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भारत में अमृत है जल शक्ति विभाग सिरमौर का पानी, बेस्ट वाटर क्वालिटी का मिल चुका है अवार्ड 10

Ankita | 8 फ़रवरी 2023 at 9:39 pm

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10 महीनों में विभाग ने लिए 28436 वाटर सैंपल, नहीं मिला कोई भी खतरनाक बैक्टीरिया

HNN/ नाहन

जिला सिरमौर जल शक्ति विभाग की कुल 1405 वाटर स्कीमों का पानी ना केवल पूरी तरह से सुरक्षित है बल्कि इस पानी को अमृत का दर्जा भी मिल चुका है। 2022 में भारत सरकार के जल मंत्रालय के द्वारा सिरमौर को बेस्ट वॉटर क्वालिटी का प्राइस भी मिल चुका है। अब आपको यह भी बता दें कि जिला सिरमौर के लोग जिस पानी को जल शक्ति विभाग के माध्यम से पी रहे हैं वह बोतल में बंद पानी से भी कहीं ज्यादा मिनरल युक्त तथा स्वास्थ्यवर्धक माना जा चुका है।

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पानी लगातार सुरक्षित बना रहे इसको लेकर जिला सिरमौर जल शक्ति विभाग चौबीसों घंटे उपलब्ध कराए जा रहे पानी पर नजर बनाए रखता है। यही नहीं जिला मुख्यालय स्थित जो पानी की टेस्टिंग लैब है वह एनएबीएल के द्वारा मान्यता प्राप्त भी है। सरकार के द्वारा लोगों को हर तरह से सुरक्षित पानी मिले इसको लेकर जिला में आईपीएच विभाग के चारों डिवीजन में पांच हाईटेक लैब बनाई जा चुकी है।

जिसमें नाहन नोहराधार पांवटा साहिब के माजरा में शिलाई तथा राजगढ़ शामिल है। राजगढ़ में बनाई गई वाटर टेस्टिंग लैब का निर्माण कार्य लगभग अब समाप्ति की ओर है। मगर इस डिवीजन के अंतर्गत भी विभाग के द्वारा तयशुदा समय के शेड्यूल के अनुसार वाटर टेस्टिंग लगातार की जाती है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला की अधिकतर वाटर स्कीम के पानी की टेस्टिंग या तो गर्मियों के शुरू होते ही की जाती है या फिर मानसून के दौरान। इसकी बड़ी वजह इन दोनों मौसमों के दौरान पानी में बैक्टीरिया पनपने का ज्यादा खतरा रहता है। मगर विभाग के द्वारा इसको लेकर भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जाती है। जल शक्ति विभाग के द्वारा ना केवल एसटीके यानी फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से पानी की टेस्टिंग की जाती है बल्कि हाईटेक लैब में भी उच्च कोटि के उपकरणों के साथ वाटर टेस्टिंग की जाती है।

अब आप यह जानकर भी हैरान हो जाएंगे की बोतलबंद पानी जिसे लोग 20 रुपए में पीते हैं उस पानी में मिनरल्स अलग से ऐड किए जाते हैं। जबकि विभाग के द्वारा जो पानी पब्लिक को प्रोवाइड कराया जा रहा है उसमें प्राकृतिक रूप से बैलेंस मिनरल्स पहले से ही मिले हुए हैं। लैब से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार जनता को उपलब्ध कराया जा रहा पानी की नेफ्लोमेट्रिक है वह 1 से 5 के बीच में है।

जबकि बोतल में बंद पानी की टर्बीडीटि एक से कम होती है। जाहिर है जब उसमें मिनरल्स ही नहीं होंगे तो यह पैरामीटर एक से कम ही होगा। यहां यह भी जान लेना जरूरी है कि जिला सिरमौर के धौला कुआं में भारत का सबसे उच्च कोटि की गुणवत्ता वाला पानी हिमालयन वॉटर भी टाटा कंपनी बना रही है। इस पानी की 1 लीटर की बोतल लगभग 60 रुपए की मार्केट में मिलती है।

जबकि यह पानी पूरी तरह से ग्राउंड वाटर है और इसमें नेचुरल मिनरल्स मिले हुए हैं। अब जहां बोतल में बंद 60 रुपए का पानी टाटा कंपनी पिला रही है तो वही शहरी क्षेत्र में बहुत ही कम पैसे और ग्रामीण क्षेत्र में नि:शुल्क रूप से प्रदेश का जल शक्ति विभाग इसी पानी को पिला रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला सिरमौर में सबसे सुरक्षित पानी पांवटा साहिब क्षेत्र का है।

यह वह पानी है जो ग्राउंड लेवल से उठाया जाता है। इसके अलावा नाहन को अधिकतर पानी गिरी नदी से उपलब्ध कराया जाता है। मगर इस पानी को बरसात और गर्मियों के दौरान टेस्ट करना जरूरी होता है। विभाग के अनुसार सबसे ज्यादा सुरक्षित पानी ग्राउंड लेवल का ही माना जाता है। जिला सिरमौर में जहां ग्राउंड लेवल का पानी बेहतर स्थिति में है तो वही स्प्रिंग होस्टेस, सरफेस सोर्स के पानी को जल शक्ति विभाग जनता को पिला रहा है।

अब जहां विभाग के द्वारा हाईटेक लैब में पानी की टेस्टिंग की जाती है तो वही ग्रामीण स्तर पर ब्लॉक रिसोर्स को ऑर्डिनेटर के माध्यम से फील्ड टेस्टिंग किट के द्वारा बावड़ी प्राकृतिक चश्मे आदि के पानी को भी टेस्ट किया जाता है। ऐसा इसलिए भी किया जाता है क्योंकि अधिकतर ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे-छोटे लोकल वाटर रिसोर्स रहते हैं।

इसमें सबसे अच्छी बात तो यह है कि जिला के साथ ब्लॉक में 6 बीआरसी अपने-अपने क्षेत्र की हर पंचायत की पांच-पांच महिलाओं का ग्रुप बनाकर वाटर टेस्टिंग करती हैं। यह महिलाएं फील्ड टेस्टिंग किट से जहां पानी को टेस्ट करती हैं वही कुछ पानी के सैंपल मुख्यालय की लैब में भी पूर्ण संतुष्टि के लिए भेजे जाते हैं।

कुल मिलाकर कहा जाए तो जिला सिरमौर जल शक्ति विभाग के द्वारा जो पानी जनता को अपनी स्कीमों के माध्यम से उपलब्ध कराया जा रहा है वह पूरी तरह से सुरक्षित है। हालांकि हाल ही में सराहा तथा नाहन की खजूरना स्कीम में बैक्टीरिया पाया गया था मगर जैसे ही विभाग को इसकी जानकारी मिली उनके द्वारा दोनों स्कीम को बंद कर अल्टरनेट पेयजल आपूर्ति की जा रही है।

अच्छी बात तो यह है कि जो लैब में 10 महीने के अंदर 18136 बैक्टीरियल टेस्ट किए गए थे और जो फील्ड टेस्टिंग किट से 12300 सैंपल लिए गए थे वह सभी पूरी तरह सुरक्षित मिले। विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार यहां के पानी में जितने भी मिनरल्स हैं वह सभी बैलेंस अनुपात में है।

कुछ वाटर स्कीम का पानी हार्ड जरूर है मगर वह भी सीमित दायरे में है। उधर, आईपीएच विभाग के एससी विशाल जसवाल ने खबर की पुष्टि करते हुए बताया कि जिला सिरमौर का पानी पूरी तरह से सुरक्षित और मिनरल युक्त है।

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