लेटेस्ट हिमाचल प्रदेश न्यूज़ हेडलाइंस

प्रदेश में फिर से टाइगर को लेकर दुनिया के मानचित्र पर होगा हिमाचल

SAPNA THAKUR | 27 फ़रवरी 2022 at 4:26 pm

Share On WhatsApp Share On Facebook Share On Twitter

HNN/ नाहन

आजादी के बाद प्रदेश सरकार का यह सबसे बड़ा प्रयास होगा कि हिमाचल प्रदेश में फिर से टाइगर की दहाड़ सुनाई दे। हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिला से ताल्लुक रखने वाले रामनी गांव के डॉ. हिम्मत सिंह नेगी ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि सिरमौर में टाइगर रिजर्व की अपार संभावनाएं हैं।

कौन है डॉ. हिम्मत सिंह नेगी
डॉ. हिम्मत सिंह नेगी को ना केवल देश में बल्कि पूरी दुनिया में टाइगर कंजर्वेशन में बड़ी उपलब्धि के लिए जाना जाता है। बताना जरूरी है कि पूरी दुनिया में केवल 13 देश ही ऐसे हैं जो यह क्लेम करते हैं कि उनके यहां टाइगर है। अब आप यह भी जानकर हैरान हो जाएंगे कि भारत देश उन 13 देशों में 70 फीसदी दुर्लभ टाइगर वाला देश माना गया है और बड़ी बात तो यह है कि दुनिया की सबसे बड़ी फ्री रेंज फॉर टाइगर भी केवल भारत में ही है। इस बड़ी उपलब्धि के लिए हिम्मत सिंह नेगी को टाइगर युक्त 13 कंट्री में टाइगर मैन के नाम से जाना जाता है।

हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें: Join WhatsApp Group

डॉ. हिम्मत सिंह नेगी मध्य प्रदेश के प्रधान मुख्य वन्यजीव संरक्षक है। जबकि इससे पहले नेगी आईजी नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी गवर्नमेंट ऑफ इंडिया मिनिस्ट्री ऑफ एनवायरमेंट एंड क्लाइमेट रेंज में रह चुके हैं। हालांकि, 28 फरवरी को वे मध्य प्रदेश वन विभाग से सेवानिवृत्त हो रहे हैं। बावजूद इसके दुनिया भर में टाइगर पर किए गए उनके शोध को लेकर उन्हें ग्लोबल टाइगर फोरम जो कि एक अंतरराष्ट्रीय ऑर्गनाइजेशन है उसमें एडवाइजर नियुक्त कर लिया गया है। नेगी 1988 बैच के आईएफएस है। जिन्होंने बीएससी साइंस नाहन से की है।

उनका पूरा सर्विस काल बाघ संरक्षण पर बीता है। उन्हीं के प्रयासों से आज देश को फॉरेस्ट टूरिज्म से हर वर्ष करोड़ों रुपए की आय भी हो रही है। तो वही हिमाचल प्रदेश से लुप्त हो चुकी टाइगर प्रजाति को फिर से स्थापित करने को लेकर एक बड़ी उम्मीद की किरण नजर आ रही है। अब यदि सिरमौर के सेंचुरी एरिया में टाइगर फिर से लाया जाता है तो प्रदेश की जीडीपी में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज हो सकती है। गौरतलब हो कि हिमाचल प्रदेश जिला सिरमौर के सिंबल वाड़ा सेंचुरी कंगनी वाला रिजर्व फॉरेस्ट तथा श्री रेणुका जी के जंगलों में सैकड़ों की तादाद में टाइगर हुआ करते थे।

स्टेट टाइम में शौक के लिए किए गए टाइगर के शिकार के बाद हिमाचल से यह प्रजाति विलुप्त प्राय हो चुकी थी। अंग्रेजी हुकूमत के दौरान इंडिया के वॉइस राय सिरमौर में केवल इसलिए आए थे कि यहां पर टाइगर का शिकार किया जाए। इस बाबत जानकारी देते हुए सिरमौर रियासत के परिवार से जुड़े कंवर अभय सिंह बहादुर ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि कुछ दिनों पहले कंगनी वाला फॉरेस्ट रेंज में मादा टाइगर को तीन बच्चों के साथ देखा गया।

उन्होंने बताया कि 1940 के आसपास नाहन शहर के रामाधौन, जूड्डा के जोहड़, सिंबल वाड़ा, कोलर आदि के जंगलों में टाइगर विचरण किया करते थे। मगर तब इनकी संख्या काफी कम हो चुकी थी। उन्होंने खुलासा किया कि आजादी के बाद इन क्षेत्रों के जंगलों से पुराने सालवा शीशम आदि के जंगलों का बड़े स्तर पर कटान किया गया। यही नहीं टाइगर का मनपसंद भोजन माने जाने वाला सांभर, चीतल, हिरण आदि का बड़े स्तर पर शिकार हुआ। जिसके चलते इन्हें व्यापक भोजन ना मिलने के कारण यह प्रजाति यहां से पलायन कर गई।

बता दें कि प्रदेश के पड़ोसी राज्य उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क में आज भी टाइगर सुरक्षित हैं। जिस प्रकार उत्तराखंड से हाथी हिमाचल की सिंबल वाड़ा रेंज में आते-जाते रहते हैं उन्हीं के चलते मादा टाइगर भी यहां पहुंची थी। हालांकि, वाइल्ड लाइफ के पास इसका रिकॉर्ड नहीं है मगर इसकी पुष्टि कंवर अभय बहादुर द्वारा की गई है। अंतरराष्ट्रीय ग्लोबल टाइगर फोरम के सदस्य हिम्मत सिंह नेगी ने बताया कि अगर सिरमौर से टाइगर विलुप्त हुआ है तो उसे फिर से यहां लाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए फिर से वैसा ही माहौल तैयार करना होगा।

साथ ही सिंबल वाड़ा सेंचुरी कंगनी वाला फॉरेस्ट रेंज तथा रेणुका जी वेटलैंड आदि को जोड़कर टाइगर रिजर्व पर कार्य किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि यह प्रदेश के लिए एक बड़ी उपलब्धि भी होगी। टाइगर रिजर्व बनने के बाद फॉरेस्ट टूरिज्म मे भी अप्रत्याशित वृद्धि होगी। जिसमें ना केवल देश के बल्कि विदेशी पर्यटक भी पहुंचेंगे। यहां यह भी जान लेना जरूरी है कि अगर प्रदेश में टाइगर रिजर्व बनाया जाता है तो भारत सरकार से इसके लिए बड़ी फंडिंग भी की जाती है।

यही नहीं जिस जगह टाइगर रिजर्व के लिए एक्सटेंशन की जाएगी उस क्षेत्र से विस्थापित किए जाने वाले लोगों को भी लाखों रुपए का मुआवजा दिया जाता है। वही हिमाचल प्रदेश वाइल्डलाइफ के पीसीसीएफ राजीव कुमार का कहना है कि यह प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि होगी। टाइगर रिजर्व के लिए प्रयास किए जा सकते हैं।

उधर जिला सिरमौर से ताल्लुक रखने वाले ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी ने कहा कि यह बहुत बड़ी उपलब्धि होगी निश्चित ही प्रदेश सरकार टाइगर रिजर्व को लेकर प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि पीसीसीएफ हिमाचल प्रदेश वाइल्ड लाइफ और अंतरराष्ट्रीय ग्लोबल टाइगर फोरम के सदस्य हिम्मत सिंह नेगी से टाइगर रिजर्व को लेकर संभावनाओं पर योजना बनाए जाने पर प्रयास किए जाएंगे।

हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें

ताज़ा खबरों और अपडेट्स के लिए अभी हमारे WhatsApp ग्रुप का हिस्सा बनें!

Join WhatsApp Group

आपकी राय, हमारी शक्ति!
इस खबर पर आपकी प्रतिक्रिया साझा करें


[web_stories title="false" view="grid", circle_size="20", number_of_stories= "7"]