37.68 करोड़ रुपयों का रेवेन्यू मिला है।
परिणामों को लेकर जहां प्रदेश का वन विभाग इसे बड़ी उम्मीद की किरण मान रहा है तो वही प्रदेश सरकार को भी अपनी वन संपदा से बगैर किसी नुक्सान अच्छी खासी आमदन होने की उम्मीद भी परवान चढ़ती नजर आने लग पड़ी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार अब यदि माननीय सुप्रीम कोर्ट इस रिपोर्ट पर अपनी संतुष्टि देते हुए ग्रीन फैलिंग की परमिशन दे देता है तो प्रदेश सरकार को ना केवल 2 वर्षों में बल्कि हर वर्ष 30 करोड़ रुपए की आमदन होना शुरू हो जाएगी।
उधर, जिला सिरमौर वन वृत्त का चार्ज देख रहे सोलन वन वृत्त के फॉरेस्ट कंजरवेटर ई. विक्रम ने खबर की पुष्टि करते हुए बताया कि माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई निगरानी कमेटी द्वारा चिन्हित पांवटा साहिब के जंगल से की गई ग्रीन फैलिंग में करोड़ों रुपए का रेवेन्यू प्रदेश को मिला है। उन्होंने कहा कि यदि माननीय सुप्रीम कोर्ट भेजी गई रिपोर्ट से संतुष्ट होता है और परमिशन ग्रांट हो जाती है तो इस वन मंडल में ग्रीन फैलिंग से 30 करोड़ की सालाना इनकम होगी।
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