विनय, विनोद के नाम पर जनता का सवालिया निशान, क्या कांग्रेस के पास…
HNN/ नाहन
लोकसभा चुनावों को लेकर प्रदेश के दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के खेमों में जमा-घटाव की राजनीति शुरू हो गई है। भाजपा में जहां इस बार मैदान में दो महिला चेहरे उतारे जा सकते हैं तो वहीं कांग्रेस का दिग्गजों को टिकट चर्चा में शामिल करना जनता को नागवारा गुजर रहा है। हालांकि बीते 5 फरवरी को राजीव शुक्ला, राजेंद्र पाल, प्रतिभा सिंह, सुखविंदर सिंह सुक्खू तथा मुकेश अग्निहोत्री आदि की हुई बैठक को इंट्रोडक्टरी मीटिंग ही माना जा रहा है।
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बावजूद इसके अब चाहे प्रदेश इलेक्शन स्क्रीनिंग कमेटी हो या फिर सेंट्रल इलेक्शन स्क्रीनिंग कमेटी अंतिम फैसला हाई कमान के द्वारा ही किया जाना है। कांग्रेस में शिमला संसदीय सीट को लेकर स्क्रीनिंग कमेटीयां जनता की नब्ज टटोल में नामों के दाव फेंक रही है। इसके बाद आम पब्लिक की प्रतिक्रिया भी आनी शुरू हो गई है। लोगों सहित पार्टी के कार्यकर्ताओं में अब यह चर्चा और खास हो गई है क्योंकि सवाल उठ रहा है की क्या इन नामों के अलावा कर्मठ कार्यकर्ता को लेकर पार्टी में कोई योजना ही नहीं है।
बड़ी बात तो यह है कि विनय कुमार विधानसभा उपाध्यक्ष हैं और विनोद सुल्तानपुरी सोलन की कसौली सीट से विधायक हैं। विनोद सुल्तानपुरी एक बार फिर अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाने की इच्छा दबे मन में रखे हुए हैं। जबकि विनय कुमार अब कूटनीति में पारंगत हो चुके हैं। लिहाजा वह कभी नहीं चाहेंगे कि मोदी के साथ लड़ा जाए। मौजूदा समय जिस नाम पर आम जनता में चर्चा चल रही है वह है अमित नंदा।
असल में जनता का राजनीतिक विश्लेषण कहता है कि छात्र राजनीति से लेकर आज तक नंदा ने हमेशा पार्टी तथा पार्टी के द्वारा लिए गए फैसलों पर हमेशा निष्ठा रखी है। अमित नंदा विधानसभा चुनाव ना अपने गृह क्षेत्र से लड़ सकते हैं ना अपने कर्म क्षेत्र से, जबकि विनोद सुल्तानपुरी और विनय कुमार के सामने भविष्य में अपना-अपना विधानसभा क्षेत्र पक्का है। ऐसे में यदि इन दोनों में से किसी को हाई कमान फाइनल करता है तो जाहिर है कांग्रेस कार्यकर्ताओं में इस फैसले पर रोष भी पनप सकता है।
नाम न छापने की शर्त पर कई दिग्गज कार्यकर्ताओं ने कहा कि भाजपा में इस चीज का आराम है कि वहां कार्यकर्ताओं के लिए हमेशा उम्मीद बनी रहती है। जबकि कांग्रेस में हमेशा राजनीतिक इच्छा दिग्गजों के इर्द-गिर्द घूमती रहती है। वहीं इस बार अमित नंदा के नाम की चर्चा को लेकर भाजपा में भी खुसर-फुसर चली हुई है। हालांकि इस संसदीय सीट पर प्रत्याशी सिरमौर या सोलन से ही हमेशा रहते हैं।
मगर अमित नंदा के नाम पर सिरमौर, सोलन सहित सभी 17 विधानसभा क्षेत्र में समीकरण बेहतर बनते नजर आते हैं। सिरमौर से अमित नंदा, यूथ वोट विनय कुमार, अजय सोलंकी तथा पांवटा साहिब से किरनेश जंग का वरद हस्त पा सकते हैं। सोलन के दामाद होने के साथ-साथ शिमला उनके कर्म तथा अपने गृह क्षेत्र का भी उन्हें भरपूर सहयोग मिल सकता है। ऐसे में मुख्यमंत्री भविष्य में राजनीतिक समीकरणों में बेहतर तारतम्य में बनाने को लेकर अमित नंदा के नाम पर मोहर भी लगा सकते हैं।
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