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फिनाइल व ब्लैक जापान को प्रदेश सहित देश में पहचान दिलाने वाले संजय शर्मा सेवानिवृत्त

Ankita | 1 मार्च 2023 at 10:32 am

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27 साल बिरोजा फैक्ट्री नाहन में बतौर चीफ केमिस्ट की दी सेवाएं

HNN/ नाहन

ऐतिहासिक धरोहर माने जाने वाली प्रदेश की सबसे पुरानी और पहेली तारपीन फैक्ट्री के चीफ केमिस्ट संजय शर्मा सेवानिवृत्त हो गए हैं। करीब 27 साल इस सरकारी उपक्रम को अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं देने वाले संजय शर्मा केमिस्ट के साथ-साथ फैक्ट्री मैनेजर भी थे। उनकी सेवानिवृत्ति पर फैक्ट्री के तमाम कर्मचारियों और अधिकारियों के द्वारा उन्हें भावभीनी विदाई दी गई। वहीं फैक्ट्री के अधिकारियों ने बताया कि इस कारखाने के इतिहास में बेहतर सेवाएं देने के लिए संजय शर्मा का नाम हमेशा याद रखा जाएगा।

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गौरतलब हो कि नाहन स्थित बिरोजा एंव तारपीन फैक्ट्री प्रदेश सहित देश में एक बेहतर क्वालिटी के तारपीन तेल सहित फिनाइल और ब्लैक जापान के लिए जानी जाती है और इससे भी बड़ी बात तो यह है कि इस कारखाने में तैयार होने वाले इन प्रोडक्ट्स को पहचान दिलाने में संजय शर्मा का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। कारखाने की लैब में घंटो-घंटो यहां तक कि देर रात तक भी बैठकर संजय शर्मा बिरोजा से बेहतर क्वालिटी निकालने को लेकर प्रयास किया करते थे।

संजय शर्मा ना केबल लेबोरेटरी के इंचार्ज थे बल्कि वे फैक्ट्री के ऑफिशियल कार्य भी बखूबी संभालते थे। फैक्ट्री से ही सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारी व कर्मचारी नेता निर्भय सिंह कंवर ने बताया कि संजय शर्मा एक बेहतर कर्मचारी रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज अगर फैक्ट्री का नाम बेहतर तारपीन प्रोडक्ट के लिए जाना जाता है तो उसके पीछे संजय शर्मा का नाम प्रमुखता से आता है। उन्होंने कहा कि विभाग के अन्य कर्मचारियों को भी संजय शर्मा जैसे ईमानदार व कर्तव्यनिष्ठ कर्मचारी से शिक्षा लेनी चाहिए।

बता दें कि संजय शर्मा यूं तो बिलासपुर जिला से संबंध रखते हैं मगर अब उनका नाता सिरमौर नाहन से जुड़ गया है। 27 साल नगीना कहलाने वाले शहर को देने के बाद अब उन्होंने अपना आगे का जीवन भी नाहन में ही बिताने की ठान ली है। एक बेटी और पत्नी के साथ वे अब नाहन में ही रहेंगे। संजय शर्मा की प्रारंभिक शिक्षा हमीरपुर के सीनियर सेकेंडरी स्कूल से हुई है। तथा उन्होंने हायर एजुकेशन गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज बिलासपुर से ली है।

संजय शर्मा ने अपनी नौकरी की प्रथम पारी 1 नवंबर 1996 को बिलासपुर फॉरेस्ट कॉरपोरेशन से शुरू की थी। जिसके बाद उन्हें ट्रांसफर कर 30 जनवरी 1997 को नाहन भेज दिया गया था। तब से लेकर आज तक उन्होंने नाहन के जड़जा स्थित बिरोजा फैक्ट्री में अपनी नौकरी का पूरा कार्यकाल गुजारा। खट्टे मीठे अनुभवों के साथ संजय शर्मा का कहना है कि यह बिरोजा फैक्ट्री ना केवल कारखाना है बल्कि यह एक बहुमूल्य ऐतिहासिक धरोहर है।

उन्होंने अपने साथी कर्मचारियों से कामना करते हुए कहा कि यह कारखाना सदियों सदियों तक चलता रहे इसके लिए वे हमेशा मेहनत लगन और ईमानदारी के साथ कार्य करते रहें।

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