148 मीटर हाइट वाले रॉकफिल श्री रेणुका डैम में लगेगी 33.147 लाख क्यूबिक मीटर क्ले और….
HNN / श्री रेणुका जी
बहुउद्देशीय योजना के तहत बनने जा रहा श्री रेणुका जी डैम प्रदेश के लिए सोने की चिड़िया साबित होगा। बांध निर्माण की टेक्निकल डीपीआर के मुताबिक इसमें लाखों क्यूबिक मीटर खनिज संपदा का इस्तेमाल होगा। लगाए गए मोटे अनुमान के अनुसार इस्तेमाल होने वाले अलग-अलग खनिजों से प्रदेश सरकार को करीब 200 करोड़ से अधिक की रॉयल्टी भी प्राप्त होगी। यही नहीं रॉक फिल टाइप बांध की दीवार में इस्तेमाल होने वाली मिट्टी से स्थानीय किसान भी करोड़पति बन जाएंगे।
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कैसी होगी बांध की मुख्य दीवार
श्री रेणुका जी बांध की रिवर बेड से ऊंचाई 148 मीटर रखी गई है। जबकि इस बांध की जॉब हार्ड रॉक तक गहराई 32 मीटर के लगभग आंकी गई है। करीब 24 किलोमीटर लंबी बनने वाली झील को रोकने के लिए जो बांध की दीवार की चौड़ाई 844.5 मीटर नीचे से रखी जाएगी, जिसकी टॉप विडथ 12 मीटर होगी। यानी 1 किलोमीटर के लगभग मोटाई वाला यह बांध सुरक्षा के नजरिए से काफी मजबूत माना जाएगा।

बांध की मजबूती में क्या होगा इस्तेमाल
श्री रेणुका जी बांध के निर्माण में लाखों क्यूबिक मीटर अलग अलग तरह का मिनरल (खनिज) इस्तेमाल किया जाएगा। रॉक् फिल टाइप इस बांध में इंप्रेस मेटेरियल यानी क्ले (मिट्टी) लगभग 33.147 लाख क्यूबिक मीटर तथा परम इस मटेरियल में फिल्टर मटेरियल (रेत) की मात्रा 15.40 लाख क्यूबिक मीटर अनुमानित की गई है। डैम की मजबूती को बनाए रखने के लिए इस मटेरियल के अलावा रिप-रैप मटेरियल यानी मोटे-मोटे बोल्डर की अनुमानित मात्रा 13.698 लाख क्यूबिक मीटर है।
यह बॉर्डर्स बाहर की ओर से डैम को सुरक्षा कवच की तरह मजबूती देंगे। इस प्रकार एग्रीगेट मटेरियल में रेत और बजरी आती है। इस बांध की दीवार के मजबूत निर्माण में 2 लाख क्यूबिक मीटर एग्रीगेट यानी रेत और बजरी और फाइन एग्रीगेट मटेरियल 3 लाख क्यूबिक मीटर लगाया जाना अनुमानित है। लगभग 5 लाख क्यूबिक मीटर कुल मटेरियल डैम के निर्माण में लगने की संभावना है। ऐसे में प्रदेश उद्योग विभाग के जियोलॉजिकल विंग यानी माइनिंग डिपार्टमेंट को एक मोटे राजस्व की भी उम्मीद बन गई है।
अब आपको यह भी बता दें कि जो मिट्टी यानी क्ले डैम निर्माण में इस्तेमाल होगी उसकी लॉयल्टी 60 रूपये प्रति टन के हिसाब से वसूली जाएगी। माइनिंग डिपार्टमेंट बजरी पर 80 रूपये प्रति टन रॉयल्टी लेता है जबकि अन्य जैसे रेत और गोल्डर्स पर 100 और 80 रूपये प्रति टन रॉयल्टी लेता है। इस प्रकार यदि मोटा मोटा अनुमान लगाया जाए तो इस डैम के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले अलग-अलग खनिजों से प्रदेश के खनन विभाग को 200 करोड़ से अधिक की रॉयल्टी प्राप्त होने की पूरी संभावना है।
उधर, राज्य भू-वैज्ञानिक माइनिंग डिपार्टमेंट पुनीत गुलेरिया का कहना है कि अगर राज्य को हर वर्ष डैम के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले खनिज से 25-30 करोड़ पर भी मिलता है तो यह भी बड़ी बात होगी। उन्होंने कहा कि जो अनुमानित रॉयल्टी बताई जा रही है वह एक साथ नहीं मिल सकती मगर जितना खनिज डैम निर्माण में लगेगा उसकी रॉयल्टी भी अच्छी प्राप्त होगी। उधर, एमडी एचपीपीसीएल अजय शर्मा ने बताया कि वह अभी विधानसभा के लिए जा रहे हैं। बावजूद इसके उन्होंने रेणुका डैम के टेक्निकल डाटा की पुष्टि करते हुए कहा कि सीडब्ल्यूसी के विजिट के बाद ड्राइंग में कुछ सुधार भी हो सकते हैं।
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