HNN/नाहन
मुंबई की एक सच्ची घटना पर आधारित “जीवन” फिल्म 14 अप्रैल को रिलीज होने जा रही है। ड्राप्स ऑफ होप सोसायटी द्वारा निर्मित 14 मिनट की इस लघु फिल्म में किसी भी बीमार व्यक्ति के जीवन के लिए खून की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
समय रहते यदि किसी बीमार को रक्त मिले तो उसका जीवन बचाया जा सकता है। बीते माह जिला सिरमौर के पच्छाद इलाके के सराहां में इस फिल्म की शूटिंंग हुई। इसका ट्रेलर भी जारी हो चुका है। फिल्म का निर्देशन राजीव सोढा ने किया है।
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फिल्म में फरजाना सैयद , मनीष, राजकुमार, वैभव, नवीन ठाकुर और ऋषभ कलाकारों की भूमिका में नजर आएंगे। इस फिल्म में दिखाया गया है कि एक महिला के बीमार पति को खून की आवश्यकता है। एनीमिया से ग्रस्त पति के लिए उसकी पत्नी एबी निगेटिव खून का प्रबंध करने के लिए काफी चक्कर काटती है।
लेकिन खून न मिलने से महिला और उसका छोटा बेटा बेबस नजर आते हैं। इसी बीच किसी एक अनजान व्यक्ति के एबी निगेटिव ब्लड ग्रुप का पता चलने पर वह उससे भी मदद मांगती है, मगर उसने अपनी व्यस्तता के चलते खून देने से इंकार कर दिया। फिर क्या कुछ ही वक्त बाद महिला के बीमार पति की खून न मिलने से जान चली गई।
वक्ता बीता और फिर उस अनजान व्यक्ति के परिवार पर संकट आया। खून की जरूरत को लेकर उस व्यक्ति का हाल भी महिला जैसा ही था। एक दिन अचानक ही उस महिला से उसकी मुलाकात हुई और वह खून देने के लिए राजी हो गई। उस दिन अनजान व्यक्ति को पता चला कि खून की अहमियत क्या है?
महिला ने उस अनजान व्यक्ति के परिजन को अपना खून दिया और उसकी जान बच गई। निष्कर्ष यही है कि रक्तदान कितना आवश्यक है। इसकी कीमत सिर्फ रोगी जान सकता है या फिर उसके परिजन। इसका अंदाजा वोही लगा सकता है जिसके परिवार पर आन पड़ी हो। बता दें कि नाहन की ड्राप्स ऑफ होप सोसायटी अबतक 1,000 से अधिक यूनिट रक्तदान कर चुकी है।
पिछले 10 साल से कार्य कर रही इस सोसायटी के हजार से ज्यादा सक्रिय सदस्य हैं, जो किसी भी समय जरूरतमंद को खून देने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। इस सोसायटी के सदस्य न केवल सिरमौर बल्कि दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, हिमाचल के विभिन्न अस्पतालों में लोगों को रक्तदान कर चुके हैं।
खास बात ये भी है कि इस सोसायटी के सदस्य दुर्लभ खून की आवश्यकता वाले रोगियों को भी खून उपलब्ध करवा चुके हैं। सोसायटी में युवा वर्ग के लोग शामिल हैं, जिसमें सरकारी मुलाजिम (अधिकारी व कर्मचारी) भी हैं। पुलिस जवान भी कई बार खून दे चुके हैं।
उधर, ड्रॉप्स ऑफ सोसायटी के अध्यक्ष ईशान राव ने बताया कि सोसायटी की ओर से रक्तदान पर जागरूकता फ़िल्म बनाई गई है, जिसका नाम जीवन दिया गया है। इसमें हमारी कोशिश ये है कि रक्त की जरूरत के समय मरीज को समय पर रक्त मिले, ताकि उसका अनमोल जीवन बचाया जा सके।
ड्रॉप्स ऑफ होप सोसायटी 10 वर्षों से कार्य कर रही है, जिसको 2018 में व्हाट्सएप ग्रुप से जोड़ा गया। इनमें 1,000 से अधिक सदस्य हैं जिसमें महिला रक्तदाता भी शामिल हैं। फ़िल्म बनाना इसलिए जरूरी समझा कि लोग अपने मरीज को ही रक्त देने में तरह-तरह के बहाने बनाते हैं और रक्त के लिए अन्य लोगों पर निर्भर रहते हैं।
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