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कोरोना काल के रेट पर ही शहर के नाई डाल रहे हैं लोगों की जेब पर डाका

Ankita | 4 अगस्त 2023 at 4:11 pm

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ना एप्रेन, ना फेस मास्क, 3 रुपए के ब्लेड पर 100 रुपए का चाबुक

HNN/ नाहन

जिला सिरमौर प्रशासन उपभोक्ताओं के संरक्षण को लेकर बेलगाम शहर के बार्बर पर नियंत्रण पाने में नाकाम साबित हो रहा है। प्रशासन के द्वारा कोरोना प्रोटोकोल के तहत जारी नियमों की रेट लिस्ट के बावजूद आज भी उन्हीं दामों पर शेव, कटिंग आदि के कार्य किए जा रहे हैं। हैरान कर देने वाला विषय यह भी है कि जिस एप्रेन, फेस मास्क और ग्लब्स को लेकर प्रशासन ने रेट जारी किए थे वह सभी प्रोटेक्शन पूरी तरह से गायब है।

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मैले-कुचैल एप्रेन के साथ सुबह से शाम तक एक ही एप्रेन पर दर्जनों ग्राहक निपटाए जाते हैं यही नहीं कटिंग, शेव व अन्य कार्यों के दौरान भी बार्बर फेस मास्क आदि का इस्तेमाल नहीं करता है। प्रशासन के द्वारा उस दौरान कटिंग आदि में इस्तेमाल होने वाले सभी उपकरणों को स्टरलाइज किए जाने के आदेश दिए गए थे। लेकिन वह सब नियम अब गायब हो चुके हैं मगर पैसा आज भी डिस्पोजल, एप्रेन, फेस मास्क आदि के वसूले जा रहे हैं।

शहर के प्रबुद्ध लोगों में शामिल नरेंद्र ठाकुर, जितेंद्र शर्मा, बासु, धर्मा, राकेश आदि का कहना है कि शहर में लागत से कई गुना ज्यादा दाम वसूल रहे नाई पर लगाम कस पाने में प्रशासन नाकाम साबित हो रहा है। बता दें कि सिरमौर बार्बर एसोसिएशन द्वारा बाल कटिंग रेट 80 से 100 रुपए रखा गया है। जबकि कटिंग में केवल और केवल कैंची और कंघे का ही इस्तेमाल होता है।

वहीं 3 रुपए के ब्लेड के साथ मिस्ब्रांड शेविंग फोम के साथ शेविंग का रेट 50 रुपए है। खत और दाड़ी पर 50 और 40 रुपए, जिसमें लागत मुश्किल से लेबर सहित 1 से 2 रुपए की आती है। शैम्पू का रेट 50, ड्रायर का 40, और बालों मे कलर लगाने के 200 रुपए वसुले जाते है। अब यदि कोई अपना हेयरकलर लेकर जाता है तो लेबर चार्जिस के रुप में 80 रुपए वसुले जाते हैं यहां पर भी किसी तरह का एप्रेन या डिसपोज़ल आदि इस्तेमाल नहीं किया जाता।

ब्लीचिंग का रेट 200, फेशियल का रेट 500 तो फेस मसाज का रेट 300 रुपए रखा गया है। अब यदि कोई दुकान पर ही मुंडन कराना चाहता है तो 251 रुपए और यदि घर पर मुंडन कराया जाता है तो 501 रुपए उपभोक्ता से वसूले जाते हैं। मुंडन यदि 3 रुपए के ब्लेड के साथ पूरे सर को क्लीन शेव करता है। तो वहीं एसोसिएशन के द्वारा दुकान से बाहर यदि कोई यह कार्य करना चाहता है तो उसके रेट अलग है।

अब आप खुद सोच सकते है कि शहर ही नहीं बल्कि पूरे जिला में बार्बर 3 रुपए की लागत में कितना मोटा पैसा कमा रहे है। प्रशासन दामों पर नियंत्रण रख पाने को लेकर पूरी तरह से नाकाम हो चुका है। अब यदि स्वास्थ्य विभाग की बात की जाए तो इन बार्बर शॉप पर इस्तेमाल किये जाने वाला कॉस्मैटिक घटिया से घटिया स्तर का होता है। गिने चुने बार्बर ही शेविंग में ब्रांडेड कॉस्मैटिक इस्तेमाल करते है।

प्रशासन के द्वारा इनके रेट के नियंत्रण को लेकर कहीं भी कोई भी रेट लिस्ट जारी नहीं की गई है। जिला सहित नाहन शहर में बार्बर शॉप की भारी भरमार हो चुकी है, मगर यहां सवाल यह खड़ा होता है कि इन बार्बर शॉप्स को चलाने वाला अथवा दुकानों पर काम करने वाले प्रशासन की नज़र में है या नहीं यह भी जांच का विषय है। इस बाबत जब एसोसिएशन के उपाध्यक्ष इशरार से बात की गई तो उन्होंने कहा कि शहर में दुकानों के दाम काफी ज्यादा है।

जिसके चलते खर्चे पुरे करने भी मुश्किल हो जाते है। उन्होंने कहा कि वह अगले महीने बार्बर एसोसिएशन मीटिंग कॉल करेंगे जिसमें आम आदमी की पहुँच के लिए किस तरीके से रेट कम किए जा सके, उसको लेकर चर्चा की जाएगी। बरहाल संक्रमण का केंद्र बन चुकी बार्बर शॉप्स 5 रुपए से भी कम लागत के बाद मुनाफा खोरी का धंधा जम कर रही है। इन बार्बर्स के द्वारा व्यापक स्तर पर नकली कॉस्मैटिक का इस्तेमाल कर लोगों के स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ किया जा रहा है।

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