शिमला
बिजली बोर्ड और HRTC सबसे बड़े घाटे में, सरकार के लिए चुनौती बनी आर्थिक स्थिति
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में पेश की गई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की 2023-24 की रिपोर्ट ने राज्य सरकार के बोर्डों और निगमों की स्थिति को लेकर बड़ा खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, इन सार्वजनिक उपक्रमों का कुल घाटा ₹6454.47 करोड़ तक पहुंच चुका है, जिससे प्रदेश की वित्तीय सेहत पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
बिजली बोर्ड और परिवहन निगम की हालत सबसे खराब
रिपोर्ट के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश बिजली बोर्ड लिमिटेड का घाटा ₹3246.97 करोड़ दर्ज किया गया है। वहीं, हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) का घाटा ₹1966.13 करोड़ तक पहुंच गया है। लोकहित में सेवाएं देने और वित्तीय अनुशासन की कमी के चलते निगम लगातार आर्थिक दबाव में है, जिससे कई बार कर्मचारियों को वेतन देने में भी दिक्कत होती है।
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पावर कॉर्पोरेशन और अन्य उपक्रम भी घाटे में
रिपोर्ट में हिमाचल पावर कॉर्पोरेशन का घाटा ₹688.32 करोड़ बताया गया है। इसके अलावा, अन्य उपक्रमों में भी भारी नुकसान दर्ज हुआ है—वित्त निगम ₹180.97 करोड़, वन निगम ₹110.42 करोड़, एचपीएमसी ₹91.20 करोड़, पावर ट्रांसमिशन निगम ₹105.13 करोड़, पर्यटन विकास निगम ₹36.28 करोड़, हस्तशिल्प एवं हथकरघा निगम ₹12.42 करोड़ और एग्रो इंडस्ट्रीज निगम को ₹10.86 करोड़ का घाटा हुआ है।
प्रदेश सरकार के लिए बड़ी चुनौती
CAG रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि घाटे की मुख्य वजहें खराब प्रबंधन, कर्मचारियों की संख्या में अनियंत्रित बढ़ोतरी और वित्तीय अनुशासन की कमी हैं। यह स्थिति सीधे तौर पर राज्य की वित्तीय स्थिति पर दबाव डाल रही है। अब यह देखना अहम होगा कि प्रदेश सरकार इन घाटे में चल रहे संस्थानों को पुनर्जीवित करने के लिए क्या कदम उठाती है।
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