उपचुनाव में बागियों को टिकट देना लगभग असंभव.. दिया तो बगावत की संभावनाएं
HNN/ नाहन
2027 की चुनावी पिच के लिए भाजपा के द्वारा बीजा गया बगावती बीज जीत के स्कोर बोर्ड पर अभी से प्रत्यक्ष नजर आना शुरू हो चुका है। यही नहीं प्रदेश में भाजपा के चाणक्य माने जाने वाले नेता के चंगुल में फंसे कांग्रेस के बागी विधायकों की बड़े ही अनोखे अंदाज में पॉलिटिकल डेथ भी लिखी जा चुकी है। इस प्रकरण में जहां भाजपा के चाणक्य ने अपने किरदार को फिर से श्रेष्ठ घोषित करवाया है तो वहीं उन्होंने भाजपा के दूसरे मजबूत गुट में भी कहीं ना कहीं सेंधमारी की है।
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असल में 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा सरकार की हार पार्टी के राष्ट्रीय शीर्ष नेतृत्व को टीस बनाकर लगातार चुभ रही थी। यहां यह भी मान लेना जरूरी है कि पार्टी शीर्ष नेतृत्व अब प्रदेश में अपने लिए नहीं बल्कि अपने यशस्वी पुत्र का राजनीतिक भविष्य भी मजबूत करना चाह रहे हैं। जाहिर है शीर्ष नेतृत्व परिवारवाद को विराम लगाने के लिए खुद प्रदेश के राजनीतिक मैदान में कभी नहीं उतरेंगे।
ऐसी परिस्थितियों में राजनीतिक ताना-बाना प्रदेश भाजपा के संगठन प्रमुख के द्वारा अपना कद साबित करते हुए एक तीर से कई निशाने साध दिए हैं। हालांकि प्रदेश में संगठन की अब पहले जैसी मजबूत स्थिति नहीं है। बावजूद इसके भाजपा से बगावत कर चुके मौजूदा कांग्रेसी विधायक राजेंद्र राणा के कंधे पर बंदूक रखकर कांग्रेस के 6 विधायकों को पूरी तरह से डेड कर दिया है। जाहिर सी बात है भाजपा इन्हें किसी भी सूरत में उपचुनाव में टिकट देने की मंशा नहीं रखेगी।
भाजपा हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में इसका परिणाम भी भुगत चुकी है। कांग्रेस से टूटकर आने वाले विधायक अथवा दिग्गज केवल खुले मंच पर हाल और फूल-मालाओं तक ही सीमित रह जाएंगे। भाजपा के इस कर्मकांड की पुष्टि प्रदेश निर्माता के परिवार के साथ 2017 का प्रकरण स्पष्ट रूप से करता है। कांग्रेस से चिड़कर भाजपा में शामिल हुआ पूर्व कांग्रेसी विधायक का परिवार पूरी तरह से गायब हो चुका है।
ऐसे बहुत से चेहरे हैं जिनका नाम राजनीतिक इतिहास के पन्नों से भी गायब हो चुका है। मजे की बात तो यह है कि प्रदेश कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री को भाजपा की यह गेम थोड़ी देर में नजर आई है। तो वहीं मुख्यमंत्री ने भी अपनी काबिलियत का दाव खेलते हुए दो व्यक्तियों के बीच कुर्सी की जंग का शगुफा छोड़ दिया है। जनता यह भी जानती है कि पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर स्पष्टवादी ईमानदार और मिलनसार व्यक्ति हैं।
हाल ही में उपदल बदल प्रकरण को लेकर जनता के बीच चाणक्य के साथ पूर्व मुख्यमंत्री की छवि पर भी आंच आई है मगर इतना नहीं की उनके हाथ जल जाए। प्रदेश में कांग्रेस के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की 15 महीना की सरकार के साथ जनता की पूरी सिंपैथी जुड़ी हुई है। प्रदेश सरकार का कर्मचारी वर्ग अभी भी पूरी सबलता के साथ कांग्रेस सरकार के साथ खड़ा है।
मगर जिस समय काल में यह खेल खेला गया है यानी आचार संहिता से कुछ दिनों पहले वह भाजपा के चाणक्य का बड़ा कद खुद व खुद साबित करता है। ऐसे में यदि भाजपा बागी कांग्रेसी विधायकों को टिकट भी देती है तो संभवत जनता उन संभावित भाजपा बनाम बगावती विधायकों को किसी भी सूरत में समर्थन नहीं देगी। ऐसे में इन विधानसभा क्षेत्र से हारे हुए प्रत्याशियों को फिर से मैदान में उतारा जा सकता है।
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