सनातन धर्म मंदिर राजगढ़ में चल रहे 15वें भक्ति ज्ञान यज्ञ के अंतर्गत शिवमहापुराण कथा के चौथे दिन आचार्य पंकज ने साधकों को संदेश दिया कि इस संसार में कुछ भी स्थायी नहीं है, इसलिए अपनी उपलब्धियों पर कभी घमंड नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रभु की भक्ति में लीन रहते हुए विनम्रता बनाए रखना ही सच्चा साधना मार्ग है।
राजगढ़
रुद्राक्ष और भस्म धारण करने का दिया महत्व का संदेश
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ब्रह्मा, विष्णु, महेश एक ही परम तत्व के स्वरूप
आचार्य पंकज ने कहा कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश में कोई भेद नहीं है, ये तीनों एक ही परम तत्व की अभिव्यक्ति हैं। उन्होंने शिव भक्तों से माथे पर त्रिपुंड, गले में रुद्राक्ष और शरीर पर भस्म धारण करने की अपील की।
रुद्राक्ष और भस्म का महत्व
उन्होंने बताया कि रुद्राक्ष धारण करने से मन, वचन और कर्म पवित्र होते हैं तथा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। भस्म धारण करना शरीर की नश्वरता की याद दिलाता है, अहंकार को नष्ट करता है और साधक को भक्ति में दृढ़ बनाता है।
द्वादश ज्योतिर्लिंगों का भावपूर्ण वर्णन
कथा के दौरान आचार्य पंकज ने द्वादश ज्योतिर्लिंगों का विस्तृत और सुंदर वर्णन किया, जिससे श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में भक्त उपस्थित रहे और भक्ति के वातावरण में डूब गए।
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