स्वास्थ्य सेवाओं की लचर हालत और प्रशासनिक उदासीनता पर उठे सवाल
बद्दी
कांगड़ा की बेटी पल्लवी के दुखद निधन को भारतीय जनता युवा मोर्चा हिमाचल प्रदेश के राज्य मीडिया सह प्रभारी ठाकुर निशांत सिंह ने प्रदेश की प्रशासनिक कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक गंभीर धब्बा बताया है।
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बद्दी से जारी बयान में उन्होंने कहा कि यह घटना केवल एक परिवार की व्यक्तिगत क्षति नहीं, बल्कि उस भरोसे पर सीधा आघात है, जो आम नागरिक सरकार और प्रशासन पर करता है। जब न्याय के लिए संघर्ष और इलाज के लिए भटकना ही किसी की नियति बन जाए, तो यह सुव्यवस्था नहीं बल्कि खुला कुप्रबंधन है।
ठाकुर निशांत सिंह ने कहा कि पल्लवी प्रकरण में जिस तरह प्रशासनिक शिथिलता और पुलिसिया लापरवाही के आरोप सामने आए हैं, वे अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण हैं। पीड़ित परिवार को समय पर सहयोग और संवेदनशीलता के बजाय उदासीनता का सामना करना पड़ा, जो पूरे सिस्टम की विफलता को दर्शाता है।
उन्होंने मांग की कि इस मामले की पारदर्शी और समयबद्ध जांच होनी चाहिए तथा दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे कानून के दायरे में लाया जाए ताकि जनमानस में न्याय व्यवस्था के प्रति भरोसा बना रहे।
प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि कांगड़ा की यह घटना कोई अकेला मामला नहीं है, बल्कि इसे रामपुर के कुहल और तकलेच जैसी घटनाओं की श्रृंखला के रूप में देखा जाना चाहिए।
प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों में प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इलाज के केंद्र न होकर केवल रेफरल सेंटर बनकर रह गए हैं। 21वीं सदी में, जब केंद्र सरकार एम्स और मेडिकल कॉलेजों का नेटवर्क खड़ा कर रही है, ऐसे में हिमाचल प्रदेश में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी के कारण किसी की जान जाना राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
ठाकुर निशांत सिंह ने कहा कि माननीय उच्च न्यायालय द्वारा प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर की गई टिप्पणियां सरकार के लिए आत्ममंथन का विषय होनी चाहिए। स्वास्थ्य और सुरक्षा जनता का मौलिक अधिकार है, न कि कोई चुनावी वादा।
सरकार को इसे प्राथमिकता के साथ लागू करना होगा, न कि फाइलों में सीमित रखना।उन्होंने कहा कि भारतीय जनता युवा मोर्चा इस दुख की घड़ी में शोकाकुल परिवार के साथ खड़ा है और सरकार से मांग करता है कि पल्लवी मामले की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य कर्मियों की रिक्तियों पर श्वेत पत्र जारी कर समयबद्ध भर्ती सुनिश्चित की जाए तथा प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनता सब देख रही है और अब सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए ऐसी ठोस व्यवस्था बनानी होगी, ताकि भविष्य में किसी और बेटी को पल्लवी जैसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।
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