प्रयागराज माघ मेले के दौरान शंकराचार्य के काफिले को रोके जाने और स्नान से वंचित किए जाने को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। धीरेंद्र प्रताप ने इस घटना को आस्था का अपमान बताते हुए निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।
देहरादून
उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष, प्रवक्ता और पूर्व कैबिनेट मंत्री धीरेंद्र प्रताप ने माघ मेले के दौरान प्रयागराज में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के काफिले को रोके जाने और उन्हें अमावस्या के स्नान से वंचित किए जाने को शंकराचार्य का अपमान बताया।
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धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि यह घटना न केवल धर्म और आस्था के दृष्टिकोण से अस्वीकार्य है, बल्कि प्रशासन की लापरवाही को भी उजागर करती है। उन्होंने योगी प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस घटना की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि न केवल शंकराचार्य के काफिले को रोका गया, बल्कि उनके साथ चल रहे साधु-संतों के साथ मारपीट भी हुई। इस घटना से आहत होकर शंकराचार्य धरने पर बैठ गए और अंततः दुखी होकर स्नान का बहिष्कार करना पड़ा।
धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य हिंदू धर्म के सर्वोच्च संतों में से एक हैं और ऐसे में उनका अपमान अत्यंत दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी स्वयं को हिंदुओं का संरक्षक बताती है, जबकि उनके सर्वोच्च संतों का सार्वजनिक अपमान किया जा रहा है।
उन्होंने भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत से भी इस मामले में स्पष्टीकरण देने की मांग की। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्मावलंबियों में इस घटना को लेकर भारी रोष है और योगी प्रशासन को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
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