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आर्मी सिविलियन विवाद में गेट खोलने को लेकर सेशन जज ने देखा मौका

Ankita | 4 मई 2023 at 6:29 pm

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आपसी समझौते में मामले को सुलझाने को लेकर इस दिन होगा फैसला

HNN/ नाहन

नाहन श्री कृष्ण मंदिर बस स्टैंड के समीप करीब दो दशक से विवादित गेट को खोलने को लेकर सेशन जज के द्वारा मौका देखा गया। आर्मी सिविलियन विवाद के तहत बंद पड़े इस गेट का मामला माननीय सेशन जज की अदालत में विचाराधीन चल रहा है। बंद पड़े गेट को खोलने को लेकर न्यू मार्केट संघर्ष समिति कच्चा टैंक तथा एमसी नाहन के द्वारा माननीय अदालत में मामला दिया गया था।

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मामले की चल रही सुनवाई के तहत सेशन जज आर के चौधरी के द्वारा दोनों पक्षों की उपस्थिति में स्पोट निरीक्षण किया गया। नगर पालिका की ओर से अधिवक्ता एमके जैन तथा संघर्ष समिति की ओर से अधिवक्ता वीरेंद्र पाल, मनीष किशोर, महेश किशोर मौजूद रहे। वहीं आर्मी की ओर से अधिवक्ता निसार अहमद शेख तथा कर्नल भंडारी व अन्य आर्मी अधिकारी मौजूद थे।

अधिवक्ता वीरेंद्र पाल ने जानकारी देते हुए बताया कि मामले को लेकर माननीय सेशन जज के द्वारा दोनों पक्षों की मध्यस्था के साथ अंतिम निर्णय हेतु 13 मई की तारीख सुनिश्चित की गई है। उन्होंने बताया कि माननीय अदालत इस मामले में दोनों पक्षों को सुनने के बाद आर्मी की ओर से रास्ते को कैसे और कहां से दिया जाएगा, इस पर दोनों पक्षों की सहमति ली जाएगी।

जानकारी तो यह भी है कि आर्मी गेट खोलने की जगह किसी और जगह से लोगों के आवाजाही हेतु रास्ता देने के लिए तैयार भी हो चुकी है। अब जिस जगह से यह रास्ता दिया जाना है उस पर एमसी तथा संघर्ष समिति सहमत होती है या नहीं यह देखना बाकी होगा। बता दें कि रेवेन्यू रिकॉर्ड में जिस जगह गेट लगाया गया है उस पर एमसी नाहन के द्वारा दावा किया गया था। तो वहीं सुरक्षा के कारणों के चलते हुए आर्मी प्रबंधन के द्वारा इस गेट को बंद कर दिया गया था।

गेट बंद किए जाने को लेकर लोअर कैंट और अप्पर कैंट के लोगों के द्वारा विरोध प्रदर्शन भी किए गए। इस मार्ग के बंद होने के कारण श्री कृष्ण मंदिर रोड की पूरी मार्केट को भारी नुक्सान भी हुआ था। लोगों की इस सड़क पर आवाजाही बंद होने के चलते बस स्टैंड के पीछे पूरी की पूरी मार्केट के व्यापारी लंबे समय से नुक्सान उठा रहे थे।

यही नहीं इस रास्ते से होकर जाने वाले सिविलियंस को लंबे रास्ते से घूम कर जाना पड़ता था। गेट को खुलवाए जाने को लेकर संघर्ष समिति बनाई गई थी, जिन्होंने लंबे समय तक संघर्ष भी किया। संघर्ष समिति की ओर से इस पूरे मामले की पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता वीरेंद्र पाल तथा एमसी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एमके जैन के द्वारा की गई।

वीरवार को माननीय सेशन जज के विवादित स्थल पर निरीक्षण के दौरान संघर्ष समिति की ओर से संजीव सैनी, पूर्व प्रधान बाबूराम, गोरखा सभा के प्रधान रणजीत सिंह राणा, अधिवक्ता नरेश, अश्विनी गौतम आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे।

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