उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि
HNN/ शिमला
हिमाचल प्रदेश में रविवार को अग्निशमन सेवा सप्ताह का शुभारंभ हुआ। उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने शहीदों को श्रद्धांजलि देने के साथ द्वीप प्रज्जवलित कर इसका शुभारंभ किया।
हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें: Join WhatsApp Group

इस मौके पर मुख्य अग्निशमन अधिकारी संजीव कुमार, स्थानीय अग्निशमन अधिकारी मनसाराम, उप अग्निशमन अधिकारी भगतराम, उप अग्निशमन अधिकारी गोपाल दास, उप अग्निशमन अधिकारी सत्य प्रकाश और जगदीश राज के अलावा शिमला शहर से स्थित अग्निशमन केंद्रों के कर्मचारी भी मौजूद रहे।
वहीं, औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब में रविवार को सेवा सप्ताह के शुभारंभ मौके पर लीडिंग फायरमैन राजेश कुमार, प्रशामक प्रदीप कुमार, प्रशामक विकास कुमार, चालक अरूण शर्मा, प्लाटून हवलदार देविंद्र सिंह, हवलदार लाल सिंह, चालक मंजीत सिंह, चालक नरेश कुमार, गृहरक्षक शिवपाल, गृहरक्षक राजेंद्र सिंह ने दो मिनट का मौन रख शहीदों को याद किया और उन्हें श्रद्धांजलि दी।
लीडिंग फायरमैन राजेश कुमार ने बताया कि अग्निशमन सेवा सप्ताह के दौरान प्राथमिक अग्निशमन उपकरणों को चलाने और अग्नि से सुरक्षा व बचाव संबंधी जानकारी देने के लिए सार्वजनिक स्थलों, औद्योगिक क्षेत्रों, शैक्षिक संस्थानों, सरकारी और गैर सरकारी कार्यालयों आदि में जागरूकता पैदा करने के लिए प्रदर्शन एवं प्रशिक्षण इत्यादि आयोजित किए जाएंगे।
यहां समझिये इसका इतिहास….
बता दें कि 14 अप्रैल 1944 को मुंबई में लोगों की जान व माल की रक्षा करते हुए 66 अग्निशमन कर्मी वीरगति को प्राप्त हुए। उन शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित करने के उपलक्ष पर अग्निशमन सेवा सप्ताह प्रतिवर्ष 14 से 20 अप्रैल तक देशभर में मनाया जाता है।
दरअसल, 14 अप्रैल 1944 को मुंबई की विक्टोरिया डॉक पर मालवाहक समुद्री जहाज खड़ा था, जिसमें शाम 4:40 मिनट पर हुए भयंकर विस्फोट की गर्जना से पूरा मुंबई शहर हिल गया। इस जहाज में लगभग 1200 टन विस्फोटक, रुई की गाठे के अलावा खाद्यान्न व तेल आदि अन्य सामान लदा हुआ था।
विस्फोटों की तीव्रता इतनी भयंकर थी कि आग मुंबई शहर के चारों तरफ फैल चुकी थी। आग की लपटों को मीलों दूर से देखा जा सकता था। समीपवर्ती मार्ग, इमारतें, रेलवे ट्रैक, विद्युत केंद्र इत्यादि विध्वंस हो चुके थे।
आग की लपटों से शहर को खतरा हो गया था और दूसरे दिन 15 अप्रैल को तत्काल सत्तासीन प्राधिकारियों द्वारा शहर के मध्य भाग में डायनामाइट द्वारा फायर लेल बजाने का आदेश भी दिया गया था, ताकि कम से कम आधे शहर को बचाया जा सके।
यह आग सौ एकड़ से भी ज्यादा क्षेत्र में फैल चुकी थी। जिसे नियंत्रित करने के लिए कई सप्ताह का समय लगा, जबकि खाद्यान और रूई की गाठों से कई महीनों तक सुलगते रहने के कारण धुआं निकलता रहा। आखिरकार अग्निशमन कर्मी अपने अभियान में सफल रहे और मुंबई शहर को बचा लिया गया।
इस विनाशकारी अग्नि दुर्घटना में हजारों लोगों की जानें चली गईं। लोगों की जान व माल की रक्षा करते हुए 66 अग्निशमन कर्मी गौरवमयी वीरगति को प्राप्त कर शहीद हुए। 83 अग्निशमन कर्मी घायल हुए। इन अग्निशमन कर्मियों की कुर्बानी को देखते हुए मुंबई अग्निशमन मुख्यालय बायकुला में शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित करने के लिए एक स्मृति स्तंभ का निर्माण करवाया गया है।
📢 लेटेस्ट न्यूज़
हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें
ताज़ा खबरों और अपडेट्स के लिए अभी हमारे WhatsApp ग्रुप का हिस्सा बनें!
Join WhatsApp Group