मंत्री-विधायकों ने किया घटनास्थल का दौरा
पांवटा साहिब, 25 सितंबर।
यमुना नदी में डूबने से लापता हुए तीन युवकों में से दो का तीन दिन बीत जाने के बाद भी कोई सुराग नहीं मिल पाया है। गत मंगलवार को शिलाई क्षेत्र के ग्वाली गांव के तीन युवक यमुना में स्नान के दौरान नदी में डूब गए थे।
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बुधवार को एक लापता युवक का शव हरियाणा के कलेसर क्षेत्र से बरामद कर लिया गया था। लापता दोनों युवकों को तलाशने के लिए गुरुवार को भी दिन भर विशाल सर्च ऑपरेशन चलाया गया।
इस सघन अभियान में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, स्थानीय पुलिस और गोताखोरों की टीमों के साथ-साथ सेना के गोताखोरों को भी लगाया गया। सभी टीमों ने पूरे दिन लापता युवकों को ढूंढने का भरसक प्रयास किया, लेकिन सफलता हाथ नहीं लग पाई।
नेताओं ने लिया जायजा, सुरक्षा के दिए निर्देशगुरुवार को यह दुखद घटनाक्रम जानने के लिए क्षेत्र के कई बड़े नेताओं और अधिकारियों ने घटनास्थल का दौरा किया। उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कोंचबेली क्षेत्र में पहुंचकर सर्च ऑपरेशन का जायजा लिया और घटना पर गहरी संवेदना व्यक्त की।
उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि यमुना घाट पर होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए अब पूरे वर्ष गोताखोर तैनात करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही, चेतावनी बोर्ड लगाने और अन्य सुरक्षा इंतजाम करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि यमुना तट पर घाट के निर्माण के कार्य को जल्द ही शुरू करवाया जाएगा, ताकि वर्ष भर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।
इससे पहले, शिलाई क्षेत्र के पूर्व विधायक बलदेव तोमर भी यमुना घाट क्षेत्र पर पहुंचे और पीड़ित परिवारों तथा स्थानीय लोगों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की।
सामाजिक कार्यकर्ता ने सरकार-प्रशासन को घेराउधर, घटनास्थल पर पहुंचे सामाजिक कार्यकर्ता नाथूराम चौहान ने इस घटना के संबंध में सरकार और प्रशासन को जमकर खरीखोटी सुनाई।
उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि यमुना घाट पर हर साल हो रही दुर्घटनाओं के लिए सीधे तौर पर सरकार और प्रशासन जिम्मेदार है।नाथूराम चौहान ने बताया कि यमुना घाट के समीप दशकों पुराना उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बनाया जा रहा बियर बैराज का ढांचा खड़ा है।
इस ढांचे की नींव में गहरे और बड़े आकार के भंवर हैं, जिनमें फंसकर यमुना घाट पर आने वाले श्रद्धालु अपनी जान गंवाते हैं। उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि बीते दो दशकों में यहां 70 से अधिक जाने जा चुकी हैं, मगर सरकार और प्रशासन मूक दर्शक बने तमाशा देख रहे हैं।
फिलहाल, लापता युवकों की तलाश जारी है और पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया गया है।
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